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लोकसभा चुनाव 2019 : एसपी-बीएसपी गठबंधन पर क्या चल पाएगा यूपी का जादू

साल 2019 में होना वाला लोकसभा चुनाव इस बार दिलचस्प होने जा रहा है। इस बार उत्तर प्रदेश में त्रिकोणीय मुकावला देखने को मिलेगा। क्योंकि सपा-बसपा के गठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं मिली है। बसपा सुप्रीमों मायावती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया।

लोकसभा चुनाव 2019 : एसपी-बीएसपी गठबंधन पर क्या चल पाएगा यूपी का जादू

साल 2019 में होना वाला लोकसभा चुनाव इस बार दिलचस्प होने जा रहा है। इस बार उत्तर प्रदेश में त्रिकोणीय मुकावला देखने को मिलेगा। क्योंकि सपा-बसपा के गठबंधन में कांग्रेस को जगह नहीं मिली है। बसपा सुप्रीमों मायावती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से साफ इनकार कर दिया। जिसके बाद कांग्रेस उत्तर प्रदेश में अपने दम पर ही चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस और महागठबंधन का उद्देश्य पीएम मोदी के विजय रथ को रोकना है। अब देखना यह होगा कि क्या उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी गठबंधन कांग्रेस और भाजपा पर भारी पड़ेगा, क्या यह गठबंधन प्रदेश की जनता को लुभाने में कामयाब हो पाएगा।

उपचुनाव और गठबंधन पर एक नजर

उत्तर प्रदेश में भाजपा ने साल 2014 में सबसे अधिक सीटें तो हासिल की थी लेकिन 2018 में गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर में हुए उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। गोरखपुर उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ का गढ़ माना जाता है। मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर सीट खाली हुई तो मार्च 2018 में हुए उपचुनाव में भाजपा की हार हुई और समाजवादी पार्टी के प्रवीण निषाद सांसद बने। यूपी में गोरखपुर, फूलपुर, कैराना और नूरपुर उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मात देने के लिए सपा-बसपा और आरएलडी ने गठबंधन किया जिसमें वे सफल भी रहे। कैराना सीट पर रालोद-सपा गठबंधन की उम्मीदवार तबस्सुम ने भाजपा की मृगांका सिंह को 44,618 मतों से पराजित कर बड़ा झटका दिया। लेकिन उपचुनाव के केवल चार सीटों पर हुए थे लेकिन अब उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। इस समय स्थिति पहले की तरह नहीं है, भाजपा भी कांग्रेस और गठबंधन को मात देने के लिए रणनीति पर काम कर रही है।

क्या गठबंधन पर चलेगा यूपी का जादू?

साल 2014 में हुए लोकसभा चुनावों पर नजर डालें तो भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 80 सीटों में से 71 सीटों पर जीत हासिल की थी और दो सीटें उसके सहयोगी अपना दल को मिली। वहीं समाजवादी पार्टी को पांच और कांग्रेस पार्टी को दो सीटें मिली थी जबकि बसपा को कोई भी सीट हासिल नहीं हुई। अगर 2014 के आंकड़ों को देखकर आशंका जताई जाए तो गठबंधन पर यूपी का जादू नहीं चलने वाला है। क्योंकि वर्तमान समय में भी भारतीय जनता पार्टी गठबंधन और कांग्रेस पर भारी है। 2014 के लोकसभा चुनावों के बाद 2017 में उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हुए थे। भारतीय जनता पार्टी को उत्तर प्रदेश में मात देने के लिए सपा और कांग्रेस ने गठबंधन से चुनाव लड़ा था। लेकिन भाजपा ने पूर्ण बहुमत से चुनाव जीता।

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