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अन्नाद्रमुक और टीआरएस का लोकसभा में हंगामा, नहीं चला प्रश्नकाल

पिछले 11 दिनो से लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के चलते कोई भी कार्रवाही नहीं हो सकी है। कल भी यानि सोमवार को टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं के द्वारा सदन में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखने के चलते सदन की कार्रवाई को स्थगित करना पड़ा था।

अन्नाद्रमुक और टीआरएस का लोकसभा में हंगामा, नहीं चला प्रश्नकाल
तेलंगाना में आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) और कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर अन्नाद्रमुक के भारी हंगामे के कारण आज लोकसभा की कार्यवाही आरंभ होने के साथ ही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। 12 बजे सदन की कार्यवाही दुबारा चली लेकिन हंगामे के कारण सदन को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
बता दे कि पिछले 11 दिनो से लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के चलते कोई भी कार्रवाही नहीं हो सकी है। कल भी यानि सोमवार को टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के नेताओं के द्वारा सदन में केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रखने के चलते सदन की कार्रवाई को स्थगित करना पड़ा था।
जिसके चलते टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस का सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं रखा जा सका। वहीं दूसरी तरफ केंद्र गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने हंगामे के चलते सदन की कार्रवाई के स्थगित होने पर कहा था कि सरकार अविश्वास प्रस्ताव और अन्य मसलो पर चर्चा के लिए तैयार है। राजनाथ सिंह ने सभी दलो से इस मसले पर सहयोग करने की अपील की है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि हम नियमों के तहत चर्चा कराने के लिए तैयार है। क्योंकि संसद किसी भी विषय पर चर्चा के लिए ही बनी है। राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि यह बहुत ही दुखद है कि पिछले 11 दिनो से संसद में कोई भी काम नहीं हो पाया है। राजनाथ के इलावा संसदीय मामलों के मंत्री अनंत कुमार ने कहा कि हम अविश्वास प्रस्ताव का सामना करने के लिए तैयार है।
वहीं दूसरी तरफ लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने यह कहकर सदन की कार्रवाई इसलिए स्थगित कर दी थी क्योंकि हंगामे के चलते सरकार के खिलाफ प्रस्ताव रखने वाले सांसदो की गिनती कर पाना मुश्किल हो गया था।
आपको बता दे कि पिछले चार सालो के शासन में पहली बार विपक्षी दल केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग कर रहे है। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव रखने जाने की सूरत में भी सरकार को कोई खतरा नहीं है।
क्योंकि इस समय लोकसभा में कुल 539 सदस्य है जिस कारण बहुमत के लिए जरूरी नंबर 270 है। बीजेपी के पास 274 सांसद है इसका मतलब ये है कि बीजेपी को सदन में बहुमत की स्थति में है ओर बीजेपी को इस पर चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
इसमें राजग के कुल 328 सांसद में से तेदपा के 16 सांसदों के अलग होने के बाद अब यह संख्या 312 रह गई है, जिनमें भाजपा के 274, शिवसेना के 18, लोजपा के 6, शिरोमणि अकाली दल के 4, आरएलएसपी के 3, जदयू व अपना दल के दो-दो, पीडीपी, एसडीएफ और स्वाभिमान पक्ष के एक-एक सदस्य शामिल हैं।
इसलिए तेदेपा के साथ वाईएसआर कांग्रेस के अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा भी होती है, तो इसके बावजूद मोदी सरकार के खिलाफ इस प्रस्ताव पारित होने की कोई संभावना नजर नहीं आ रही है।
टीडीपी और वाईएसआरसीपी दोनो ही पार्टिया केंद्र सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने को जरूरी 50 सांसदो के समर्थन हासिल करने में लगे हुए है। आपको बता दे कि चंद्र बाबू नायडू के सांसद पहले ही केंद्र सरकार के मंत्री पर से इस्तीफा दे चुके है।
वहीं सरकार की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने साफ कर दिया है कि पार्टी इस मसले पर ना तो सरकार के साथ है और ना ही सरकार के खिलाफ इसलिए शिवसेना सदन में अविश्वास प्रस्ताव रखने जाने की स्थति में वोटिंग नहीं करेगी।
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