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GST: आजादी से लेकर अब तक हुए ये बड़े बदलाव

एफडीआई को देश की ओर खींचने के लिए देश में फॉरन इनवेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड का गठन किया गया था।

GST: आजादी से लेकर अब तक हुए ये बड़े बदलाव

शुक्रवार को रात 12 बजे देशभर में ऐतिहासिक कहा जाने वाला वस्तु एवं सेवा कर लागू हुआ। जीएसटी को भारत के इतिहास में सबसे बड़ा टैक्स रिफॉर्म कहा जा रहा है। माना जा रहा है कि जीएसटी लागू होने के बाद अर्थव्यवस्था मजबूत हो जाएगी और भ्रष्टाचार में भी कमी आएगी।

आज हम आपको बताने जा रहे हैं जीएसटी के पहले देश की अर्थव्यवस्था में और कौन से बड़े बदलाव हुए हैं जिन्होंने अर्थव्यवस्था को झकझोर कर रख दिया था।
1. राष्ट्रीयकरण- कुछ क्षेत्रों में निजी व्यवसायों का सरकार ने अधिगृहण किया था। 1969 में बैंकों के बड़े पैमाने पर राष्ट्रीयकरण, 1972 में बीमा कारोबार और 1972 में कोयले और तेल में मौलिक रूप राष्ट्रीयकरण से अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ था।
2. फेरा (FERA)- यह इंदिरा गांधी के समय का रिफॉर्म है। इसे विदेशी मुद्रा की बचत के लिए लागू किया गया था। इसने कई क्षेत्रों में विदेशी स्वामित्व वाली कंपनियों के आगमन को प्रोत्साहित किया और ऐसा हुआ भी। ऐसा इसलिए किया गया था ताकी विदेशी शेयरों को 40 प्रतिशत या उससे कम किया जा सके। इसके बाद 1977 में कोकोकोला भारत से बाहर चली गई।
3. 100 फीसदी के पास था इनकम टैक्स- इंदिरा गांधी के सोशलिस्ट फेज के दौरान 1970 की शुरूआत में इनकम टैक्स का रेट 98.75 फीसदी था। इसका अर्थ है कि हर 100 रुपए की कमाई पर आप केवल 1.25 ही रख सकते थे। टैक्स चोरी के बहुत से केस उस दौरान आए थे।
4.डीलाइसेंसिंग- यह लाइसेंस राज की समाप्ति के लिए उठाया गया कदम था। इसका मतलब था की पोटेंशियल डिमांड को पूरा करने के निजी भारतीय व्यापारियों को सरकार की अनुमति लेने की जरूरत नहीं थी।
5.विनियम दरों में मुक्ति- विदेशी मुद्रा के बदले भारतीय मुद्रा के एक्चेंज रेट को सीमित रखा गया था।
6. विदेशी निवेश के नियमें में आसानी- एफडीआई को देश की ओर खींचने के लिए देश में फॉरन इनवेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड का गठन किया गया था। इसके इलावा भारतीय स्टॉक मार्केट में पोर्टफोलियो निवेशकों को प्रवेश करने की अनुमति दी गई थी।
7. एलपीजी- लिब्रलाइजेशन, प्राइवेटाजेशन और ग्लोबलाइजेशन से देश में बहुत बड़ा बदलाव हुआ। इसका अर्थ है उदारीकरण, निजीकरण और ग्लोबलाइजेशन यानी निजी कंपनियों को इस दौरान ज्यादा एक्पोजर मिला और एफडीआई को भी देश की ओर आकर्षित किया गया।
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