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महिला के झूठे आरोप में 20 साल तक काटी जेल, अब रिहा

मामले के एक आरोपी हरि शंकर चौरसिया की मौत हो चुकी है।

महिला के झूठे आरोप में 20 साल तक काटी जेल, अब रिहा
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इलाहबाद. कोर्ट ने सबूतों के अभाव और आरोप लगाने वाली महिला के बयानों में सच्चाई न देखते हुए सामूहिक बलात्कार के 2 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। लेकिन बरी होने से पहले दोनों आरोपियों को बिना कोई अपराध किए ही 20 साल सश्रम कारावास की सजा भुगतनी पड़ी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ बेंच ने दोनों को बरी करने का आदेश देते हुए कहा कि जांच के दौरान इस बात के पर्याप्त सबूत नहीं मिले कि महिला के साथ बलात्कार हुआ।
सबूतों के आभाव और आरोप साबित न हो पाने के कारण सामूहिक दुष्कर्म के 2 आरोपियों को अदालत ने 20 साल की सजा काटने के बाद बाइज्जत बरी कर दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोप लगाने वाली महिला ने जो बयान दिया वह भी 'अविश्वसनीय और विरोधात्मक' है। इस मामले में बस यही बात चौंकाने वाली नहीं है। हैरान करने वाली बात यह भी है कि निचली अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी मानकर 5 साल तीन महीने की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ अपील करने और अपील का नंबर इतनी देर से आने के कारण दोनों निर्दोषों को 20 साल जेल में गुजारने पड़े।
गैंगरेप का था झूठा आरोप-
ट्रायल कोर्ट ने 23 अगस्त 1996 को दिए गए अपने फैसले में आरोपियों को गैंगरेप का दोषी माना था। दोनों ने इस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की। उनकी अपील पिछले 20 साल से लंबित थी। इस अपील पर अब फैसला सुनाते हुए जज रंजना पांड्या ने कहा कि महिला द्वारा दिए गए बयान और उसके द्वारा सुनाई गई वारदात की कहानी, दोनों में ही विरोधाभास भरे हुए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि महिला का बयान अविश्वसनीय है और इसपर भरोसा नहीं किया जा सकता।
केस का नंबर आते-आते लग गए 20 साल-
इस मामले की FIR दर्ज करवाने वाले लल्लू नाम के शख्स ने भी अदालत के सामने अपना बयान बदल दिया था। बाराबंकी के अतिरिक्त सेशन जज ने 1996 में फैसला सुनाते हुए तीनों आरोपियों को दोषी माना था और उन्हें 5 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। साथ ही, तीनों पर एक-एक हजार का जुर्माना भी लगाया।
एक आरोपी की हो गई मौत-
इसके अलावा, IPC की धारा 342 के अंतर्गत तीनों आरोपियों को अतिरिक्त 3 महीने जेल की सजा भी दी गई। इस फैसले को चुनौती देते हुए तीनों ने हाई कोर्ट में अपील की। अपील पर सुनवाई का नंबर आते-आते 20 साल बीत गए और इस बीच मामले के एक आरोपी हरि शंकर चौरसिया की मौत भी हो गई।
नहीं साबित हो पाए आरोप-
पीड़िता ने पुलिस को बताया था कि तीनों आरोपियों ने उसके साथ मारपीट और बलात्कार किया, जिसमें उसे चोट आई। घटना के अगले दिन जब पीड़िता का मेडिकल हुआ, तो उसके किसी बाहरी या आंतरिक अंग पर चोट नहीं पाई गई। तीनों आरोपियों ने अलग-अलग कारणों से झूठे आरोप में फंसाने की बात कही थी।
साभार- TOI
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