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लोकसभा चुनाव 2019 : आचार संहिता क्या होती है? नेताओं को मुंह खोलने से पहले रखना होगा इन बातों का ध्यान

लोकसभा चुनाव 2019 के तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग ने कर दी है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। आचार संहिता का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होता है। आचार संहिता की निगरानी के लिए भी निर्वाचन आयोग का पूरा अमला लगा होता है। बहुत से लोगों को नहीं पता कि आचार संहिता क्या है। या आचार संहिता लागू होने से क्या प्रभाव होने वाले हैं।

लोकसभा चुनाव 2019 : आचार संहिता क्या होती है? नेताओं को मुंह खोलने से पहले रखना होगा इन बातों का ध्यान
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लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) के तारीखों की घोषणा चुनाव आयोग ने कर दी है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही देश में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। आचार संहिता का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होता है। आचार संहिता की निगरानी के लिए भी निर्वाचन आयोग (Election Commission) का पूरा अमला लगा होता है। बहुत से लोगों को नहीं पता कि आचार संहिता क्या है (What is Code of Conduct)। या आचार संहिता लागू होने से क्या प्रभाव होने वाले हैं। आइए जानते हैं आचार संहिता के बारे में।

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आचार संहिता लागू होने के बाद असर

  • आचार संहिता के प्रभावी होने तक किसी भी तरह के नए सरकारी काम नहीं शुरू हो सकेंगे। जो कार्य पहले से शुरू हैं वो जारी रहेंगे।
  • आवास योजना में जिन लाभार्थियों को आवास की स्वीकृति प्रदान हो गई है और पहली किश्त जारी हो गई है वह काम चलता रहेगा। लेकिन किसी भी तरह का कोई नया काम स्वीकृत नहीं किया जा सकेगा।
  • सहायता समूहों को जिन्हें आंशिक अनुदान-ऋण जारी किया गया होगा उनको तो अवशेष अनुदान दिया जा सकेगा। लेकिन नए व्यक्तिगत स्वरोजगारी अथवा सहायता समूह को वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी।
  • मनरेगा जॉब कार्ड धारक श्रमिक कार्य की मांग करेंगे तो उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। लेकिन शर्त यह होगी कि इन श्रमिकों को निर्माणाधीन कार्य पर ही रोजगार मिलेगा।
  • सरकारी सड़क आदि के नए निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सकेंगे। चुनाव कि प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के नए टेंडर नहीं हो सकेंगे।
  • ऐसी किसी भी तरह की कल्याणकारी योजनाओं को स्वीकृति नहीं मिलेगी, जिसमें सांसद, विधायक निधि शामिल हो। इस निधि से होने वाले कार्य यदि पूर्व में स्वीकृत भी हो गए होंगे, और उनका कार्यादेश जारी भी होगा लेकिन अगर मौके पर काम शुरू नहीं हुआ होगा तो वह रुका रहेगा।
  • प्राकृतिक आपदाओं को लेकर कल्याणकारी योजनाओं पर कोई रोक नहीं होगी।
  • आचार संहिता के चलते वेतन और पेंशन को छोड़कर किसी प्रकार की सरकारी धन निकासी पर प्रतिबंध होगा।
  • ऐसी कोई भी वित्ती स्वीकृतियां जारी नहीं होगी, जिससे मतदाताओं के प्रभावित होने की उम्मीद हो।

प्रत्याशियों पर यह होगा प्रभाव

  • कोई भी दल या प्रत्याशी ऐसा काम नहीं कर सकते जिससे जातियों और धार्मिक या भाषाई समुदायों के बीच मतभेद बढ़े या घृणा फैले।
  • राजनीतिक दलों की आलोचना कार्यक्रम व नीतियों तक ही सीमित होगी, न कि व्यक्तिगत।
  • धार्मिक स्थानों का उपयोग चुनाव प्रचार के मंच के रूप में नहीं किया जा सकेगा।
  • वोट के लिए भ्रष्ट आचरण का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। जैसे रिश्वत देना या किसी को परेशान करना।
  • किसी की अनुमति के बिना उसकी दीवार, अहाते, या भूमि का उपयोग नहीं किया जा सकेगा।
  • किसी दल की सभा या जुलूस में बाधा नहीं डालेंगे।
  • राजनीतिक दल ऐसी कोई भी अपील जारी नहीं करेंगे, जिससे किसी की धार्मिक या जातीय भावनाएं आहत हों।
  • राजनीतिक जनसभाओं से जुड़े नियम
  • सभा के स्थान व समय की पूर्व सूचना पुलिस अधिकारियों को देनी होगी।
  • दल या प्रत्याशी पहले ही सुनिश्चित कर लें कि जो स्थान उन्होंने चुना है वहां निशेधाज्ञा तो नहीं लागू है।
  • सभा स्थल में लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति पहले प्राप्त करनी होगी।
  • बिना अनुमति के जुलूस नहीं निकाल पाएंगे।
  • जुलूस का समय, शुरू होने का स्थान, मार्ग और समाप्ति का समय तय कर सूचना पुलिस को देनी होगी।
  • जुलूस का इंतजाम ऐसा हो, जिससे यातायात प्रभावित न हो।
  • राजनीतिक दलों का एक ही दिन, एक ही रास्ते से जुलूस निकालने का प्रस्ताव हो तो समय को लेकर पहले बात करनी होगी।
  • जुलूस को सड़क की दाईं तरफ से ही निकाला जा सकेगा।
  • जुलूस में ऐसी किसी भी चूज का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। जिसका इस्तेमाल उत्तेजना के क्षणों में हो सके।

सत्ताधारी दल

  • कार्यकलापों में शिकायत का मौका न दें।
  • मंत्री शासकीय दौरों के दौरान चुनाव प्रचार के कार्य नहीं कर सकते।
  • चुनाव प्रचार में शासकीय मशीनरी तथा कर्मचारियों का इस्तेमाल नहीं हो सकता।
  • सरकारी विमान और गाड़ियों का प्रयोग दल के हितों को बढ़ावा देने के लिए नहीं हो सकता।
  • हेलीपैड पर अधिकार नहीं जता सकते।
  • विश्रामगृह, डाक-बंगले या सरकारी आवास पर एकाधिकार नहीं होगा। सरकार भवन को प्रचार कार्यालय की तरह इस्तेमाल मे नहीं लाया जा सकता।
  • सरकारी धन का इस्तेमाल विज्ञापन के जरिए उपलब्धियां गिनवाने पर नहीं किया जा सकता।
  • मंत्रियों के शासकीय दौरे पर उस वाक्त गार्ड लगाए जाएंगे जब वह सर्किट हाउस में ठहरे हुए हों।
  • कैबिनेट की बैठक नहीं होगी।
  • स्थानांतरण तथा पदस्थापना के प्रकरण में आयोग का पूर्व अनुमोदन जरूरी है।

क्या नहीं कर सकते मंत्री

  • शासकीय दौरा (अपवाद छोड़कर)
  • विवेकाधीन निधि से अनुदान या स्वीकृति नहीं दे सकते।
  • परियोजना या योजना की आधारशिला नहीं रख सकते।
  • सड़क निर्माण या पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन नहीं दे सकते।

क्या नहीं कर सकते अधिकारी

  • शासकीय सेवक किसी भी प्रत्याशी के लिए मतदाता या गणना एजेंट नहीं बन सकते।
  • मंत्री यदि दौरे पर हैं और वह निजी आवास में ठहरते हैं तो अधिकारी बुलाने पर भी नहीं जाएगा।
  • चुनाव कार्य से जाने वाले मंत्रियों के साथ नहीं जाएंगे।
  • जिनकी चुनाव में ड्यूटी लगाई गई है, उन्हें छोड़कर सभा या अन्य राजनीतिक आयोजन में शामिल नहीं होंगे।
  • राजनीतिक दलों को सभा के लिए स्थान देते समय नहीं रोकेंगे।

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