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फिल्मों से ज्यादा राजनीति में चमक रहे ये बॉलीवुड सितारे, कभी मोदी-मोदी जपते थे आज हैं एकदम खिलाफ

राजनीति और फिल्मों का आपसी सम्बंध हमेशा से रहा है। रील लाइफ से रियल लाइफ में हीरो बनने बहुत सारे बॉलीवुड स्टार आए। राजेश खन्ना, सुनील दत्त और अमिताभ बच्चन कुछ ऐसे नाम हैं

फिल्मों से ज्यादा राजनीति में चमक रहे ये बॉलीवुड सितारे, कभी मोदी-मोदी जपते थे आज हैं एकदम खिलाफ

राजनीति और फिल्मों का आपसी सम्बंध हमेशा से रहा है। रील लाइफ से रियल लाइफ में हीरो बनने बहुत सारे बॉलीवुड स्टार आए। राजेश खन्ना, सुनील दत्त और अमिताभ बच्चन कुछ ऐसे नाम हैं जिन्होंने राजनीति में आने की नींव डाली। आज उन्हीं के नक्शेकदम पर चलते हुए बहुत लोग राजनीति में आए, कुछ ने बहुत नाम कमाया तो कुछ दबे पांव वापस फिल्मी दुनिया में चले गए। देश में इस समय लोकसभा चुनाव का प्रचार चल रहा है। हर पार्टी में सिनेमा जगत की हस्तियां मौजूद हैं। वो जहां भी प्रचार करने पहुंच रहे हैं लोग उन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में जुट रहे हैं। पार्टियों द्वारा फिल्मी सितारो को टीम का हिस्सा बनाने का एक कारण ये भी है कि लोग रैलियों में बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। आइये जानते हैं इन दिनों कौन-कौनसे फ़िल्मी सितारे राजनीति में अपनी किस्मत चमका रहे हैं...

1- हेमा मालिनी

हेमा मालिनी इस समय उत्तर प्रदेश की मथुरा सीट से सांसद हैं। भाजपा ने दोबारा विश्वास जताते हुए उन्हें प्रत्याशी बनाया है। हेमा मालिनी नें शुरुआती दिनों में पार्टी में प्रचारक के तौर पर सक्रिय थी। राजेश खन्ना के लिए उन्होंने प्रचार किया। राजनीतिक रुचि बढ़ी और फरवरी 2004 में भारतीय जनता पार्टी की आधिकारिक सदस्य बन गई। 2014 की मोदी लहर में उन्होंने मथुरा सीट से एकतरफा जीत दर्ज की। वह इस चुनाव को अपना आखिरी चुनाव बता रही हैं।

2-शत्रुघ्न सिन्हा

शत्रुघ्न सिन्हा इस समय अपने बगावती सुर के लिए बेहद चर्चा में हैं। कभी भाजपा के लिए जी जान लगाकर प्रचार करने वाले सिन्हा अब फिलहाल कांग्रेस से बाहर हैं। जिस पटना साहिब सीट से वह दो बार जीतकर संसद पहुंचे इस बार उस सीट से रविशंकर प्रसाद को टिकट दिया गया है। शत्रुघ्न सिन्हा ने फिल्मी जगत के सुपरस्टार राजेश खन्ना के सामने उप-चुनाव में उतरकर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। राजेश खन्ना के सामने तो वह हार गए पर इसके बाद जीतते चले गए। 2009 में पटनासाहिब सीट से शेखर सुमन को हराकर लोकसभा पहुंचे। दोबारा 2014 में भी इसी सीट से जीतकर संसद पहुंचे। शत्रुघ्न सिन्हा परिवार कल्याण और शिपिंग के केंद्रीय मंत्री भी रह चुके हैं।

3- मनोज तिवारी

भोजपुरी फिल्मो के सुपर स्टार मनोज तिवारी ने राजनीति में बड़े ही कम समय में खुद को स्थापित किया है। वह इस समय दिल्ली के भाजपा अध्यक्ष हैं। राजनीतिक शुरुआत उन्होंने समाजवादी पार्टी के साथ की। 2009 के चुनाव में वह एसपी के टिकट पर चुनाव लड़े और हार गए। 2014 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और उत्तरी दिल्ली से सांसद चुने गए।

4- राज बब्बर

राजबब्बर ने फिल्मो से ज्यादा नाम राजनीति में कमाया है। राजनीति की शुरुआत तो उन्होंने जनता दल से की पर सफलता उन्हें समाजवादी पार्टी का सदस्य बनने के बाद मिली। तीन बार लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। 2008 में पाला बदला और कांग्रेस में शामिल हो गए और 2009 के चुनाव में फिर जीत दर्ज की। 2014 की मोदी लहर ने उन्हें भी रोक दिया और हार झेलनी पड़ी। कांग्रेस की खोई विरासत को वापस लौटाने के लिए राज बब्बर को उत्तर प्रदेश का कांग्रेस प्रमुख बनाया गया।

5- स्मृति ईरानी

कभी सास बहु की नोक झोक वाले कार्यक्रम में बहु का किरदार निभाने वाली स्मृति जुबीन ईरानी अपनी मुखर आवाज के दम पर राजनीतिक गलियारे में अपने नाम को साबित करने में सफल रही हैं। 2004 में वह दिल्ली की चांदनी चौक सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा पर काग्रेंस के कपिल सिब्बल से वह हार गई। राजनीति में चुनौती देने के लिए मशहूर स्मृति ईरानी 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी की सीट से चुनौती दी, वह जरूर हार गई पर उनका नाम लोगो के दिमाग में बस गया। भाजपा आलाकमान ने उन्हें राज्यसभा सांसद बनाकर संसद पहुंची।

6- दिनेश कुमार यादव उर्फ निरहुआ

इस लोकसभा चुनाव के जरिए राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले भोजपुरी फिल्मों के गायक व ऐक्टर दिनेश लाल ने पहली बार में ही कठिन चुनौती स्वीकार की है। वह भाजपा के टिकट पर आजमगढ़ से यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के सामने हैं। सपा की विरासत वाली इस सीट से भाजपा के खेमे से सियासत शुरू करने वाले निरहुआ आगे चलकर कितना सफल हो पाते हैं ये भविष्य के गर्भ में छिपा है।

7- बाबुल सुप्रियो

बाबुल सुप्रियो पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं। दोबारा भी वह इसी सीट से मैदान में उतर रहे हैं। गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो बंगाल में भाजपा के सबसे बड़े चेहरो मे से एक मान जाते हैं। पिछले लोकसभा में बंगाल में मोदी लहर के बावजूद पार्टी ने उत्तरी राज्यों की तरह करिश्माई प्रदर्शन नहीं कर पायी थी इसबार बाबुल के कंधो पर जिम्मेदारी है कि पार्टी को बंगाल में ज्यादा सीटे दिलवाएं।
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