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अब पत्रकारों पर हमला करने वालों की खैर नहीं

महाराष्ट्र सरकार ने इस कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ भी कड़े प्रावधान किए हैं।

अब पत्रकारों पर हमला करने वालों की खैर नहीं

महाराष्ट्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठते हुए शुक्रवार को विधानसभा में पत्रकारों की सुरक्षा का विधेयक पास कर दिया हैं। इस नए कानून के अनुसार अब राज्य में पत्रकार या मीडिया संस्थानों पर हमला करने वाले व्यक्ति को तीन साल की सजा का प्रावधान होगा। इसकी के साथ सम्बंधित व्यक्ति पर 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया जाएगा।

देवेंद्र फड़नवीस सरकार ने गुरुवार को पत्रकारों और मीडिया संस्थानों की सुरक्षा से सम्बंधित विधेयक पेश करने को मंजूरी दी थी। इसके बाद शुक्रवार को महाराष्ट्र के गृहराज्यमंत्री रंजीत पाटिल ने विधानसभा में यह विधेयक पेश किया। विधानसभा में यह विधेयक सर्वसम्मति से पास हो गया है।

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इस नए कानून के बाद अब पत्रकारों एवं मीडिया कार्यालयों के विरुद्ध हुई हिंसा को संज्ञेय, गैरजमानती एवं प्रथम श्रेणी मैजिस्ट्रेट द्वारा ही सुने जाने लायक अपराध माना जाएगा। इस श्रेणी के अपराधों की जांच डिप्टी एसपी या सहायक पुलिस आयुक्त से नीचे के अधिकारी नहीं कर सकेंगे।

साथ ही इस नए कानून के मुताबिक अब पत्रकारों या मीडिया कार्यालयों पर हमला करनेवाले को तीन साल की सजा या फिर 50,000 रुपए के जुर्माने की सजा या यह दोनों सजाएं एक साथ भी हो सकती हैं।

हालांकि महाराष्ट्र सरकार ने इस कानून का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ भी कड़े प्रावधान किए हैं। विधेयक में बताया गया हैं कि अगर कोई पत्रकार या मीडिया संसथान अपने ऊपर हमले की कोई झूठी शिकायत करता है तो उसे भी कड़ी सजा मिलेगी।

आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में महाराष्ट्र में पत्रकारों पर लगभग 337 हमले हो चुके हैं और मीडिया के ऑफिस पर भी हमले होते रहे हैं। पत्रकार सुरक्षा की मांग संप्रग सरकार के समय से ही करते आ रहे थे।

जानकारी के मुताबिक महाराष्ट्र के पत्रकार संगठन और मीडिया संसथान लंबे समय सुरक्षा कानून की मांग करते आ रहे थे। इसलिए सरकार के इस कदम का सभी ने स्वागत किया है।

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