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महात्मा गांधी पुण्यतिथि 2019: महात्मा गांधी के इन 6 आंदोलन से अंग्रेजों के छूट गए थे छक्के

राष्ट्रपिता मोहनदास करमचन्द गांधी (Mohandas Karamchand Gandhi) की आज 71वीं पुण्यतिथि (Mahatma Gandhi 71th Death Anniversary) है। मोहनदास करमचन्द गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian independence movement) के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे।

महात्मा गांधी पुण्यतिथि 2019: महात्मा गांधी के इन 6 आंदोलन से अंग्रेजों के छूट गए थे छक्के

राष्ट्रपिता मोहनदास करमचन्द गांधी (Mohandas Karamchand Gandhi) की आज 71वीं पुण्यतिथि (Mahatma Gandhi 71th Death Anniversary) है। मोहनदास करमचन्द गांधी भारत एवं भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन (Indian independence movement) के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। महात्मा गांधी को शांति और अहिंसा के अंतर्राष्ट्रीय प्रतीक के रूप में भी माना जाता है। 2 अक्टूबर 1869 को जन्मे महात्मा गांधी की नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी थी। नाथूराम गोडसे ने उस समय गांधी जी को गोली मारी जब वे नई दिल्ली के बिड़ला भवन 'बिरला हाउस के मैदान में रात चहलकदमी कर रहे थे'। गांधी जी के जन्मदिवस को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। महात्मा गांधी भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के एक जाने माने शख्स थे। महात्मा गांधी ने जो भी आंदोलन किए वे सभी अहिंसा की विचारधारा का पालन करते हुए किए थे। तो चलिए जानते हैं कि महात्मा गांधी ने कौन-कौन से प्रमुख आंदोलन किए थे और क्यों किए थे..

महात्मा गांधी के आंदोलन (Mahatma Gandhi's Movement)

* चंपारण आंदोलन (1917)

* खेड़ा आंदोलन (1918)

* खिलाफत आंदोलन (1919)

* असहयोग आंदोलन (1920)

* सविनय अवज्ञा आंदोलन (1930)

* भारत छोड़ो आंदोलन (1942)

चंपारण आंदोलन..

साल 1915 में जब महात्मा गांधी विदेश से भारत लौटे तो उस समय देश अत्याचारी अंग्रेजों के शासन के अधीन था। किसानों को उपजाऊ जमीनों पर अंग्रेजों ने नील और अन्य नगदी फसलों को उगाने के लिए मजबूर किया था। इतना ही नहीं अंग्रेजों ने इन फसलों को कम दामों में बेच दिया। कुछ मौसम की बदलहाली और अंग्रेजों के अत्याचार के कारण किसानों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जब महात्मा गांधी ने चंपारण में किसानों की दयनीय स्थिति के बारे में सुना था तो उन्होंने अप्रैल 1917 में वहां का दौरान करने का फैसला किया। गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दृष्टिकोण को अपनाया और प्रदर्शन शुरू किया। गांधी जी ने अंग्रेजी जमींदारों के खिलाफ शुरू कर दी। जिस कारण अंग्रेजी जमींदारों को झुकना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप, अंग्रेजों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसमें उन्होंने किसानों को नियंत्रण और क्षतिपूर्ति प्रदान की और राजस्व और संग्रह में बढ़ोत्तरी को रद्द कर दिया था। इस आंदोलन की सफलता से गांधी जी को महात्मा की उपाधि हासिल हुई।

खेड़ा आंदोलन..

साल 1918 में हुआ खेड़ा आंदोलन अंग्रेज सरकार की कर-वसूली के विरुद्ध एक आंदोलन था। गुजरात के खेड़ा जिले में अंग्रेज सरकार किसानों से कर यानी टैक्स वसूली करती थी जिस कारण खेड़ा आंदोलन शुरू हुआ। साल 1918 में गुजरात का खेड़ा गांव बाढ़ और अकाल पड़ने की वजह से काफी प्रभावित हुआ था। जिस कारण किसानों की पूरी की पूरी फसलें बर्बाद हो गई थी। जब किसानों की फसलें बाढ़ और अकाल पड़ने की वजह से प्रभावित हुई तो किसानों ने अंग्रेज सरकार ने टैक्स में छूट देने की अपील की थी, लेकिन अंग्रेज सरकार ने किसानों की इस अपील को ठुकरा दिया था।

जिसके बाद गांधी जी और वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में, किसानों ने अंग्रेज सरकार के खिलाफ एक क्रूसयुद्ध की शुरुआत थी। आंदोलन के दौरान किसानों ने अंग्रेज सरकार को टैक्स नहीं देने का वचन लिया। इसके बाद अंग्रेज सरकार ने किसानों की जमीनों को जब्त करने की धमकियां देने शुरू कर दिया इसके बाद भी किसान अपने वचन पर अड़े रहे। किसानों का यह संघर्ष लगातार पांच महीने तक चला, अंग्रेज सरकार ने मई 1918 में जब तक कि जल-प्रलय खत्म नहीं हो गया, गरीब किसानों से कर की वसूली बंद कर दी। साथ ही सरकार ने किसानों की जब्त की गई संपत्ति को भी वापस कर दिया।

खिलाफत आंदोलन..

पहला विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला था। प्रथम विश्व युद्ध के समाप्त होने के बाद खलीफा और तुर्क साम्राज्य पर कई अपमानजनक आरोप लगाए गए। मुस्लिम समाज के लोग अपने खलिफा की सुरक्षा के लिए बेहद डरे हुए थे और तुर्की में खलीफा की दयनीय स्थिति को सुधारने और अंग्रेज सरकार के खिलाफ लड़ने के लिए गांधी जी के नेतृत्व में खिलाफत आंदोलन शुरू हुआ।

साल 1919 में गांधी जी ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपने राजनीतिक समर्थन के लिए मुस्लिम समाज से संपर्क किया था। इसके बादले में गांधी जी ने मुस्लिम समुदाय को खिलाफत आंदोलन शुरू करने में सहयोग किया था। खिलाफत आंदोलन की सफलता ने महात्मा गांधी को कुछ ही समय में राष्ट्रीय नेता बना दिया।

असहयोग आंदोलन..

पंजाब के अमृतसर में हुए जलियावालां बाग हत्याकांड ने महात्मा गांधी को झकझोर कर दिया था। 1920 में असहयोग आंदोलन के शुरू करने के पीछे मात्र यही कारण था। इस हत्याकांड के बाद महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग आंदोलन शुरू करने का फैसला लिया। गांधी ने लोगों को विश्वास दिया कि शांतिपूर्ण तरीके से असहयोग आंदोलन का पालन करना ही स्वतंत्रता प्राप्त करने की कुंजी है।

इसके बाद गांधी जी ने स्वराज की अवधारणा तैयार करके भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का मुख्य हिस्सा बन गए। धीरे-धीर असहयोग आंदोलन तेजी से बढ़ता चला गया और लोगों ने अंग्रेजों द्वारा संचालित संस्थानो जैसे स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी कार्यालयों का बहिष्कार करना शुरू कर दिया। इस आंदोलन को गांधी जी के द्वारा ही समाप्त कर दिया गया।

सविनय अवज्ञा आंदोलन..

सविनय अवज्ञा आंदोलन दांडी मार्च के साथ शुरू हुआ जिसका नेतृत्व गांधी जी ने 12 मार्च 1930 को गुजरात के साबरमती आश्रम से दांडी गांव तक किया था। सत्तारूढ़ औपनिवेशिक सरकार के खिलाफ सविनय अवज्ञा आंदोलन गांधी जी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था।

गांधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थागित करने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने 1930 में यंग इंडिया के अख़बार में देश को संबोधित करते हुए लॉर्ड इरविन सरकार से 11 मांगे की थी। लेकिन सरकार ने कोई उत्तर नहीं दिया। जिसके बाद इस आंदोलन ने तूल पकड़ लिया। दांडी पहुंचने के बाद, गांधी जी और उनके समर्थकों ने समुद्र के नमकीन पानी से नमक बनाकर नमक पर टैक्स लगाने वाले कानून का उल्लंघन किया था। अंग्रेज सरकार का कानून को तोड़ना देश में एक व्यापक घटना बन गई।

इसके बाद गांधी जी ने भारतीय महिलाओं से कताई शुरू करने को कहा साथ ही लोगों से अंग्रेजी सरकार के कार्यालयों और विदेशी सामान बेंचने वाली दुकानों के सामने विरोध-प्रदर्शन करने को कहा। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं ने भी भाग लिया। आखिरकार लॉर्ड इरविन ने 1931 में गांधी के साथ समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए।

भारत छोड़ो आंदोलन..

भारत छोड़ो आंदोलन गांधी जी के द्वारा 8 अगस्त 1942 को चलाया गया। इस आंदोलन का उद्देश्य भारत से ब्रिटिश साम्राज्य को समाप्त करना था। गांधी जी के अनुरोध करने की वजह से भारतीय कांग्रेस समिति ने भारत की ओर से बड़े पैमाने पर अंग्रेजों से भारत छोड़ने के तकाज़ा शुरू कर दिया। वहीं महात्मा गांधी ने भी करो या मरो का नारा दिया।

लेकिन अंग्रेज सरकार के अफसरो ने भारतीय कांग्रेस समिति के सभी सदस्यों को तत्काल गिरफ्तार किया। उन्होंने वगैर जांच के सभी सदस्यों को जेल में बंद कर दिया। लेकिन देशभर में अंग्रेजों को खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार जारी रहा।

लेकिन अंग्रेज भारत छोड़ो आंदोलन को रोकने में सफल तो रहे, मगर उन्हें इस बात का भी आभास हो गया था कि अब भारत में शासन नहीं किया जा सकता। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक, अंग्रेजों ने भारत को सभी अधिकारों को सौंपने के फैसला लिया।

अंग्रेज भले ही भारत छोड़ो आंदोलन को रोकने में किसी भी तरह से सफल रहे हों लेकिन जल्द ही उन्हें यह महसूस हो गया था कि भारत में शासन करने के उनके दिन समाप्त हो चुके हैं। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत तक, अंग्रेजों ने भारत को सभी अधिकार सौंपने के इशारा दिया। आखिरकार, गांधी जी को यह आंदोलन समाप्त करना पड़ा जिसके परिणामस्वरूप हजारों कैदियों की रिहाई हुई।

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