Top
Hari bhoomi hindi news chhattisgarh

भाजपा को अगर जीतना है लोकसभा चुनाव 2019, तो रखना होगा इन बातों का ध्यान

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, केरल, नगौलैंड, पश्चिम बंगाल और मेघालय की चार लोकसभा और दस विधानसभा सीटों के लिए हुए उप चुनाव के नतीजों से जहां भारतीय जनता पार्टी को धक्का लगा है, वहीं अभी से 2019 के आम चुनाव में उसे चुनौती देने के लिए एकजुट होते हुए दिख रहे विरोधी दलों में इन नतीजों ने भरोसा लौटाने का काम किया है।

भाजपा को अगर जीतना है लोकसभा चुनाव 2019, तो रखना होगा इन बातों का ध्यान

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र, केरल, नगौलैंड, पश्चिम बंगाल और मेघालय की चार लोकसभा और दस विधानसभा सीटों के लिए हुए उप चुनाव के नतीजों से जहां भारतीय जनता पार्टी को धक्का लगा है, वहीं अभी से 2019 के आम चुनाव में उसे चुनौती देने के लिए एकजुट होते हुए दिख रहे विरोधी दलों में इन नतीजों ने भरोसा लौटाने का काम किया है।

जिन चार लोकसभा सीटों कैराना (उत्तर प्रदेश), पालघर, गोंदिया (महाराष्ट्र) और नगालैंड के लिए चुनाव हुए हैं, इनमें से पहली तीन सीटें 2014 में भाजपा ने जीती थी। उप चुनाव में भाजपा केवल पालघर की सीट जीतने में कामयाब हो पाई है। पश्चिम उत्तर प्रदेश की अहम मानी जाने वाली कैराना सीट राष्ट्रीय लोकदल-समाजवादी पार्टी ने उससे छीन ली जबकि महाराष्ट्र की गोंदिया सीट पर शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का कब्जा हो गया।

नगौलैंड सीट 2014 में भी एनडीपीपी ने जीती थी और अब भी उसी ने जीती है परंतु अंतर इतना है कि इस चुनाव में कांग्रेस ने उसे सर्मथन का ऐलान किया था। जहां तक दस विधानसभा सीटों के लिए हुए उप चुनाव के नतीजों का सवाल है, उन्होंने भी भाजपा को निराश किया है। उत्तर प्रदेश की नूरपुर सीट उसके पास थी परंतु अब वहां सपा ने जीत दर्ज की है। शाहकोट (पंजाब) सीट अकाली दल के पास थी, वहां कांग्रेस ने जीत हासिल की है।

जोकीहाट (बिहार) सीट जनता दल यू के पास थी, जो लालू यादव के नेतृत्व वाली राजद ने जीत ली है। झारखंड में भाजपा की सरकार है। वहां गोमिया और सिल्ली सीटों पर उप चुनाव हुआ। दोनों सीटें झारखंड मुक्ति मोर्चा ने जीत ली हैं। हालांकि यह दोनों सीटें उसी के पास थी। भाजपा के लिए राहत की खबर उत्तराखंड से आई है, जहां उसने थराली सीट फिर से जीत ली है।

पश्चिम बंगाल, केरल और महाराष्ट्र की तीन अन्य सीटों के उप चुनाव में टीएमसी, सीपीआईएम और कंग्रेस को ही कामयाबी मिली। पहले भी ये सीटें इन्हीं के पास थी। भाजपा को उत्तरी राज्यों उत्तर प्रदेश और बिहार के अलावा महाराष्ट्र में बड़ा झटका लगा है। उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है, जो बड़े बहुमत के साथ बनी थी परंतु लोगों में इतनी जल्दी असंतोष देखने को मिलने लगेगा, यह भाजपा नेतत्व ने नहीं सोचा होगा।

इससे पहले गोरखपुर और फूलपुर सीटों के लिए उप चुनाव में भी भाजपा को हार का सामना करना पड़ा था। अब कैराना लोकसभा और नूरपुर विस सीट का चुनाव हारने से साफ हो गया है कि उत्तर प्रदेश में हवा का रुख बदल रहा है, जो 2019 के आम चुनाव आते-आते तेज हो सकता है। अकेले उत्तर प्रदेश ने ही 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की झोली में 73 सीटें डाली थी।

यदि विपक्षी एकजुटता का कैराना और नूरपुर वाला प्रयोग 2019 में भी हुआ तो भाजपा को केन्द्र में वापसी के मामले में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगी जनता दल यू यानी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए जोकीहाट की बड़े अंतर से हुई हार लालू यादव और उनके कुनबे की बढ़ती लोकप्रियता निश्चत तौर पर बड़े खतरे का संकेत है।

इन नतीजों ने भाजपा नेतृत्व की पेशानी पर बल डाल दिये हैं क्योंकि 2014 के बाद से अब तक जिन 23 लोकसभा सीटों के लिए उप चुनाव हुए हैं, उनमें से केवल चार पर ही भाजपा को सफलता हासिल हुई है। 2014 में जो सीटें उसने जीती थीं, ऐसी छह सीटों पर हुए उप चुनाव में उसे हार का सामना करना पड़ा है। हालांकि यह भी सच है कि विभिन्न प्रदेशों के लिए हुए चुनावों में उसे कामयाबी मिलती आ रही है।

परंतु उप चुनाव के नतीजे आमतौर पर उसके खिलाफ ही जा रहे हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब सहित जितने भी प्रदेशों में पिछले एक-डेढ़ साल के भीतर उप चुनाव हुए हैं, उनमें भाजपा और उसके गठबंधन सहयोगियों को पराजय का सामना करना पड़ा है।

निश्चित रूप से यह भाजपा के लिए सचेत हो जाने का समय है, क्योंकि अब 2019 के आम चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं बचा है और आपसी तेलमेल से उपचुनाव लड़ रहे विपक्षी दलों को ये नतीजे महागठबंधन बनाकर भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए उत्साहित कर रहे हैं।

Next Story
Top