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भगवान ''विष्णु'' ने ''डार्विन'' की तुलना मे विकासवाद का बेहतर सिद्धांत दिया: आंध्र VC

आंध्रप्रदेश के कुलपति जी नागेश्वर राव ने दावा किया कि हिंदु शास्त्रों में भगवान विष्णु के जिस दशावतार का वर्णन है वह 17वीं सदी में अंग्रेज वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत से ज्यादा विकसित है।

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आंध्र यूनिवर्सिटी के कुलपति जी नागेश्वर राव ने दावा किया कि हिंदु शास्त्रों में भगवान विष्णु के जिस दशावतार का वर्णन है वह 17वीं सदी में अंग्रेज वैज्ञानिक चार्ल्स डार्विन के विकासवाद के सिद्धांत से ज्यादा विकसित है।

राव ने 106वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस में यहां प्रस्तुति देने के दौरान कहा कि डार्विन के सिद्धांत में जहां विकासवाद का सिद्धांत जलीय जीव से व्यक्ति तक बताया गया है वहीं दशावतार में एक कदम आगे राम से राजनीतिक रंग वाले कृष्ण तक के विकासवाद का जिक्र है।

उन्होंने कहा कि दशावतार 'मत्स्य अवतार' से शुरू होता है जो जलीय प्राणी है। इसके बाद 'कूर्म अवतार' की बात है जो उभयचर प्राणी है, वह जल एवं थल दोनों जगह रहता है। तीसरा अवतार 'वराह अवतार' है जिसमें विष्णु धरती को बचाने के लिए सूअर बन जाते हैं।

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चौथा अवतार 'नरसिंह' है जो आधा शेर और आधा मनुष्य है। पांचवां अवतार 'वामन' अवतार है जो कम परिपक्वता वाला पूरी तरह मुनष्य अवतार है।

उन्होंने कहा कि अंतत: राम अवतार है जो पूरी तरह मनुष्य हैं और फिर कृष्ण अवतार जो काफी जानकार, तार्किक हैं... वह नेता हैं। हमारा मानना है कि कृष्ण राजनीतिक हैं लेकिन राम नेता नहीं हैं। यह चलता रहता है (विकासवाद)।

उन्होंने कहा कि पश्चिमी विचार मनुष्य के विकासवाद के बारे में बात करता है, लेकिन हमारे विज्ञान में मनुष्य का जलीय प्राणी होने से आगे की बात है। 'वामन अवतार' तक हम मनुष्य बन गए लेकिन उसके आगे हम परिपक्व हुए और सोच अधिक उन्नत हुई।

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उन्होंने कहा कि हमारे साधु-संत उससे आगे की सोचते हैं। इसलिए उन्होंने दशावतार का प्रस्ताव दिया जो चार्ल्स डार्विन द्वारा प्रस्तावित विकास के सिद्धांत से बेहतर सिद्धांत है।

प्रस्तुति के दौरान उन्होंने यह भी दावा किया कि कौरवों का जन्म स्टेम सेल और टेस्ट ट्यूब तकनीक से हुआ और भारत को इस बारे में जानकारी होने के साथ ही हजारों वर्ष पहले गाइडेड मिसाइल के बारे में भी जानकारी थी।

राव ने प्रस्तुति के दौरान बताया कि 'अस्त्र' और 'शस्त्र' का इस्तेमाल राम ने किया जबकि विष्णु ने 'सुदर्शन चक्र' से अपने लक्ष्य को निशाना बनाया और लक्ष्य को निशाना बनाने के बाद ये हथियार वापस अपने धारक के पास लौट आते थे।

कुलपति ने कहा कि यह बताता है कि गाइडेड मिसाइल का विज्ञान भारत के लिए नया नहीं है अैर हजारों वर्ष पहले यह मौजूद था। राव ने यह भी कहा कि रामायण में बताया गया है कि रावण के पास न केवल 'पुष्पक विमान' था बल्कि उसके पास विभिन्न आकार और क्षमता वाले 24 तरह के विमान थे।

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