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मराठा आरक्षण: जानें कैसे बना ये आंदोलन हिंसक, क्या है मांग

महाराष्ट्र के लोग आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। इनका साफ कहना है कि सरकार के वादाखिलाफी के कारण वे गुस्से में है। सरकार ने उनसे जो वादा किया उसे पूरा नहीं किया है जिसके कारण हड़ताल की नौबत आई है।

मराठा आरक्षण: जानें कैसे बना ये आंदोलन हिंसक, क्या है मांग

महाराष्ट्र इस वक्त आरक्षण की आग में जल रहा है। कहीं गाड़ियां तोड़ी जा रही है, ट्रेन रोकी जा रही है तो कहीं वाहनों को आग के हवाले किया जा रहा है। रोजी-रोटी चलाने वाले दुकानों को जबरन बंद कराया जा रहा है। आम लोग घर में सहमें हैं। स्कूल-अस्पताल सब हड़ताल की आग में झुलस रहे हैं।

मराठा आरक्षण की मांग को लेकर दो दिनों में दो प्रदर्शनकारियों ने जान गंवा दी है। इसके बाद लोगों में गुस्से की आग और तेज हो गई है। साथ ही एक अन्य अस्पताल में भर्ती है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों के हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत भी हो गई है।

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महाराष्ट्र के लोग आरक्षण की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। इनका साफ कहना है कि सरकार के वादाखिलाफी के कारण वे गुस्से में है। सरकार ने उनसे जो वादा किया उसे पूरा नहीं किया है जिसके कारण हड़ताल की नौबत आई है।

2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान बीजेपी की ओर से वादा किया गया कि उनकी सरकार बनी तो मराठाओं को सरकारी नौकरी में ओबीसी वर्ग के तहत आरक्षण दिया जाएगा। लेकिन सरकार बनने के बाद आरक्षण पूरा करने में सरकार विफल रही। आरक्षण ना मिलने के कारण महाराष्ट्र क्रांति मोर्चा ने आंदोलन की घोषणा कर दी और पूरा महाराष्ट्र बंद है।

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मराठा क्रांति मोर्चा के प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने जो वादा किया उसे पूरा करे। सरकारी नौकरी में कम से कम 16 प्रतिशत तक आरक्षण लागू किया जाए। जबतक आरक्षण को लेकर अध्यादेश नहीं लाया जाएगा आंदोलन नहीं रूकेगा।

इस मामले को लेकर पिछले साल भी जमकर आंदोलन हुआ था और कोर्ट ने आरक्षण को लेकर मौजूदा सरकार को फटकार लगाई थी। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भरोसा दिलाया था कि मराठों को शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण दिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर तबके को ही ये आरक्षण दिए जाने का प्रस्ताव है। सरकार ने 605 कार्यक्रमों में आरक्षण देने का भरोसा दिया था। हालांकि, पूर्ण आरक्षण का कोई वादा सरकार ने नहीं किया था।

बता दें कि आरक्षण को लेकर बांबे हाईकोर्ट में मामला लंबित पड़ा है। संभावना है कि कोर्ट से फैसला मिलने पर आरक्षण लागू कर दिया जाएगा लेकिन आरक्षण को लेकर सरकार कोर्ट में खरी नहीं उतर

पा रही है। हालांकि 2014 के लोकसभा चुनावों में महाराष्ट्र में भारी संख्या में सीट गंवाने के बाद हड़बड़ी में तत्कालीन सरकार 16 फीसदी मराठा आरक्षण का अध्यादेश लाई थी, लेकिन ये खामियों के चलते अदालत में टिक नहीं पाया।महाराष्ट्र में किसान और मजदूर आए दिन आत्महत्या करते रहते हैं। साथ ही यहां के युवा बेरोजगारी के शिकार है।ऐसे में प्रदर्शनकारियों का मानना है कि सरकार यदि आरक्षण देगी तो पिछड़े वर्ग को ज्यादा फायदा मिलेगा। बेरोजगारी की समस्या से निजात मिलेगा।

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