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देश के कई राज्यों में होगा बिजली संकट, 70 कंपनिया दिवालियां हो सकती हैं घोषित

देशभर के कई राज्यों में बिजली का बड़ा संकट खड़ा होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं, क्योंकि देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई हैं।

देश के कई राज्यों में होगा बिजली संकट, 70 कंपनिया दिवालियां हो सकती हैं घोषित

देशभर के कई राज्यों में बिजली का बड़ा संकट खड़ा होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। क्योंकि देश की बड़ी-बड़ी कंपनियां दिवालिया होने की कगार पर पहुंच गई हैं। बिजली कंपनियों के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जो डेडलाइन तय की थी, वह 27 अगस्‍त (सोमवार) को खत्‍म हो गई है।

केंद्रीय रिजर्व बैंक ने कंपनियों को मोहलत देने को मना कर दिया है। देश की जानी-मानी कंपनी जिंदल के देश के कई राज्यों में प्लांट मौजूद हैं जिनमें रायपुर-छत्तीसगंढ़, नागपुर-महाराष्ट्रा, नई दिल्ली, गुजरात शामिल हैं।

वहीं इसी तरह से प्रयागराज पॉवर कंपनी का प्लांट नोएडा- उत्तर प्रदेश, जेपी पॉवर वेंचर का प्लांट इलहाबाद-उत्तर प्रदेश और झबुआ पॉवर कंपनी का प्लांट मध्य प्रदेश के सिवनी जिले के घंसौर में मौजूद है।

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बता दें कि रिजर्व बैंक ने फरवरी 2018 में एक सर्कुलर में स्पष्ट किया था कि कर्ज में डूबीं 70 कंपनियां इसे चुकाने में देरी कर रही हैं। तो उन कंपनियों को डिफॉल्टर मान कर उनके कर्ज की गई रकम को एनपीए (फंसा लोन) घोषित कर दिया जाएगा। यह 1 मार्च 2018 से लागू हो गई थी।

बैंकों को ऐसे सभी पिछले मामलों को सुलझाने के लिए 1 मार्च 2018 से 180 दिनों का समय दिया गया था। जो सोमवार (27 अगस्‍त) को पूरा हो चुका है। इस दौरान कंपनियों और बैंकों के बीच जो मामले नहीं सुलझे उन सभी कंपनियों के खातों को दिवालिया घोषित करने की प्रक्रिया में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा सकता है। इन खातों में बैंकों का कुल 3,800 अरब रुपये का कर्ज फंसा है।

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आरबीआई ने इन 70 कंपनियों को 15 दिन का समय दिया था ताकि वे अपना वकील और रेजोल्यूशन प्रोफेशनल प्वाइंट कर सकें। अगर इन 15 दिन में कंपनियों कोई समाधान पेश करती हैं, और वह सभी कर्ज देने वाले बैंकों को मंजूर होती हैं तो इन खातों को कोर्ट नहीं भेजा जाएगा।

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