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ट्रंप के ''अमेरिका फर्स्ट'' बयान से कोई फर्क नहीं पड़ता: पर्रिकर

पर्रिकर ने कहा कि उनके पास ट्रंप के बयान की लिखित में कोई जानकारी नहीं आई है।

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बेंगलुरु. रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का कहना है कि उन्हें अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिका फर्स्ट वाले बयान से कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इस बारे में उनके पास लिखित में कोई जानकारी नहीं आई है। वो केवल उनके बयान के बारे में मीडिया में पढ़ रहे हैं। अमेरिकी सरकार की ओर से भी उनके पास कुछ नहीं आया है। यह बातें पर्रिकर ने यहां मंगलवार को एरो इंडिया शो 2017 के उद्घघाटन के मौके पर आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से बातचीत में कही। उन्होंने कहा कि इस सवाल को आपको बोइंग और लॉकहीडमार्टिन जैसी कंपनियों के सामने उठाना चाहिए। मैंने जो कुछ कहा, वो मेरी पंसद के हिसाब से है। मैं मेक इन इंडिया चाहता हूं। अगर कोई अपनी प्रोडक्शन लाइन को किसी दूसरी जगह पर स्थानांतरित करना चाहता है, तो यह उसकी पंसद है। इसमें मेरी कोई चिंता नहीं है।
उन्होंने वास्तविक उपकरण निर्माता (ओईएम) के बारे में बताते हुए कहा कि रणनीतिक भागीदार के मामले में उसे अपनी कंपनी की मंजूरी की आवश्यकता होगी। अगर वो किसी बारे में कुछ प्रस्ताव रखते हैं तो यह बेहद जरूरी होगा। उनकी सरकार की ओर से उन्हें सैद्धांतिक मंजूरी दी जाएगी। जिसके बाद ही किसी मामले में हम आगे बढ़ सकेंगे। कंपनी कभी भी किसी मामले में कुछ शुरू करने के पक्ष में नहीं होगी। हो सकता है कि उनकी कोई और शाखा ऐसा करेगी। इसमें हस्तक्षेप करते हुए नागर विमानन मंत्री अशोक राजू ने कहा कि बोइंग नागपुर में बीम्स बना रही है और एचएएल एयरबस के लिए दरवाजे बना रहा है।
विमानन के क्षेत्र में काम करना एक प्रकार से कई देशों की सीमाआें को लांघने की तरह है। इसलिए यह अच्छा होगा कि आप इस बारे में कंपनियों से बात करें। इसमें जोड़ते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक सप्लाई चेन का हिस्सा है। रक्षा मंत्री ने कहा कि बीते वर्ष सीमा पर हो रहे संघर्षविराम उल्लंधन के मुकाबले हम अब सीमा पर हुई शांति का स्वागत करते हैं। बॉर्डर पर बनी हुई शांति किसी के लिए चिंता का विषय नहीं है। क्योंकि किसी भी देश को अपने पड़ोस में बनी हुई शांति से दिक्कत नहीं होगी। इस स्थिति का यह अर्थ नहीं है कि तुम तैयारी मत रहो। मैं जनरल बाजवा के पड़ोसियों की चिंतिओं को समझने के बयान का स्वागत करता हूं। उन्होंने कहा कि भारत, पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ शांति चाहता है। हम दोनों के साथ अच्छे संबंध चाहते हैं। लेकिन मुझे नहीं पता कि हम दोनों लड़ते क्यों रहते हैं और एक दूसरे को शक से ही क्यों देखते हैं? जहां तक मेरी बात है, मैं किसी शक वाली बात को तव्वजो नहीं देता हूं। इसका यह मतलब नहीं है कि मैंने अपनी तैयारी को रोक दिया है। इसलिए किसी को मेरे बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है।
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