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मरने से पहले करुणानिधि ने ऐसे किया था विरासत का बंटवारा, इस शख्श को बनाया वारिस

तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे डीएमके चीफ करुणानिधि ने अपनी मौत को भांप लिया था। तभी तो दो साल पहले ही पार्टी की कमान सौतेले बेटे को सौंप दी थी।

मरने से पहले करुणानिधि ने ऐसे किया था विरासत का बंटवारा, इस शख्श को बनाया वारिस

तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री रहे डीएमके चीफ करुणानिधि ने अपनी मौत को पहले ही भांप लिया था। इसलिए उन्होंने मरने से पहले ही अपनी राजनीतिक विरासत की कमान अपने सौतेले बेटे स्टालिन को सौंप दी थी।

जबकि डीएमके पार्टी में करुणानिधि के दो बेटे और एक बेटी दिग्गज नेता के रूप में पहचान बना चुके हैं। इस बंटवारे को लेकर काफी संघर्ष हुआ था लेकिन काफी सोच विचार के बाद करुणानिधि ने स्टालिन के हाथों पार्टी की कमान सौंतले को थमा दी।

स्टालिन, करुणानिधि के सौतेले बेटे हैं जो कि डीएमके दिग्गज नेता हैं और ऐसा कहा जाता है कि करुणानिधि की तरह स्टालिन भी लोकप्रिय नेता हैं। तो वहीं करुणानिधि के एक और बेटे एमके अझागिरी एवं बेटी कनिमोझी भी दिग्गज नेताओं में शामिल हैं।

लेकिन दो साल पहले ही करुणानिधि ने स्टालिन की लोकप्रियता और पार्टी में पकड़ को देखकर कमान दे दी थी। अधिकारिक तौर पर अक्टूबर 2016 में स्टालिन को अपना वारिस घोषित करते हुए स्पष्ट किया था।

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पार्टी कमान देने के बाद करुणानिधि के बेटे अझागिरी ने विवादित बयान दिया था और मार्च, 2010 में करुणानिधि के बेटे और तत्कालीन केंद्रीय मंत्री अझागिरी ने कहा था कि वह किसी को करुणानिधि के बाद पार्टी के नेता के रूप में स्वीकार नहीं करेंगे। लेकिन बाद में वे शांत हो गए।

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अझागिरी की पार्टी के शीर्ष स्तर से दूरी तब और बढ़ गई जब राज्यसभा सांसद और करुणानिधि की बेटी कनिमोझी ने मई, 2016 में भी स्वीकार किया कि उनके पिता करुणानिधि के बाद सौतेले भाई स्टालिन ही पार्टी संभालेंगे।

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