Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

Mahatma Gandhi Death Anniversary 2019: गांधी की हत्या के बाद मारे गए निर्दोष चितपावन ब्राह्मणों की कहानी

30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दिन देश भर में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। 30 जनवरी 1948 को हिंदू महासभा के कार्यकर्ता नाथूराम विनायक गोडसे ने बरेटा एम 1934 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल से गांधी की हत्या कर दी थी।

Mahatma Gandhi Death Anniversary 2019: गांधी की हत्या के बाद मारे गए निर्दोष चितपावन ब्राह्मणों की कहानी
Martyrs Day/ Mahatma Gandhi
30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस दिन देश भर में शहीद दिवस (Martyrs Day) के रूप में मनाया जाता है। 30 जनवरी 1948 को हिंदू महासभा के कार्यकर्ता नाथूराम विनायक गोडसे (Nathuram Godse) ने बरेटा एम 1934 सेमी-ऑटोमैटिक पिस्तौल से गांधी की हत्या कर दी थी। जिस समय गांधी की हत्या की गई उस समय वह दिल्ली के बिरला भवन में सर्वधर्म प्रार्थना में भाग लेने जा रहे थे। 30 जनवरी को गांधी जी की हत्या हुई लेकिन 31 जनवरी और 1 फरवरी के दिन दंगों से भरे हुए थे। महाराष्ट्र में ब्राह्मणों को निशाना बनाया गया था।
'वाजपेयी एक राजनेता के अज्ञात पहलू' में वाल्टर ऐंडरसन के मुताबिक गांधी जी की हत्या के बाद पूरे भारत में खास तौर से महाराष्ट्र में आरएसएस के स्वयंसेवकों की पिटाई शुरू हो गई। आरएसएस के गुरूजी महादेव सदाशिव गोलवलकर के घर पर भी हमला किया गया। लेकिन उन्हें पुलिस ने बचा लिया।
जाने माने लेखक डोनाल्ड बी. रोसेंथल ने अपनी किताब, कास्ट इन इंडियन पॉलीटिक्स में उस समय की स्थिति के बारे में लिखा है। उन्होंने लिखा की महाराष्ट्र में अलग-अलग जगहों पर ब्राह्मण विरोधी ध्रुवीकरण शुरू हुआ। पुणे में गोडसे के अखबार के कार्यालय हिंदू राष्ट्र और हिंदुत्ववादी अखबार के दफ्तरों में आग लगा दी।
गांधी की हत्या के बाद 17वीं सदी से चली आ रही पेशवाई पर मराठाओं ने गुस्सा निकाला। इस दंगे में कम से कम 50 लोगों की मौत हुई थी। गोडसे चितपावन कुल का ब्राह्मण था। दंगों में सबसे पहले चितपावनों को ही निशाना बनाया गया। लेकिन बाद में इन दंगों ने सीधे तौर पर ब्राह्मणों और मराठों के दंगों का रूप ले लिया।
महाराष्ट्र में ब्राह्मणों और मराठों का बैर सदियों पुराना है। महाराष्ट्र में ब्राह्मणों ने शिवाजी के राज्याभिषेक का इस आधार पर विरोध किया था कि वो क्षत्रिय नहीं हैं। लेकिन बाद में शिवाजी राज्याभिषेक कराने और स्वराज लाने में कामयाब रहे। शिवाजी की मृत्यु के बाद उनके वंशज राज संभालने में नाकामयाब रहे। अंत में उनकी सत्ता पेशवाओं के हाथ में चली गई।
जो शिवाजी के मंत्री थे। उन्होंने शिवाजी के साम्राज्य को दक्षिण के तंजौर से उत्तर भारत में ग्वालियर और झांसी तक फैलाया। इसके बाद ही महाराष्ट्र में ब्राह्मणों के वर्चस्व का युग शुरू हो गया। गांधी जी की मौत की सीआईडी रिपोर्टों में कहा गया था कि 8 दिसंबर 1947 को संघ के करीब 2500 स्वयंसेवकों ने दिल्ली में रोहतक रोड पर एक शिविर में मिले थे।
जहां गोलवलकर जी ने कहा था कि हमें गोरिल्ला युद्ध के लिए तैयार रहना होगा जैसा शिवाजी ने लड़ा था। संघ पाकिस्तान को मिटाए बिना चैन से नहीं बैठेगा। अगर हमारे रास्ते में कोई आएगा तो उसे भी मिटा दिया जाएगा। चाहे वह नेहरू सरकार हो या कोई अन्य सरकार। फिलहाल गांधी जी की हत्या के बाद नेहरू ने तत्काल आरएसएस पर प्रतिबंध लगा दिया।
लेकिन यह प्रतिबंध कई बार लगे हैं। फिर भी स्वयंसेवकों ने इसका किसी भी तरह से विरोध नहीं किया। गोडसे की गिरफ्तारी के बाद भी नाथूराम ने कहा कि वह गांधीवादियों से तर्क करना चाहते हैं। मैंने गांधी को व्यक्तिगत नहीं बल्कि राजनीतिक कारण से मारा है।
गोडसे ने कहा था कि उसने एक इंसान की हत्या की है इसलिए उसे फांसी मिलनी चाहिए। इसी आधार पर गोडसे ने हाईकोर्ट में अपील नहीं की। गांधी जी की हत्या की साजिश रचने के मामले में नाथूराम गोडसे और सहयोगी नारायण आप्टे उर्फ नाना को अंबाला जेल में 15 नवंबर 1949 को फांसी दे दी गई।
Next Story
Top