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लोकसभा चुनाव 2019 : बस्तर में क्यों नहीं जीत पा रही कांग्रेस...?

लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में बस्तर ही एकमात्र सीट है, जहां लोकसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान होना है। 11 अप्रैल को वोटिंग होगी।

लोकसभा चुनाव 2019 : बस्तर में क्यों नहीं जीत पा रही कांग्रेस...?

लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है। छत्तीसगढ़ में बस्तर ही एकमात्र सीट है, जहां लोकसभा चुनाव के पहले चरण में मतदान होना है। 11 अप्रैल को वोटिंग होगी। विभिन्न मुद्दों को लेकर हरिभूमि-आईएनएच न्यूज चैनल की संयुक्त पहल पर बस्तर से वोट यात्रा लोकसभा चुनाव 2019 का आगाज किया गया। हरिभूमि और आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने शहीद पार्क पर चर्चा की। प्रस्तुत है उसके अंश:-

प्रश्न : बस्तर कांग्रेस का गढ़ था। बावजूद इसके कांग्रेस को लोकसभा चुनाव में लगातार असफलता क्यों मिल रही है? 1996 से बस्तर लोकसभा सीट से कांग्रेस क्यों हार रही है?

महापौर जतिन जायसवाल: बस्तर में यूपीए सरकार के कार्यकाल में आदिवासियों को जल, जंगल, जमीन का अधिकार देकर वनाधिकार पट्टा दिया गया। किंतु जब से केंद्र में भाजपा नीत एनडीए की सरकार है, बस्तर के वनवासियों से उनका अधिकार छीना गया है। यूपीए सरकार के कार्यकाल में 1 लाख 63 हजार वनाधिकार पट्टा का वितरण किया गया था। जैसे ही केंद्र में एनडीए आई, आदिवासियों से उनका हक छीन लिया गया। कांग्रेस शुरू से ही आदिवासी हित की लड़ाई लड़ रही है और लोकसभा चुनाव में भी हमारी जीत उसी मुद्दे पर होगी।

प्रश्न: आप बात घुमा रहे हैं। पूर्व में बस्तर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में स्व. महेन्द्र कर्मा जीते थे। उसके पूर्व भाजपा के दबंग नेता बलीराम कश्यप जीते। फिर दिनेश कश्यप पिछले 2 चुनाव से सांसद हैं। कांग्रेस हार रही है क्यों?

महापौर जतिन जायसवाल: बस्तर में नगरनार स्टील प्लांट कांग्रेस की देन है, भाजपा वाले अब उसे निजी उद्योगपति के हवाले करने पर तुले हैं। किंतु हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ऐसा होने नहीं देंगे।

पूर्व मंत्री केदार कश्यप से

प्रश्न: विधानसभा में भाजपा क्यों हारी?

केदार कश्यप: कांग्रेस ने हमेशा ही गरीबों और आदिवासियों का शोषण किया है। जब से प्रदेश में भाजपा की सरकार बनी, यहां के आदिवासियों का सर्वांगीण विकास हुआ। कांग्रेसी दिल्ली में आदिवासियों को नचवाते थे, भाजपा के समय दिल्ली, रायपुर के उच्च पदों पर पहुंचे। जहां तक विधानसभा चुनाव की बात है, यह जनादेश है। जीत-हार लगी रहती है। देश के नामी राजनेताओं को भी हार का सामना करना पड़ता है। इंदिरा गांधी और अटल बिहारी बाजपेयी जैसे दिग्गजों को भी हार का सामना करना पड़ा। 1998 में बस्तर में भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी, यहां के लोग अशिक्षित रहें ऐसा कांग्रेस चाहती थी। किंतु प्रदेश में भाजपा सरकार आने के बाद आदिवासियों में भारी बदलाव आया। आज कांग्रेस आदिवासियों से अन्याय कर रही है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को बस्तर से इतनी बड़ी जीत मिली, फिर भी बस्तर से विधायकों को मंत्री नहीं बनाया गया।

प्रश्न: जब बस्तर में आपकी पार्टी और आपकी सरकार ने इतना काम किया, तो क्यों हारे? पहले आप रमन की बात करते थे अब आप मोदी की बात कर रहे हैं।

केदार कश्यप: 15 वर्षों भाजपा को जनादेश मिला। आज विपक्ष में है। कांग्रेस ने चुनाव जीतने झूठे वादे किए। किसानों के साथ धोखा हुआ। जनता समझ चुकी है। लोकसभा चुनाव में इसका जवाब कांग्रेस को देगी।

प्रश्न: 70-80 दिनों में कांग्रेस सरकार को कैसे तौल लेंगे? कांग्रेस सरकार बनते ही किसानों से वादा किया था उसे पूरा किया गया। यहां तक कि किसानों का कर्जमाफ किया गया। 2500 रूपये धान का समर्थन मूल्य दिया जा रहा है।

केदार कश्यप: प्रधानमंत्री श्री मोदी की आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक अलग छवि बनी है। जो आज से पहले किसी भी सरकार में नहीं थी। चाहे वह अमेरिका के साथ संबंध हो या ब्रिटेन के साथ या किसी अन्य देशों के साथ। ऐसा प्रयास यूपीए सरकार के दौरान कभी नहीं किया गया।

पत्रकार भंवर बोथरा से सवाल

प्रश्न: लोकसभा में कांग्रेस की क्यों हारती है? विधानसभा चुनाव में भाजपा इतनी बुरी गति से कैसे हारी?

भंवर बोथरा: लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग मुद्दे पर होते हैं। जहां तक विधानसभा चुनाव की बात है तो स्थानीय स्तर पर और प्रदेश स्तर पर जनता राजनीतिक दलों को समर्थन करती है। किंतु लोकसभा चुनाव में आमजन राष्ट्रीय स्तर को ध्यान में रखकर वोट करते हैं। राष्ट्रीय मुद्दे लोकसभा चुनाव में ज्यादा प्रभावी रहते हैं। पूर्व में बस्तर राजनीति में अपनी अलग छाप छोड़ने में भाजपा के वरिष्ठ नेता बलीराम कश्यप और कांग्रेस के दबंग लीडर महेन्द्र कर्मा के समान अब तक कोई नेता बस्तर में नहीं उतारा गया। इसलिए बस्तर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत नहीं हुई। वर्तमान परिस्थिति राष्ट्रीय स्तर पर हुए घटनाक्रम पर आधारित है। इसमें चाहे सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक हो। इसमें एनडीए सरकार के पक्ष में लोगों का रूझान बढ़ा है।

महापौर की तरफ रुख करते हुए

प्रश्न: कांग्रेस लोकसभा चुनाव में प्रत्याशी चयन नहीं कर पाई है। 70 दिनों में कांग्रेस ने ऐसा क्या किया, जिससे जनता समर्थन दे?

जतिन जायसवाल: हमारा संगठन चुनाव लड़ता है। चयन पार्टी पर छोड़ दें। जो काम भाजपा 15 सालों में नहीं कर सकी, वो किया।

स्थानीय विधायक रेखचंद जैन से सवाल

प्रश्न: कांग्रेस की किस उपलब्धि के बल पर जनता से समर्थन मांगा जाएगा?

रेखचंद जैन: कांग्रेस की सरकार ने सत्ता संभालते ही 6 घंटों के भीतर किसानों से किए वायदे को पूरा किया। कर्जा माफ किया। धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 2500 रूपये किया। एक-एक दाना धान की खरीदी की गई। बिजली बिल हाफ किया जाएगा और भी जो वायदे सरकार ने किए थे, उसे हर हाल में पूरा किया जाएगा, इसमें किसी प्रकार की कोई शक की गुंजाइश नहीं है। जहां तक बस्तर के मूल लोगों की बात है जल, जंगल और जमीन के मुद्दे को हमारी कांग्रेस सरकार गंभीरता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री के प्रयास से ही लोहण्डीगुड़ा के टाटा प्रभावित लोगों को बड़ी राहत मिली। जमीन वापस दिलाई गई।

केदार कश्यप की ओर रुख करते हुए

प्रश्न: आपकी सरकार ने किसानों के साथ क्यों न्याय नहीं किया?

केदार कश्यप: हमारी सरकार ने टाटा प्रभावितों को जमीन लौटाने की प्रक्रिया शुरू की थी। चूंकि भूअर्जन कानून 2005 में लागू हुआ था, इसलिए यह प्रक्रिया में था। पूर्व विधायक संतोष बाफना, भाजपा नेता किरण देव ने कहा - कांग्रेस ने बस्तर को वर्षों से अजायब घर बनाकर रखा था। इस परंपरा को भाजपा ने खत्म किया और आदिवासियों में बदलाव लाने का काम किया, जिसके चलते आदिवासियों में आमूलचूल परिवर्तन देखने को मिला। बस्तर में मेडिकल कॉलेज, स्टील प्लांट, विश्वविद्यालय और जगह-जगह सड़कों का जाल बिछाया गया, स्कूल खोले गए।

सवाल: नक्सलवाद को लेकर क्या गंभीरता से प्रयास नहीं किया गया, ताकि ये खत्म हो?

भंवर बोथरा: वर्तमान चुनाव में नक्सल समस्या पर वास्तव में गंभीरता से प्रयास नहीं किया गया। किंतु लोकसभा चुनाव में नक्सलवाद मुद्दा नहीं हो सकता। वरन एनएमडीसी की डिपोजिट-13 की खदान को अडानी को लीज में दिया जाना, स्टील प्लांट में स्थानीय लोगों को केवल 3 फीसदी नौकरी देना, 10 वर्षों के इंतजार के बाद नगरनार स्टील प्लांट के प्रभावितों को नौकरी देना, यह सब बड़े मुद्दे हैं। कांग्रेस नेता राजेश चौधरी ने भी पूर्ववती भाजपा सरकार को जमकर कोसा।

किसान नेता धरमुराम कश्यक का कांग्रेस से सवाल: प्रदेश में कांग्रेस सरकार ने कर्जमाफी की बात की थी। किंतु बड़े किसानों का ही कर्जमाफ किया गया। छोटे किसान आज भी कर्जमाफी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। बावजूद उनको न्याय नहीं मिल रहा है?

जतिन जायसवाल: सभी किसानों का कर्जमाफ किया जाएगा। बीपीएस से जुड़े जगतार सिंह ने भाजपा नेता केदार कश्यप से कहा कि भाजपा शासनकाल में बस्तर परिवहन संघ में तालाबंदी की गई और हजारों लोगों को दो वर्षों तक सड़क पर लाने का काम किया। केदार कश्यप ने इस पर कहा कि बीपीएस शुरू करने में हमारे पिता बलीराम कश्यप जी की प्रमुख भूमिका रही।

बस्तर के 70 प्रतिशत वोटर आदिवासी

छत्तीसगढ़ की बस्तर लोकसभा सीट से सांसद भाजपा के दिनेश कश्यप हैं। साल 2014 में दिनेश कश्यप ने कांग्रेस प्रत्याशी को 1 लाख 24 हज़ार से ज्यादा मतों से पराजित किया था। दिनेश कश्यप दूसरी बार यहां से सांसद चुने गये। इससे पहले 2011 के उपचुनाव में उन्होंने जीत दर्ज की थी। ये सीट अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए सुरक्षित है।

महिला मतदाता ज्यादा

2014 में 12 लाख 98 हज़ार वोटर

महिलाएं 6 लाख 65 हज़ार से ज्यादा

पुरुषों ने महिलाओं से ज्यादा वोट डाले

3 लाख 87 हज़ार 112 पुरुष ने वोट डाले

महिला वोटर 3 लाख 82 हज़ार 801

विगत लोकसभा: 59 फीसदी मतदान दर्ज

70 फीसदी आदिवासी वोटर हैं।

शहरी मतदाता महज 15.23 फीसदी

इस लोकसभा क्षेत्र की आबादी 20 लाख 64 हज़ार से ज्यादा है।

बदल गया है परिदृश्य

2018 के विधानसभा चुनाव के बाद: बस्तर लोकसभा में 8 विधानसभा की सीटें हैं। इनमें अभी 7 कांग्रेस के पास हैं और केवल एक सीट पर भाजपा का कब्जा है। कांग्रेस के पास जो सीटें हैं उनमें शामिल हैं-कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, जगदलपुर, चित्रकूट, बीजापुर और कोंटा। बस्तर लोकसभा में बीजेपी के पास केवल दंतेवाड़ा की सीट है।

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