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मशहूर बाघिन ''मछली'' ने तोड़ा दम

11 बच्चों की मां मछली को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिल चुका है

मशहूर बाघिन
नई दिल्ली. रणथंभौर क्वीन बाघिन 'मछली' की मौत हो गई है। उसका जन्म 1997 में हुआ था। उसे मछली नाम दिए जाने के पीछे भी एक रोचक कहानी है। उसकी मां के चेहरे पर मछली के आकार का एक चिह्न था, इसलिए बाघिन को मछली नाम दिया गया।
अपने शांत स्वभाव और कैमरे के प्रति विशेष लगाव के कारण मछली रणथंबौर नेशनल पार्क का वर्षों से प्रमुख आकर्षण का केंद्र रही है। यहां तक कि उसके नाम का फ़ेसबुक पेज भी रहा है। उसने 11 बाघों को जन्म दिया, जिनमें सात मादा और चार नर थे। इससे मछली के कुनबे में बढ़ोतरी हुई। पार्क में बाघों की संख्या के 60 फीसदी हिस्से का संबंध उसके वंश से ही था।
मछली अपने शिकार के तरीकों, ताकत और कौशल से भी जानी जाती है। एक बार उसने 10 फीट लंबे मगरमच्छ का शिकार किया था। दरअसल, मगरमच्छ ने बाघिन के बच्चे पर हमला कर दिया था। दोनों के बीच जबर्दस्त टक्कर हुई और उसमें मछली को अपने कुछ दांत भी गंवाने पड़े। आखिरकार बाघिन ने इस विशाल मगरमच्छ को मौत के घाट उतार दिया। मछली अपने बच्चों को बड़े और खतरनाक जानवरों से बचाने के लिए भी मशहूर थी।
11 बच्चों की मां मछली को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड मिल चुका है। इतना ही नहीं सरकार ने इस बाघिन पर एक डाक टिकट भी जारी किया है। ट्रैवल टूर ऑपरेटरों के अनुसार, यह हर साल करीब 65 करोड़ रुपये का बिजनेस देती है। बता दें कि दुनिया में सबसे ज्यादा फोटो मछली के खींचे गए हैं।
बता दें कि एक रॉयल बंगाल टाइगर की उम्र 10 से 15 साल होती है। ऐसे में 20 साल की मछली वन विभाग की दया पर जी रही थी। चार में से दो शिकारी दांत पांच साल पहले ही टूट चुके थे, बचे हुए दो भी दो साल पहले गिर गए। वन विभाग उसे शिकार के रूप में बंधे हुए जानवर दे रहा था। जबकि कानूनन इस पर पाबंदी है, लेकिन मछली को जिंदा रखने के लिए यह जरूरी था। मछली की देखभाल के लिए एक गार्ड हमेशा मौजूद रहता था।
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