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MP Assembly Election/ इन विधानसभा सीटों पर है कांटे की टक्कर, सबकी टिकी है निगाह

एस्ट्रोसिटी एक्ट के बाद हॉट संभाग के रुप में सामने आए ग्वालियर-चंबल संभाग में भाजपा-कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई। दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार एन केन प्रकारेण अपनी-अपनी सीट को जीतना चाहते है।हालांकि संभाग में कई हिस्सों में तीसरे मोर्चे का बोलबाला है। दिलचस्प बात यह है कि संभाग में 31 सीटें है, लेकिन संभाग सहित प्रदेशवासियों की आंखे कुछ खास सीटों पर टिकी हुई है।

MP Assembly Election/ इन विधानसभा सीटों पर है कांटे की टक्कर, सबकी टिकी है निगाह
एस्ट्रोसिटी एक्ट के बाद हॉट संभाग के रुप में सामने आए ग्वालियर-चंबल संभाग में भाजपा-कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई। दोनों ही पार्टियों के उम्मीदवार एन केन प्रकारेण अपनी-अपनी सीट को जीतना चाहते है।हालांकि संभाग में कई हिस्सों में तीसरे मोर्चे का बोलबाला है। इसके साथ ही क्षेत्र में एस्ट्रोसिटी एक्ट का मुद्दा भी हावी है। जिसके चलते प्रत्याशियों को उलटे पांव वापस लौटना पड़ रहा है। दिलचस्प बात यह है कि संभाग में 31 सीटें है, लेकिन संभाग सहित प्रदेशवासियों की आंखे कुछ खास सीटों पर टिकी हुई है।

बिग फाइट: ग्वालियर दक्षिण विधानसभा

प्रत्याशी

भाजपा: नारायण सिंह कुशवाह

कांग्रेस: प्रवीण पाठक
अन्य : समीक्षा गुप्ता
इस बार भाजपा का ग्वालियर की दक्षिण विधानसभा पर काफी फोकस है। क्योंकि यहां भाजपा वर्सेस बागी में जंग है। मतलब भाजपा से बागी हुई समीक्षा गुप्ता और अधिकृत प्रत्याशी नारायण सिंह कुशवाह। इस बात का फायदा उठाते हुए कांग्रेस ने प्रवीण पाठक को मैदान में उतारकर पूरी ताकत झोंक दी है। हालांकि क्षेत्र में कुशवाहा समाज का बोलबाला है। यही कारण है कि भाजपा के कुशवाहा तीन बार से यहां के विधायक हैं। 2013 में उन्होंने कांग्रेस के रमेश अग्रवाल को 16 हजार वोटो से हराया था। यहां कुल 254228 मतदाता हैं।

मुद्दा

भाजपा:

- विधानसभा क्षेत्र में कराए गए विकास कार्य
- सामाजिक, धार्मिक कार्यक्रमों में दिलचस्पी
- केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ
- क्षेत्र में कुशवाहा समाज पर भरोसा

कांग्रेस व निर्दलीय

- पूर्व महापौर का टिकट नहीं देने से कार्यकर्ता नाराज

- अकेले निर्दलीय चुनाव मैदान में खड़े होने से सहानभूति

- 15 साल में विकासकार्याें पर अमल नहीं होना
- बेरोजगारी खत्म करने का वादा
यूं तो चुनावी समर में कई बार मित्रता और दूर के रिश्ते टकराते हैं। कुछ ऐसा ही हाल ग्वालियर की दक्षिण विधानसभा का है। क्योंकि, चुनाव मैदान में देवरानी-जेठानी के रिश्ते ही कसौटी पर हैं। भाजपा से बागी हुई पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता निर्दलीय मैदान में उतरी हैं।
तो वहीं उनकी देवरानी खुशबू गुप्ता जो कि भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष है। वे भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी नारायण सिंह के प्रचार में पार्टी का झंडा थामकर चल रही है। चूंकि अब से पहले गुप्ता भाजपा में थी, इस कारण रिश्तों के बीच टकराहट की स्थिति नहीं बनी।
लेकिन अब प्रचार-प्रसार की रणनीतियां एक छत के अलग-अलग बंद कमरों में होती दिखाई पड़ रही है। इसका फायदा कांग्रेस प्रत्याशी प्रवीण पाठक जमकर उठाते नजर आ रहे है।

बिग फाइट: भिंड विधानसभा

प्रत्याशी

भाजपा: चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी
कांग्रेस: डॉ रमेश दुबे
सपा : नरेंद्र सिंह कुशवाह
प्रदेश में जब भी ग्वालियर चंबल संभाग का नाम लिया जाता है तो उसके साथ भिंड के हाल-चाल को भी पूंछ लिए जाते है। क्षेत्र में राजनीति के अलावा बहुत सी ऐसी घटनाएं होती है। जो हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है। हालांकि वर्तमान में नरेंद्र सिह कुशवाह विधायक है। लेकिन उन्हें भाजपा ने इस बार टिकट नहीं दिया तो वे भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी से मैदान में उतरे है। भाजपा ने पूर्व विधायक चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी और कांग्रेस ने डॉ रमेश दुबे को मैदान में उतारा है।

मुद्दा

भाजपा
- आरोप: सपा प्रत्याशी के प्रशासनिक कार्यालयों मे फैलाया भ्रष्टाचार
- केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ
- प्रदेश सराकर द्वारा कराए गए कार्याें पर सहानभूति
कांग्रेस व अन्य
- सरकार के खिलाफ फैली एंटी इंकंबेंसी
- बेरोजगारी, पिछड़ापन भी एक मुद्दा
- किसानों की कर्जमाफी और अन्य घोषणाओं का सहारा
- ठाकुर और पिछड़े मतदाताओं को लामंबद करने की कोशिश
भिंड सीट के साथ एक मिथक भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि इस सीट से कोई भी पार्टी लगातार जीत हासिल नहीं कर सकती है। इसका उदाहारण 2003 से सामने भी है। बताया जा रहा है कि क्षेत्र में सरकार के प्रति एंटी इंकंबेंसी भी है। जातीय समीकरणों की बात करें तो यहां ठाकुर (कुशवाह), ओबीसी, ब्राह्मण मतदाता निर्णायक स्थिति में हैं। इसके अलावा मुस्लिम समाज का अच्छा खासा प्रभाव है।

विग फाइट: ग्वालियर विधानसभा

प्रत्याशी

भाजपा : जयभान सिंह पवैया
कांग्रेस : प्रद्युमन्न सिंह
ग्वालियर किले से सटी इस विधानसभा से वर्तमान में जयभान सिंह पवैया विधायक है। इनके खिलाफ कांग्रेस के प्रद्युमन्न सिंह मैदान में है। इसके पहले 2013 में भी कांग्रेस ने सिंह को मैदान में उतारा था। तब उन्हें पवैया ने 15,561 वोट से हरा दिया था। किंतु इस बार समीकरण बिगड़े हुए है। कांग्रेस के सिंह ऐन केन प्रकारेण मंत्री पवैया पर हमला बोल रहे है। खास बात यह हैै तीन चुनावों से दोनों प्रत्याशी एक-दूसरे के खिलाफ मैदान में है। इसमें से एक बार कांग्रेस प्रत्याशी सिंह ने पवैया को हराया बाकि दो चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लेकिन इस बार भाजपा के लिए राह आसान नहीं है। मुद्दों के अलावा क्षेत्र मे एससी-एसटी एक्ट का विरोध भी हावी है।
मुद्दे: कांग्रेस
- सड़क की समस्या, कोटेश्वर से घासमंडी तक की कई सड़के खराब
- बदबूदार पानी को लेकर आवाज उठा रहे सिंह
- मंत्री को बताया क्षेत्र की अपराधिक गतिविधियों का जिम्मेदार
- कांग्रेस प्रत्याशी ने घमंड और अहंकार भी बनाया एक मुद्दा

भाजपा
- भाजपा प्रत्याशी अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगा रहे
- क्षेत्र में गिना रहे अपने कार्यकाल के काम
- क्षेत्र में सबसे बड़ा मुद्दा सड़क का है
- 1100 करोड़ की स्मार्ट सिटी लाने का क्रेडिट ले रहे पवैया
ग्वालियर विधानसभा में भाजपा-कांग्रेस के साथ वसपा का भी होल्ड है। पिछले चुनाव में बसपा की रेखा चंदन को करीब 14 हजार वोट मिले थे। इस बार भी वसपा ने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा है। इस वजह से भाजपा प्रत्याशी को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि भाजपा से बागी हुई पूर्व महापौर समीक्षा गुप्ता का सार्वजनिक विरोध ग्वालियर में भाजपा के पसीने छूटा रहा है।

बिग फाइट- भितरवार

प्रत्याशी
भाजपा- अनूप मिश्रा
कांग्रेस- लाखन सिंह यादव
ग्वालियर-चंबल संभाग की भितरवार सीट पर भाजपा ने सांसद और पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा को एक बार फिर किस्मत आजमाने का मौका दिया है। उनकी टक्कर तीन बार के विधायक लाखन सिंह यादव से है। यादव एक बार बसपा और दो बार कांग्रेस से चुनाव जीते। पिछले चुनाव में उन्होंने अनूप मिश्रा को 6500 वोटों से हराया था। लेकिन इस बार माहौल बदला-बदला नजर आ रहा है। क्योंकि भाजपा प्रत्याशी अनूप मिश्रा लोगों के पास जाते है तो सबसे पहले मांफी मांगते है और कहते है कि लोकसभा के चलते पांच साल क्षेत्र में नहीं आ पाया। किंतु अब आपके साथ रहुंगा और कार्य करुंगा।
मुद्दा:
भाजपा
- भाजपा प्रत्याशी का कहना पिछड़ेपन का जिम्मेदार कांग्रेस
- क्षेत्र में पानी की समस्या
- युवाओं की बेरोजगारी भी बड़ा मुद्दा
- वोट ध्रुवीकरण भी एक मुद्दा
कांग्रेस
- भाजपा प्रत्याशी को एस्ट्रोसिटी में घेर रहे कांग्रेस उम्मीदवार
- मुद्दा यह भी, सरकार में नहीं होने के बाद करवाए विकासकार्य
- स्कूल और अन्य कार्याें को गिना रहे कांग्रेस प्रत्याशी
भितरवार विधानसभा सीट जातिगत समीकरणों का उदाहारण पेश करती है। इस सीट पर 22 हजार से अधिक वोट जाटव समाज के हैं। इसके साथ ही पिछड़ा वर्ग के वोटर करीब 1 लाख 10 हजार हैं। यहीं कारण है कि कांग्रेस यहां से लाखन को टिकट देती रही है। इसके साथ ही क्षेत्र में सवर्णाें का भी बोलबाला है। इस वजह से कई अन्य दलों के प्रत्याशी भी किस्मत आजमा रहे है।

बिग फाइट- लहार विधानसभा

प्रत्याशी
भाजपा- रसाल सिंह
कांग्रेस- गोविंद सिंह
कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली लहार विधानसभा में कांग्रेस ने एक बार फिर छह बार के विधायक डॉ गोविंद सिंह को उतारा है। सिंह 1990 से 2013 तक लगातार विधायक रहे है। इस दौरान उन्होंने कई प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त करा दी है। वर्ष 2003 और 2008 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सिंह के सामने भाजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त हो गई थी। इसके बाद 2013 के चुनाव में भाजपा ने पूर्व विधायक रसाल सिंह को मैदान में उतारा। वे जीत तो दर्ज नहीं कर पाए, लेकिन दूसरे स्थान पर रहे थे। अब भाजपा ने एक बार फिर रसाल सिंह किस्मत अजमाने का मौका दिया है।
मुद्दा
भाजपा
- क्षेत्र में फैली गुंडागर्दी बनी मुद्दा
- किसानी भी एक मुद्दा
- स्कूल, कॉलेज और सड़क भी मुद्दा
- बिजली की समस्या को लेकर घेर रहे भाजपा प्रत्याशी
कांग्रेस
- कांग्रेस प्रत्याशी का सरकार ने नहीं दिया बजट कई फाइलें पड़ी पेंडिंग
- सरकार में नहीं होने के बाद करवाए विकासकार्य, बनवाए स्कूल-कॉलेज
लहार विधानसभा त्रिकाणीय श्रंखला के रुप मे जानी जाति है। यहां चुनाव जातिगत समीकरण के आधार पर होता है। क्योंकि ठाकुर (भदौरिया), ओबीसी, ब्राह्मण मतदाता निर्णायक स्थिति के रुप में देखे जाते है। साथ ही जैन समाज और मुस्लिम समाज के मतदाताओं का भी काफी प्रभाव है। हांलाकि इस बार भाजपा के रसाल सिंह पूरा जोर लगा रहे है, लेकिन उन्हें कांग्रेस के सिंह से पहले अंदरुनी कहल को झेलना पड़ रहा है। इसके साथ ही वसपा प्रत्याशी भी रौंदने की तैयारी में लगे हुए है।

बिग फाइट- मुरैना विधानसभा

प्रत्याशी
भाजपा- रुस्तम सिंह
कांग्रेस- रघुराज कंसाना
बसपा - बलवीर दंडौतिया
आप - रामप्रकाश राजौरिया
भाजपा प्रत्याशी मंत्री रुस्तम सिंह की विधानसभा सीट एक बार फिर मोड़ ले गई है। यहां हाथी तो रौंदने की तैयारी कर ही रहा है, लेकिन कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी बदलाव के गीत गा रही है। इस बार इस सीट पर त्रिकोणीय मामला नजर आ रहा है। लेकिन ये कह नहीं सकते कि सीट की कमान किसकी झोली में आती है। इसके साथ ही एस्ट्रोसिटी एक्ट का विरोध भी सबसे अधिक इसी क्षेत्र में फैला हुआ है।

मुद्दा:
भाजपा
- क्षेत्र के विकासकार्याें को गिना रहे भाजपा प्रत्याशी
- सौंद्रीर्यकरण और बाजार शिफ्टिंग का हवाला
- केंद्र सरकार की योजनाओं का लाभ
बसपा, कांग्रेस और आप के मुद्दें
- अतिक्रमण और सकरा बाजार मुद्दा
- क्षेत्र मे फैली गुंडागर्दी को मु्द्दा बना रही कांग्रेस
- हाथ ठेलों के लिए हॉकर्स जोेन भी एक मुद्दा
- ट्रैफिक की समस्या
- पानी-सफाई भी एक समस्या
तीसरे दल बिगाड़ रहे गणित
मुरैना विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा उठापटक है। भाजपा प्रत्याशी रुस्तम सिंह को वर्ष 2008 के चुनावी टक्कर देने वाले रामप्रकाश राजौरिया अबकी बार आप से मैदान में है। जो काफी टक्टर दे रहे है। जबकि भाजपा प्रत्याशी सिंह को एससी-एसटी एक्ट की तरह विरोध का सामना करना पड़ रहा है। इधर वसपा के दंडौतिया भी रौंदने की तैयारी कर रहे है। इस सीट पर बसपा का अच्छा खासा होल्ड माना जाता है।
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