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लोकसभा चुनाव 2019: अमेठी से राहुल गांधी रहे 4 बार सांसद, स्मृति दे रहीं जोरदार टक्कर, जानें कैसे बना गांधी परिवार का वर्चस्व

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इस बार दो लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अमेठी के अलावा वह इस बार केरल की वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं। अमेठी से राहुल का ही नहीं कांग्रेस परिवार का बेहद पुराना रिश्ता रहा है।

लोकसभा चुनाव 2019: अमेठी से राहुल गांधी रहे 4 बार सांसद, स्मृति दे रहीं जोरदार टक्कर, जानें कैसे बना गांधी परिवार का वर्चस्व
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी इस बार दो लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के अमेठी के अलावा वह इस बार केरल के वायनाड से भी चुनाव लड़ रहे हैं। अमेठी से राहुल का ही नहीं कांग्रेस परिवार का बेहद पुराना रिश्ता रहा है। इसी सीट से राहुल के पापा, चाचा और मां चुनाव जीतकर संसद पहुंच चुकी हैं। राहुल गांधी तीन बार इस सीट से जीत चुके हैं। चौथी बार वह यहां से नामांकन कर रहे हैं। अमेठी में पांचवे चरण के तहत 6 मई को वोट डाले जाएंगे।

पहली बार यहीं से लड़े चुनाव

राहुल गांधी की राजनीतिक शुरुआत अमेठी की माटी से ही हुई है। उन्होंने इस सीट पर अपने विपक्षी बसपा के चंद्र प्रकाश मिश्रा को तीन लाख वोटों से हराया। 2009 में जब दोबारा केन्द्र में कांग्रेस आई। राहुल गांधी ने फिर करीब साढ़े तीन लाख वोटों से जीते। 2014 में जब देश में मोदी लहर चल रही थी तब भी अमेठी की हवा में राहुल गांधी चल रहे थे। उन्होंने भाजपा की स्मृति ईरानी को हराया। लेकिन एक बात जो गौर करने वाली थी वो ये कि उनके जीत का जो अन्तर पहले दो चुनाव में था वह लगभग आधा रह गया। वह 1 लाख 7 हजार वोट से ही जीत पाएं। इस चुनाव में भी उनके सामने स्मृति ईरानी प्रमुख प्रतिद्वंदी हैं। जो 11 अप्रैल को नामंकन करेंगी।

हर बार बाजी कांग्रेस के हाथ

अमेठी लोकसभा सीट पर 16 चुनाव और दो उपचुनाव हुए हैं। यहां के वोटरों को दूसरी पार्टियों ने कभी अपने हिस्से में नहीं कर पाई। हाथ के पंजे के निशान के सामने ही यहां वोट पड़ते रहे हैं। 16 बार यहां से कांग्रेस के प्रत्याशी जीते हैं। 1977 में आपातकाल के दौरान यहां कांग्रेस को हार झेलनी पड़ी। उसके बाद 1998 में भाजपा ने पहली बार यहां जीत दर्ज करने में कामयाबी हासिल की थी, उसके बाद आजतक जीत का इंतजार है।

1980 के बाद गांधी परिवार का वर्चस्व

कांग्रेस की इस परंपरागत सीट पर 1980 में गांधी परिवार की नजर पड़ी। और पहली बार 1980 में इंदिरा गांधी के पुत्र संजय गांधी यहां कांग्रेस के टिकट पर विजयी हुए। उनकी मौत के बाद राजीव गांधी ने इसी सीट से राजनीतिक पदार्पण करते हुए लगातार 4 बार जीतकर संसद पहुंचे।
1991 में उनकी हत्या के बाद कांग्रेस के ही सतीश शर्मा यहां से 7 साल सांसद चुने गए। 1999 में सोनिया गांधी ने भी राजनीतिक शुरुआत यहीं से की। और फिर जब वह 2004 में रायबरेली से चुनाव लड़ने गई तो ये सीट कांग्रेस के युवराज राहुल के हिस्से में आई।
जिस प्रकार पिछले तीन चुनाव में राहुल गांधी ने जीत दर्ज की है उससे तो एक बात साफ है कि उन्हें हरा पाना स्मृति ईरानी के लिए बेहद मुश्किल है। एक बात जो सबसे महत्वपूर्ण है वो ये कि 2014 के लोकसभा चुनाव में हारने के बाद भी स्मृति ने मैदान नहीं छोड़ा और अमेठी का लगातार चक्कर लगाती रही। विकास के बड़े काम करवाने का भी वादा करती रही हैं।
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