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लोकसभा चुनाव 2019 : उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा को क्यों पड़ी गठबंधन की जरूरत?

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तारीखों का ऐलान हो चुका है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस का संयुक्त रूप से चुनाव लड़ना अब संभव नहीं है। क्योंकि बसपा सुप्रीमों मायावती ने साफ कर दिया है कि पूरे देश में कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा।

लोकसभा चुनाव 2019 : उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा को क्यों पड़ी गठबंधन की जरूरत?

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए तारीखों का ऐलान हो चुका है। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और कांग्रेस का संयुक्त रूप से चुनाव लड़ना अब संभव नहीं है। क्योंकि बसपा सुप्रीमों मायावती ने साफ कर दिया है कि पूरे देश में कांग्रेस पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी को मात देने के लिए सपा, बसपा और राष्ट्रीय लोक दल ने गठबंधन किया है। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में समाजवादी पार्टी 37 और बहुजन समाज पार्टी 38 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। तो वहीं गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोक दल तीन सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। इस महागठबंधन का उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ और कांग्रेस का रोकना मना जा रहा है।

क्यों पड़ी गठबंधन की जरूरत

2014 में जिस तरह से बसपा का हुआ था और 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में बसपा सिर्फ 19 सीटों पर सिमट गयी थी। उस स्थिति को अगर देखा जाए तो बसपा को एक नए समीकरण की तलाश थी। ठीक उसी तरह लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद सपा का कांग्रेस के साथ गठबंधन का फैसला विधानसभा चुनाव में गलत साबित हुआ था। क्योंकि प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने भारी मतों से जीत हासिल करके यूपी में अपना कब्जा जमाया। ऐसे में सपा मुखिया अखिलेश यादव को भी मायावती जैसे मजबूत जनाधार वाले सहयोगी दल की दरकार थी।

एक मंच पर दिखा विपक्ष

कर्नाटक में जनता दल सेक्युलर (जेडीएस) और कांग्रेस गठबंधन सरकार के शपथ ग्रहण के दौरान कई राजनीति दल एक साथ मंच पर नजर आए। जिसके बाद कयास लगाए गए कि भारतीय जनता पार्टी के विजय रथ को रोकने के लिए महागठबंधन फिर से आ रहा है। यह पहली बार नहीं है कि इससे पहले भी नहीं हुआ है। इससे पहले भी गठबंधन होते आए हैं और एक शख्ससिय के महागठबंधन को ढेर होते हुए भी देखा जा चुका है। 1971 में राजनीतिक दलों ने इंदिरा गांधी को हराने के लिए महागठबंधन बनाया था लेकिन इंदिरा गांधी ने महागठबंधन को हराकर सत्ता हासिल की थी।

एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए ये नेता

एचडी कुमारस्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, यूपीए चेयर पर्सन सोनिया गांधी, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को एक मंच पर देखा गया था। लेकिन शपथ समारोह में बसपा सुप्रीमों मायावती नहीं पहुंचे थी। इस बार चुनाव में बसपा सुप्रीमों मायावती ने कांग्रेस से दूरी बनाई हुई है और यूपी में सपा और राष्ट्रीय लोकदल पार्टी के साथ वो मिलकर चुनाव लड़ रही हैं।

यह सवाल उठना है लाजमी

ऐसे में एक बार फिर सवाल उठता तो लाजमी है कि क्या लोकसभा चुनाव 2019 के चुनाव में महागठबंधन हराने में कामयाब हो सकता है। एकजुट हो रहा विपक्ष क्या लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए को हरा पाएगा? ऐसे ही तमाम तरह से सवाल उठ राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन हुए हैं। लेकिन वित्त मंत्री अरुण जेटली कह चुके हैं कि इस बार का चुनाव मोदी बनाम अन्य होगा।

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