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महात्मा गांधी पुण्यतिथि 2019 : गांधीवाद क्या है?

आज महात्मा गांधी की 71वीं पुण्यतिथि (mahatma gandhi death anniversary) है। अक्सर लोग गांधीवाद की बात करते हैं इसलिए हम आपके लिए लाये हैं इस सवाल का जवाब कि गांधीवाद क्या होता है (what is gandhism)..?।

महात्मा गांधी पुण्यतिथि 2019 :  गांधीवाद क्या है?
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आज महात्मा गांधी की 71वीं पुण्यतिथि (mahatma gandhi death anniversary) है। अक्सर लोग गांधीवाद की बात करते हैं इसलिए हम आपके लिए लाये हैं इस सवाल का जवाब कि गांधीवाद क्या होता है (what is gandhism)..?।

दीदी, भारत के 11वें राष्ट्रपति डाॅ. एपीजे अब्दुल कलाम के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए किसी ने उन्हें मिसाइल मैन कहा, किसी ने जनता का राष्ट्रपति, किसी ने वैज्ञानिक व चिंतक कहा। यह सब बातें तो मेरी समझ में आ गयीं लेकिन एक बात मेरी समझ में नहीं आई।

‘‘वह क्या?’’

‘‘कुछ लोगों ने उन्हें गांधीवादी कहा। यह गांधीवाद क्या होता है?’’

‘‘हमारे देश को राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी ने आजाद कराया, जिन्हें महात्मा गांधी के नाम से संबोधित किया जाता है।’’

‘‘यह तो मुझे मालूम है, लेकिन यह गांधीवाद क्या है?’’

‘‘वही बता रही हूं। थोड़ा धैर्य तो रखो।’’

‘‘अच्छा।’’

‘‘महात्मा गांधी ने जीवन व्यतीत करने और बेहतर समाज विकसित करने के कुछ सिद्धांत दिये थे। इन सिद्धांतों को ही गांधीवाद कहा जाता है। जो व्यक्ति इन सिद्धांतों के अनुसार अपना जीवन व्यतीत करता है उसे गांधीवादी कहते हैं, जैसा कि डाॅ. कलाम थे।’’

‘‘तो साधारण जीवन और उच्च विचार वाले व्यक्ति को गांधीवाद कहते हैं।’’

‘‘हंा, यह बात भी सही है। लेकिन गांधी जी के सिद्धांत केवल इसी बात तक सीमित नहीं थे। उनके सिद्धांत सम्पूर्ण मानवता के लिए संदेश थे बल्कि हैं क्योंकि वह सर्वमान्य सत्य पर आधारित हैं।’’

‘‘मसलन, गांधीजी के विचार क्या थे?’’

‘‘गांधी जी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान सत्याग्रह था।’’

‘‘वह क्या है?’’

‘‘सत्याग्रह संस्कृत भाषा का शब्द है जो सत्य और आग्रह दो शब्दों से मिलाकर बना है और इसका अर्थ है सत्य के लिए आग्रह करना। सत्य का अर्थ उचित और न्यायपूर्ण होता है और आग्रह का अर्थ है किसी वस्तु को इतनी शक्ति और धैर्य से पकड़ना कि वह वस्तु व्यक्ति के व्यक्तित्व का एक भाग बन जाए और उस वस्तु की रक्षा के लिए सभी प्रकार के विरोधों को सहन किया जाये। इस प्रकार सत्याग्रह वह कार्य है जिसे एक व्यक्ति न्याय और शक्ति की रक्षा के लिए अनेक कठिनाइयों के होते हुए भी करने को तत्पर रहे। सत्याग्रह अहिंसा पर आधारित है। इसी वजह से गांधी जी का कहना था कि एक व्यक्ति को सत्य की रक्षा और अत्याचार का विरोध मरते दम तक करना चाहिए। लेकिन इसे करते हुए विरोधी को भी कोई हानि नहीं पहुंचनी चाहिए।’’

‘‘गांधीवाद में और क्या सर्वमान्य सत्य हैं?’’

‘‘यही कि हमें विचारों, शब्दों और कार्यों में अहिंसा का पालन करना चाहिए। ईश्वर सभी व्यक्तियों का पिता है और सभी व्यक्ति भाई भाई हैं। इस कारण हमें सभी को प्यार करना चाहिए।’’

‘‘गांधीजी ने यह भी तो कहा था कि अगर तुम्हारे गाल पर कोई चांटा मारे तो उसके आगे अपना दूसरा गाल कर दो।’’

‘‘दरअसल, गांधीवाद का मूल आधार यह है कि हमें असत्य, अत्याचार और शोषण का विरोध प्रत्येक स्थान पर करना चाहिए। लेकिन हमें दण्ड देने के स्थान पर क्षमा करना सीखना चाहिए। हम अपने आदर्शों की पूर्ति के लिए बड़े से बड़ा त्याग करने के लिए हमेशा तैयार रहें। इसके अतिरिक्त हमें अपने शत्रु से भी प्रेम करना चाहिए और हमें केवल अपने कर्तव्य की पूर्ति करना चाहिए व परिणामों पर विचार नहीं करना चाहिए।’’

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