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आतंक से ज्यादा प्यार ले रहा है लोगों की जान

प्यार की वजह से 38,585 हत्याएं और गैर इरादतन हत्या हुई हैं।

आतंक से ज्यादा प्यार ले रहा है लोगों की जान

आतंक की ख़बरें भले ही ज्यादा होती हों लेकिन पिछले 15 सालों में आतंक से ज्यादा प्यार की वजह से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।

2001 से 2015 के बीच इस बात के प्रमाणिक सबूत हैं कि प्यार की वजह से 38,585 हत्याएं और गैर इरादतन हत्या हुई हैं। सरकारी रिकार्ड्स इसे आत्महत्या के 79,189 मामलों से भी जोड़ते हैं। इसके अलावा महिलाओं के अपहरण के 2.6 लाख मामले भी सामने आए हैं।

रिटायर्ड प्रोफेसर उमा चक्रवर्ती का कहना है, 'इस हिंसा को इस तरह समझा जा सकता है कि जब शादी की बात आती है, तो किसी व्यक्ति की पसंद को दबाना पितृसत्ता और जाति व्यवस्था को समझना होता है।'

वो बताती हैं कि जाति संसाधनों को नियंत्रित करने का एक तरीका है और केवल विवाहों पर सख्त नियंत्रण से बच सकता है। दोनों पितृसत्ता और जाति हिंसा की वजह से हैं और यह बताता है कि जो लोग भी उनकी सत्ता को चुनौती देंगे वो हिंसा के शिकार बनेंगे।

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