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ममता के आरोपों का सेना ने दिया जवाब, दिखाए कई सबूत

तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा में इसे एक साजिश करार दिया था

ममता के आरोपों का सेना ने दिया जवाब, दिखाए कई सबूत
कोलकाता. पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय नबन्ना भवन के पास स्थित टोल प्लाजा पर सेना के जवानों की तैनाती पर मचे बवाल पर शुक्रवार को संसद में जमकर हंगामा हुआ। तृणमूल कांग्रेस ने लोकसभा में इसे एक साजिश करार देने के साथ राज्य प्रशासन को विश्वास में नहीं लेने का आरोप लगाया था। इस पर बंगाल एरिया के जीओसी मेजर जनरल सुनील यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर टीएमसी के सभी आरोपों का खंडन किया। सेना ने कई दस्तावेज भी सामने रखे हैं जो इस बात की पुष्टि करते हैं कि सेना ने इस रूटीन एक्सर्साइज को करने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचित किया था।
सेना का रूटीन एक्सर्साइज
मेजर जनरल सुनील यादव ने कहा, 'यह एक रूटीन एक्सर्साइज है जो सेना के परिचालन संबंधी उद्देश्यों के लिए किया जाता है। सेना की ईस्टर्न कमांड स्थानीय स्तर पर वार्षिक डेटा इक्ट्ठा करने का रूटीन काम कर रही है।' टोल प्लाजा पर सेना की तैनाती के जवाब में उन्होंने कहा, 'विभिन्न राज्यों के सभी एंट्री पॉइंट्स पर सेना सिर्फ भारी वाहनों के डेटा इक्ट्ठा कर रही है। यह एक वार्षिक एक्सर्साइज है जो हर साल किया जाता है। और यह एक्सर्साइज सेना अकेले नहीं बल्कि स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर कर रही है।'
तारीखों में हुआ बदलाव
मेजर जनरल ने कहा, 'पूरे क्षेत्र में इस तरह के 80 डेटा कलेक्शन पॉइंट हैं और हर पॉइंट पर सेना के 5 से 6 जवान तैनात हैं जिनके पास किसी तरह का कोई हथियार नहीं है। इसी तरह का एक्सर्साइज इससे पहले यूपी, बिहार और झारखंड में भी इसी साल 26 सितंबर से 1 अक्टूबर के बीच हो चुका है।' उन्होंने कहा कि पहले यह एक्सर्साइज 28, 29, 30 नवंबर को होने वाली थी लेकिन भारत बंद की वजह से कोलकाता पुलिस ने इन तारीखों पर आपत्ति दर्ज करवायी थी जिसके बाद तारीख को बदलकर 1 और 2 दिसंबर कर दिया गया था और इस बारे में पुलिस को सूचना भी दी गई थी।
सेना ने दिखायी चिट्ठी
टीएमसी ने आरोप लगाया कि अपनी इस रूटीन एक्सर्साइज के बारे में सेना ने पश्चिम बंगाल सरकार और स्थानीय पुलिस को कोई सूचना नहीं दी थी। इस पर सेना ने एक दो नहीं बल्कि 9 नोटिफिकेशन दिखाए। इसमें ऑफिस ऑफ कमिश्नर ऑफ पुलिस, एचआरबीसी जिसके अंडर में विद्या सागर सेतु टोल प्लाजा आता है, हावड़ा के पुलिस कमिश्नर और ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल सेक्रेटरी को भेजा गया नोटिफिकेशन शामिल है। ये सारे सबूत बताते हैं कि सेना ने अचानक कोई कदम नहीं उठाया बल्कि राज्य प्रशासन और स्थानीय पुलिस को इस बारे में पहले ही सूचित किया गया था।
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