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लोकसभा चुनाव 2019 : ''गरीबी हटाओ, इंदिरा लाओ'' से लेकर ''अबकी बार मोदी सरकार'' तक ये 5 नारे बने इतिहास

यदि हम भारतीय चुनाव के नारों का इतिहास उठा कर देखें तो ऐसे कई नारे सामने उभर कर आ जाएंगे जिनके सहारे जीत की कहानी लिखी गई है।

लोकसभा चुनाव 2019 : गरीबी हटाओ, इंदिरा लाओ से लेकर अबकी बार मोदी सरकार तक ये 5 नारे बने इतिहास
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यदि हम भारतीय चुनाव के नारों का इतिहास उठा कर देखें तो ऐसे कई नारे सामने उभर कर आ जाएंगे जिनके सहारे जीत की कहानी लिखी गई है। ये नारे अपने आप में बहुत हद मजाकिया और हल्के-फुल्के होते हैं, लेकिन इनका इंपैक्ट ऐसा है जो सीधे मतदाताओं को हिट करता है। इन नारों ने कई पार्टियों की किस्मत भी बदली। सियासतदार बड़े-बड़े वादे करते हैं, और हर पार्टी अपने चुनाव प्रचार के लिए शानदार नारों से लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करने में लगी रहती हैं।

60 के दशक में ही हो गया था नारों का अंकुरण

नारों का इतिहास उठा कर देखें तो इसका अंकुरण 60 के दशक में ही हो गया था। 1967 के आम चुनाव में भारतीय जनसंघ मतदाताओं से नारे- 'जन संघ को वोट दो, बीड़ी पीना छोड़ दो, बीड़ी में तंबाकू है, कांग्रेस वाले डाकू हैं' के साथ कांग्रेस और तंबाकू दोनों को खारिज करने की गुहार की थी। इस आम चुनाव में जन संघ ने जहां 35 सीटें हासिल की वहीं कांग्रेस 283 सीटें जीत कर सबसे बड़ी पार्टी बनकर सत्ता में वापस आई थी।

मोदी चेहरे पर केंद्रीत था नारा

14वीं लोकसभा में सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाली पार्टी भाजपा का एक मूल नारा रहा 'अबकी बार मोदी सरकार'। यह नारा भाजपा के प्रधानमंत्री उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर केंद्रित था। उस दौर के सोशल मीडिया को खंगाले तो इस नारे की तुकबंदी करती कई लाइनों का सैलाब सा नजर आता है, जैसे- ट्विंकल ट्विंकल लिटिल स्टार, अबकी बार मोदी सरकार, दिल का भंवर करे पुकार अबकी बार मोदी सरकार, वगैरह।

1970 में 'गरीबी हटाओ, इंदिरा लाओ' का नारा

वीवी गिरी को राष्ट्रपति बनाए जाने के बाद कांग्रेस दो फाड़ हो गई। 12 नवंबर 1969 को इंदिरा गांधी को कांग्रेस से निकाल दिया गया। अब एक गुट इंदिरा के समर्थकों था कांग्रेस (आर) और दूसरा सिंडिकेट जो कांग्रेस (ओ) के नाम का था। 1970 में इंदिरा ने चुनाव की घोषणा कर दी, सिंडिकेट और उनके समर्थित दलों ने 'इंदिरा हटाओ' का नारा दिया। इंदिरा ने पलटवार करते हुए 'गरीबी हटाओ, इंदिरा लाओ' नारा दिया था।

'इंदिरा हटाओ देश बचाओ'

इमर्जेंसी के दौर के बाद हुए आम चुनाव में पूरा विपक्ष जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में एक साथ हो गया। देश की सत्ता पर काबिज इंदिरा गांधी को हटाने का उन्माद पूरे चरम पर था। इस दिशा में जनता पार्टी एक जुट हुई और आम चुनाव में इंदिरा गांधी को करारी शिकस्त देने के लिए देश की जनता से 'इंदिरा हटाओ देश बचाओ' का नारा दिया गया। 1977 में पहली बार गैर-कांग्रेसी सरकार प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई देश के नेतृत्व में बनी। 1978 के उपचुनाव के दौरान कांग्रेस के श्रीकांत वर्मा की तरफ से जनता पार्टी के नेताओं का मजाक उड़ाने के लिए गढ़ा गया नारा- 'एक शेरनी सौ लंगूर, चिकमंलूर भाई चिकमंगलूर' बेहद चर्चा में रहा।

ये नारे भी चचित रहे

1984 में हुए आम चुनाव के केंद्र में नारा – ‘जब तक सूरज चांद रहेगा, इंदिरा तेरा नाम रहेगा’ रहा।

1989 के आम चुनाव के दौरान देश की सियासत में सांप्रदायिक रंग घुले हुए थे। उस दौरान विश्व हिंदू परिषद का नारा- 'बच्च-बच्चा राम का, जन्मभूमि के काम का' और 'जय श्री राम' काफी लोकप्रिय हुए

यूपी में मुलायम सिंह यादव और कांशीराम ने साल 1993 में मिलकर सरकार बनाई। इस मिलन को इस नारे- 'मिले मुलायम-कांशीराम, हवा हो गए जय श्रीराम' के साथ जोड़ा गया।

1996 में हुए आम चुनाव में भाजपा की तरफ से दिया गया यह नारा 'बारी बारी सबकी बारी अबकी बारी अटल बिहारी' पार्टी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार अटल बिहारी वाजपेयी पर केंद्रित था।

2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए गठबंधन द्वारा जारी सबसे प्रसिद्ध नारों में से एक 'इंडिया शाइनिंग' नारा की काफी चर्चित था।

2009 के लोकसभा चुनाव में 'सोनिया नहीं यह आंधी है, दूसरी इंदिरा गांधी है' कांग्रेस की तरफ से गढ़ा गया नारा था। जिसे लोगों ने पसंद किया और जीत का तोहफा दिया।

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