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मालदीव ने चीन और पाकिस्तान भेजे विशेष दूत, भारत से कोई सम्पर्क नहीं

संकट के बीच मालदीव ने चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब को अपने विशेष दूत भेजे हैं।

मालदीव ने चीन और पाकिस्तान भेजे विशेष  दूत, भारत से कोई सम्पर्क नहीं

मालदीव ने चीन, पाकिस्तान और सऊदी अरब को दोस्त मानते हुए वहां अपने विशेष दूत भेजे हैं। उनसे कहा है कि तीनों देशों को मालदीव के हालात बताएं। मालदीव ने भारत से कोई सम्पर्क नहीं किया है।

इस बीच अमेरिका ने मालदीव से राजनीतिक संकट हल करने की अपील की है। यूएस के हवाले से मालदीव सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन, आर्मी, पुलिस कानून के मुताबिक काम करें।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले लागू किए जाएं। यामीन संसद के सही तरीके से काम करने को सुनिश्चित करें, साथ ही लोगों और संस्थाओं के अधिकार बहाल किए जाएं। देश में राष्ट्रपति यामीन का विरोध हो रहा था।

इसके चलते उन्होंने 5 फरवरी को देश में 15 दिन के लिए इमरजेंसी लगा दी थी। निर्वासित पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने भारत से मदद मांगी है। उधर चीन ने कहा है कि भारत के मालदीव में दखल से हालात और बिगड़ेंगे।

मालदीव ने किसे-कहां भेजा

मालदीव के आर्थिक विकास मंत्री मोहम्मद सईद को चीन और विदेश मंत्री डॉ. मोहम्मद असीम को पाकिस्तान भेजा गया है। वहीं, कृषि मंत्री डॉ. मोहम्मद शाइनी को देश के हालात की जानकारी देने के लिए सऊदी अरब भेजा गया है।

मालदीव संकट पर क्या बोले अमेरिका, ओआईसी और चीन

अमेरिका मालदीव के लोगों के साथ खड़ा है। राष्ट्रपति यामीन, आर्मी और पुलिस को देश का सम्मान करना चाहिए। उन्हें इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स और उनके प्रति प्रतिबद्धता को भी ध्यान में रखना चाहिए।

इस बीच यूएन के ह्यूमन राइट्स कमिश्नर जीद राद जीद अल हुसैन ने कहा कि मालदीव में इमरजेंसी लगाने से देश में संविधान का शासन खत्म हो जाएगा, जिससे देश में बैलेंस बिगड़ेगा और लोकतांत्रिक मूल्यों को कायम रखने में दिक्कत होगी।

ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कंट्रीज (ओआईसी) ने भी मालदीव में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति बिगड़ने पर चिंता जताई है। उन्होंने ये भी कहा कि सभी पार्टियों को कानून पर आधारित शासन को ही मानना चाहिए और ज्यूडिशियरी को आजाद रखना चाहिए।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा, अंतरराष्ट्रीय समुदाय मालदीव की संप्रभुता का सम्मान करे। ऐसा कोई कदम नहीं उठना चाहिए, जिससे हालात और खराब हों। मालदीव के नेता मौजूदा संकट सुलझा लेंगे।

2012 से मालदीव में गहराया संकट

2008 में मोहम्मद नशीद पहली बार देश के चुने हुए राष्ट्रपति बने थे। 2012 में उन्हें पद से हटा दिया गया। इसके बाद से ही मालदीव में दिक्कत शुरू हुई।

1 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद समेत 9 लोगों के खिलाफ दायर एक मामले को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने इन नेताओं की रिहाई के आदेश भी दिए थे।

कोर्ट ने राष्ट्रपति अब्दुल्ला की पार्टी से अलग होने के बाद बर्खास्त किए गए 12 विधायकों की बहाली का भी ऑर्डर दिया था। सरकार ने कोर्ट का यह ऑर्डर मानने से इनकार कर दिया था, जिसके चलते सरकार और कोर्ट के बीच तनातनी शुरू हो गई।

कई लोग राष्ट्रपति अब्दुल्ला के विरोध में सड़कों पर आए थे। विरोध देखते हुए सोमवार को देशभर में 15 दिन की इमरजेंसी का एेलान कर दिया गया।

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