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लोकसभा चुनाव : वह काल, जब भारत के लाल और इंदिरा दोनों बने देश के प्रधानमंत्री

1962 में भारत में तीसरा लोकसभा चुनाव हुआ। कांग्रेस फिर सत्ता में आई। यह लगातार तीसरी बार था जब आम चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला था। जवाहरलाल नेहरू एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बने। चुनाव में कांग्रेस ने 494 सीटों में से 361 सीटें जीतीं।

लोकसभा चुनाव : वह काल, जब भारत के लाल और इंदिरा दोनों बने देश के प्रधानमंत्री
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1962 में भारत में तीसरा लोकसभा चुनाव हुआ। कांग्रेस फिर सत्ता में आई। यह लगातार तीसरी बार था जब आम चुनाव में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला था। जवाहरलाल नेहरू एक बार फिर देश के प्रधानमंत्री बने। चुनाव में कांग्रेस ने 494 सीटों में से 361 सीटें जीतीं।
तीसरे आम चुनाव में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के खाते में 29 सीटें आई थीं। इस बार पार्टी ने पहले और दूसरे आम चुनाव के मुकाबले ज्यादा सीटें जीती थीं। 1952 के पहले लोकसभा चुनाव में सीपीआई ने 16 सीटें और 1957 के दूसरे लोकसभा चुनाव में 27 सीटें जीती थीं।
इस बार 28 पार्टियां चुनावी मैदान में थीं। इस चुनाव में भारतीय जनसंघ ने 14 सीटें जीती थीं। स्वतंत्र पार्टी को भी 18 सीटें मिलीं थीं। तो वहीं द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) इस चुनाव में सात सीटें जीतने में कामयाब रही। निर्दलीय उम्मीदवारों ने चुनाव में 20 सीटें जीती थीं। कुल सीटों की 60 फीसदी से ज्यादा सीटें कांग्रेस के खाते में गईं थी।
वहीं मुस्लिम लीग, अकाली दल, अखिल भारतीय हिंदू महासभा और राम राज्य परिषद की करारी हार हुई। हालांकि इस चुनाव में भारतीय जनसंघ का प्रदर्शन थोड़ा बेहतर जरूर रहा। प्रजा सोशलिस्ट पार्टी भी 12 सीटें जीतने में कामयाब रही।
इस चुनाव में मतदाताओं की संख्या में बढ़ेतरी हुई। कुल 55.42 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाले। लोकसभा चुनाव के दो साल बाद 27 मई 1964 को देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का देहांत हो गया था।
उनकी जगह लाल बहादुर शास्त्री को प्रधानमंत्री बनाया गया। लेकिन 19 महीने बाद ही उनका भी देहांत हो गया। जिसके बाद गुलजारी लाल नंदा अंतरिम प्रधानमंत्री बनाए गए। 1966 में आखिर में इंदिरा गांधी देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं।

इंदिरा का उदयकाल

साल के पहले महीने का 19वां दिन भारत के राजनीतिक इतिहास में एक बड़ी जगह रखता है। 1966 में वह 19 जनवरी का ही दिन था, जब इंदिरा गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाया गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की मौत के बाद इंदिरा गांधी ने वह कुर्सी संभाली जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार उनके पिता जवाहर लाल नेहरू ने संभाली थी।
वह 1967 से 1977 और फिर 1980 से 1984 में उनकी मृत्यु तक इस पद पर रहीं। इंदिरा गांधी देश की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री रहीं। दृढ़ निश्चयी और अपने इरादों की पक्की इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी को उनके कुछ कठोर और विवादास्पद फैसलों के कारण याद किया जाता है।
1975 में आपातकाल की घोषणा और 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में सेना भेजने के फैसले उनके जीवन पर भारी पड़े। आपातकाल के बाद जहां उन्हें सत्ता गंवानी पड़ी वहीं स्वर्ण मंदिर में सेना भेजने के फैसले की कीमत उन्हें अपने सिख अंगरक्षकों के हाथों जान देकर चुकानी पड़ी।
तो यह तीसरा लोकसभा का चुनाव ही था, जिसने कई ऐतिहासिक घटनाएं लोकतंत्र में दी। लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा जैसी ताकतवर शख्सियतें तीसरे चुनाव के बाद की ही बात है।

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