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दार्जिलिंग हिंसा: ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर लगाया ये बड़ा आरोप

इस हिंसा में लापरवाही बरतने के आरोप में 10 आईपीएस अधिकारियों का भी तबादला कर दिया गया है।

दार्जिलिंग हिंसा: ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर लगाया ये बड़ा आरोप

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दार्जिलिंग में जारी अशांति और बशीरहाट में हुई हिंसा के पीछे मोदी सरकार पर साजिश रचने का आरोप लगाया है।

सीएम ने बशीरहाट में हुई हिंसा की न्यायिक जांच के लिए एक समिति का भी गठन किया है। उधर, नॉर्थ 24 परगना जिले के एसपी भास्कर मुखर्जी को हटा दिया गया है।

सी सुधाकर को नया एसपी बनाया गया है। इसके अलावा, 10 आईपीएस अफसरों का तबादला कर दिया गया है। ममता ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने खिलाफ विरोध करने वाली हर पार्टी को निशाना बना रही है।

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दार्जिलिंग से 15 किलोमीटर दूर सोनाडा में एक युवक का शव बरामद होने के बाद यहां फिर से हिंसा भड़क उठी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने आधी रात को युवक को उस वक्त गोली मार दी, जब वह दवा लेकर घर जा रहा था।

हालांकि अभी तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है कि मृतक ताशी भूटिया गोरखा नेशनल लिबरेशन फ्रंट का सदस्य था या गोरखा जन मुक्ति मोर्चा का।

तृणमूल नेता गौतम देब ने कहा कि सोनाडा में आधी रात को कोई पुलिस फायरिंग नहीं हुई है, ताशी भूटिया की मौत किस कारण से हुई है इसकी जांच होगी। गोरखालैंड समर्थकों ने सोनाडा पुलिस स्टेशन पर पथराव किया।

लोगों को काबू करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। गोरखा जन मुक्ति मोर्चा के नेता बिमल गुरुंग मामले में एक बैठक भी बुलाई है। अलग राज्य की मांग को लेकर दार्जिलिंग में अनिश्चितकालीन हड़ताल का आज 24वां दिन है।

पुलिस पर हत्या का आरोप

पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, हमारे पास पुलिस गोलीबारी की कोई रिपोर्ट नहीं है। मामले की जांच की जा रही है। जीजेएम और अन्य पर्वतीय दलों ने पुलिस पर युवक की हत्या का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है।

जीजेएम नेता बिनय तमांग ने कहा, पुलिस ने बिना कारण ही युवक की हत्या कर दी। उसके शरीर पर गोलियों के जख्म के निशान हैं। इसमें शामिल पुलिसकर्मियों को सजा दी जाए।

दैनिक उपयोगी वस्तुओं की बेहद कमी

मौत की खबर फैलते ही सैकड़ों गोरखालैंड समर्थक सड़कों पर उतर आए और पुलिस के खिलाफ नारे लगाने लगे। वहीं, हड़ताल के चलते खाद्य आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होने के बीच जीजेएम और विभिन्न एनजीओ ने लोगों के बीच भोजन वितरित किया। दवा की दुकानों को छोड़कर सभी दुकानें, स्कूल, कॉलेज बंद रहे और इंटरनेट सेवाएं 21वें दिन भी बाधित रही।

बता दे कि सोशल मीडिया पर (फेसबुक) पर एक अपमानजनक पोस्‍ट के बाद दो समुदाय आमने-सामने आ गए थे। जिसके बाद हिंसा भड़क गई थी। मंगलवार (4 जुलाई, 2017) को भीड़ ने पुलिस बल पर हमला किया और उनकी कई गाड़ियां फूंक दीं गई थी।

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