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पीएम मोदी हत्या साजिश मामला: राजधानी तक ऐसे पहुंचा नक्सलवाद

नक्सली प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साज़िश रच रहे हैं। उन्होंने राजीव गांधी हत्याकांड जैसी रणनीति पर विचार किया है। माओवादी नक्सली संगठनों की बुनियादी चिन्ता है कि मोदी 15 से अधिक राज्यों में भाजपा सरकार बनाने में कामयाब रहे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो सभी मोर्चों पर परेशानी खड़ी हो जाएगी।

पीएम मोदी हत्या साजिश मामला: राजधानी तक ऐसे पहुंचा नक्सलवाद

नक्सली प्रधानमंत्री मोदी की हत्या की साज़िश रच रहे हैं। उन्होंने राजीव गांधी हत्याकांड जैसी रणनीति पर विचार किया है। माओवादी नक्सली संगठनों की बुनियादी चिन्ता है कि मोदी 15 से अधिक राज्यों में भाजपा सरकार बनाने में कामयाब रहे हैं। यदि ऐसा ही चलता रहा तो सभी मोर्चों पर परेशानी खड़ी हो जाएगी।

कॉमरेड किसन और कुछ अन्य सीनियर कॉमरेड ने मोदी राज को खत्म करने के लिए कारगर सुझाव दिए हैं। हालांकि राजीव गांधी सरीखा हत्याकांड आत्मघाती जैसा होगा। उसके नाकाम होने की संभावना भी ज्यादा है पर पार्टी हमारे प्रस्ताव पर विचार जरूर करे।

प्रधानमंत्री मोदी को जनसभा के दौरान और रोड शो में टारगेट करना असरदार रणनीति हो सकती है। पार्टी का अस्तित्व किसी भी त्याग से ऊपर है। बाकी अगले पत्र में..। यह रोना विल्सन के मुनिरका दिल्ली वाले फ्लैट से बरामद पत्र का सारांश है।

विल्सन का दावा है कि वह जेएनयू में पीएचडी का शोधार्थी है। पुणे पुलिस ने जो पांच आरोपी गिरफ्तार किए हैं, उनमें विल्सन भी है। यदि साजिश की ई-मेल और जब्त पांच चिट्ठियों के खुलासे सच हैं तो यह बेहद गंभीर और संवेदनशील मामला है।

माओवादी अपने वजूद के लिए प्रधानमंत्री मोदी को ही नहीं हिन्दुत्व को भी गंभीर चुनौती मानते हैं। लिहाजा मोदी और हिन्दुत्व के विरोध में एक ब्रिगेड सक्रिय है। सरकार कुछ भी कहे, लेकिन नक्सलवादी विस्तार अबभी देश के करीब 120 जिलों में है।

गृह मंत्री राजनाथ सिंह भी मानते हैं कि नक्सली प्रभाव वाले क्षेत्रों की संख्या 135 जिलों से घटकर 90 रह गई है। यथार्थ यह है कि नक्सली जंगलों में एक समानांतर लड़ाई लड रहे हैं और शहरों में एक कथित बौद्धिक वर्ग उनका समर्थक, पैरोकार भी है और विभिन्न स्तरों पर प्रचार भी करता है। अदालतों में केस भी लड़ता है।

प्रख्यात लेखिका अरुंधती रॉय भी सरेआम इसी जमात में शामिल हैं। मौजूदा केस में रोना विल्सन मूलतः केरल का है, लेकिन बीते कई वर्षों से दिल्ली में ही बसा है। उसे दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर रहे जी.एन.साईबाबा का करीबी माना जाता है। साईबाबा को मई, 2014 में गिरफ्तार किया गया था।

मार्च, 2017 में कोर्ट ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई। पुलिस का दावा रहा है कि साईबाबा की गैर-मौजूदगी में विल्सन ने शहर के माओवादी संगठनों और जंगलों में सक्रिय नक्सलियों के बीच समन्वय का काम संभाला था।

उसके अलावा जो गिरफ्तार किए गए हैं,उनमें सुरेन्द्र गडलिंग वकील हैं, शोमा सेन नागपुर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं, महेश राउत एक्टिविस्ट और सुधीर ढावले पत्रकार हैं। देश की राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में नक्सल-समर्थक जमात पसरी हुई है।

सूचना यह है कि दिल्ली के कनॉट प्लेस की बगल में हनुमान गली के एक फ्लैट में मैंने खुद माओवादी गतिविधियां देखी हैं। यह दावा नहीं है कि उस फ्लैट में भी साजिश की जाती थीं, लेकिन माओवादियों का लक्ष्य 2050 दिल्ली की सत्ता पर काबिज होने का है।

बहरहाल साजिश देश के प्रधानमंत्री को लेकर रची जा रही है, लिहाजा इसे ‘चुनावी हथकंडा’ और ‘प्लांट न्यूज’ मत कहें। यह राजनीति का मुद्दा नहीं है। जब तक एजेंसियां जांच करके निष्कर्ष अदालत तक नहीं पहुंचाती हैं।

तब तक जुबान को लगाम दें। धमकी किसी और अतिविशिष्ट व्यक्ति को भी दी जा सकती है। इसलिए जरूरी है कि जांच एजेंसियों को अपना काम करने दिया जाए।

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