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लोकसभा चुनाव 2019 : एसपी-बीएसपी का गठबंधन मोदी सरकार को दे सकता है झटका

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान हो गया है। इस बार का चुनाव बहुत ही अहम होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोक दल में गठबंधन हो गया है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में से सपा 37 और बसपा 38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

लोकसभा चुनाव 2019 : एसपी-बीएसपी का गठबंधन मोदी सरकार को दे सकता है झटका

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान हो गया है। इस बार का चुनाव बहुत ही अहम होने जा रहा है। उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजय रथ को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोक दल में गठबंधन हो गया है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में से सपा 37 और बसपा 38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। तो वहीं गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) तीन सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। दो सीटों को कांग्रेस पार्टी के लिए छोड़ दिया गया है। इस महागठबंधन में कांग्रेस को जहग नहीं दी गई है। बसपा सुप्रीमों मायवती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोक दल ने भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए गठबंधन तो कर लिया है, लेकिन अब सवाल यह है कि क्या यह महागठबंधन मोदी सरकार झटका देने में कामयाब हो पाएगा?

भाजपा ने 2014 में 71 सीटें की थी हासिल

देश में साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने कुल 543 सीटों में से 282 सीटें जीत कर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया था। भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को कुल 334 सीटें प्राप्त हुई थी। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में से 71 सीटों पर अपना कब्जा जमाया था और दो सीटें उसके सहयोगी अपना दल को मिली थी।

उप चुनावों में भाजपा को मिली करारी हार

उत्तर प्रदेश में भाजपा ने साल 2014 में सबसे अधिक सीटें तो हासिल की लेकिन बीते वर्ष गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर में हुए उपचुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। जिसके बाद भाजपा पर एक सवाल हावी हो गया कि क्या जनता भाजपा पार्टी के विरोध में उतर आई है। क्या 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लिए सपा-बसपा का गठबंधन नासूर साबित होगा? उत्तर प्रदेश में हुए उपचुनावों को 2019 लोकसभा चुनाव के सेमीफाइन के तौर पर देखा गया था। उत्तर प्रदेश में यह उपचुनाव में सपा-बसपा और राष्ट्रीय लोकदल में मिलकर चुनाव लड़ा था। कैराना सीट पर रालोद-सपा गठबंधन की उम्मीदवार तबस्सुम ने भाजपा की मृगांका सिंह को 44,618 मतों से पराजित बड़ा झटका दिया था। जिसके बाद विपक्ष के खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई थी।

इस तर्ज पर सपा,बसपा और रालोद ने किया गठबंधन

उत्तर प्रदेश में सत्ता पर काबिज भाजपा को सपा,बसपा और रालोद के गठबंधन ने गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर सीटों पर हुए उपचुनावों में मात देकर जीत हासिल की थी। इन चुनावों को 2019 के सेमीफाइन के तौर पर देखा गया था। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश में एकबार फिर भारतीय जनता पार्टी को रोकने के लिए समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोक दल में गठबंधन कर लिया है। उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में से सपा 37 ,बसपा 38 और रालोद 3 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। उम्मीद यह जताई जा रही है कि गठबंधन उपचुनावों की तरह अब 2019 में भी भाजपा झटका देने में कामयाब हो होगा। लेकिन आशंका जताई जा रही है गठबंधन भाजपा को जरूर झटका देगा। लेकिन खास बात यह भी रही कि इस गंठबंधन में कांग्रेस को जहग नहीं दी गई है। अब कांग्रेस भाजपा और महागठबंधन के खिलाफ यूपी में अकेले चुनाव लड़ेगी।

उपचुनावों में हार के बाद भाजपा ने क्या कहा?

उत्तर प्रदेश में सीएम योगी के गढ़ गोरखपुर और यूपी के डिप्टी सीएम की फूलपुर लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनावों में हार के बाद भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि देश के राज्यों में भाजपा की बेहतरीन सरकारों में से एक उत्तर प्रदेश की सरकार भी है। अगर 2019 के लोकसभा चुनावों में भी समाजवादी पार्टी और बहुजजन समाज पार्टी का गठबंधन होता है तो उनकी पार्टी मुकाबला करने के लिए तैयार है।

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