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महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने 200 साल पहले किया था ''बालाकोट'' में जिहादियों का खात्मा

भारतीय वायुसेना (IAF) ने मंगलवार को सुबह-सुबह पाकिस्तान में एयर स्ट्राइ की। कार्रवाई के बाद बालाकोट सुर्खियों में है। सर्जिकल स्ट्राइक 2 में भारतीय वायुसेना ने POK के बालाकोट में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में 300 आतंकी मारे गए। लेकिन यह पहली बार नही है जब बालाकोट आतंकियों से परेशान रहा है। बल्कि आज से करीब 200 साल पहले महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने बालाकोट में जिहादियों का खात्मा किया था।

महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने 200 साल पहले किया था
भारतीय वायुसेना (IAF) ने मंगलवार को सुबह-सुबह पाकिस्तान में एयर स्ट्राइ की। कार्रवाई के बाद बालाकोट सुर्खियों में है। सर्जिकल स्ट्राइक 2 में भारतीय वायुसेना ने POK के बालाकोट में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में 300 आतंकी मारे गए। लेकिन यह पहली बार नही है जब बालाकोट आतंकियों से परेशान रहा है। बल्कि आज से करीब 200 साल पहले महाराजा रणजीत सिंह की फौज ने बालाकोट में जिहादियों का खात्मा किया था।
कथित तौर पर दक्षिण एशिया में जिहादियों का पहला अड्डा बालाकोट रहा है। यहीं पर महाराजा रणजीत सिंह ने अपनी फौज के साथ 1831 में सैयद अहमद शाह बरेलवी को मौत के घाट उतार दिया था। इसी के बाद उन्होंने पेशावर पर कब्जा किया था।
उस समय शाह ने खुद को इमाम घोषित कर पहली बार वर्तमान समझ के मुताबिक 'जिहाद' की शुरुआत की थी। शाह और उसके कथित जिहादी बालाकोट में 1824 से 1831 तक सक्रिय थे। पाकिस्तानी लेखिका आयशा जलाल ने अपनी किताब 'पार्टिजंस ऑफ अल्लाह' में किया है।
सैयद अहमद शाह बरेलवी का सपना भारतीय उपमाद्वीप में इस्लामिक राज्य स्थापित करना था। इसी उद्देश्य को लेकर उसने हजारों जिहादियों को महाराजा रणजीत सिंह की फौज के खिलाफ इकट्ठा करना था। उसने खुद को इमाम घोषित कर रखा था।
शाह ने महाराजा रणजीत सिंह को परेशान कर रखा था। इसी कारण महाराजा के बेटे शेर की अगुआई में शाह को ढेर कर दिया गया। शाह के मरने के बाद महाराजा रणजीत सिंह ने पेशावर को अपने राज्य में जोड़ लिया।

अंग्रेजों ने तब निभाई थी पाकिस्तान की भूमिका

जैसे आज पाकिस्तान जिहादियों को भारत के खिलाफ शह दे रहा है, वैसे ही अंग्रेजों ने सैयद अहमद शाह को महाराजा रणजीत सिंह के खिलाफ शह दी थी। अंग्रेजों का मानना था कि वहाबी शाह और उसके साथी सिख राज को कमजोर करके उन्हें फायदा पहुंचाएगा। इसी लिए उसे जिहादी गतिविधि चलाने की पूरी छूट मिल गई।

जिहादियों का गढ़ यानी 'बालाकोट'

सैयद अहमद शाह और उसके साथियों की कब्र आज भी बालाकोट में मौजूद हैं। वहां इन्हें बहुत पवित्र माना जाता है। वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया। तो आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने अपना ठिकाना वहां से हटा लिया।
बालाकोट की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को देखते हुए ही शायद जैश ने आतंकवादियों को प्रशिक्षण देने के लिए यहां अपना प्रशिक्षण केंद्र बना लिया। यह केंद्र आम लोगों की पहुंच से दूर एक पहाड़ी पर बनाया गया।
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