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लोकसभा चुनाव 2019 : अगर प्रियंका गांधी वाराणसी सीट से चुनाव लड़े तो ऐसा होगा चुनावी गणित

देश में इस समय चुनाव का माहौल है। हर तरफ बस जीत-हार की गुणा-गणित लगाई जा रही है। कोई भाजपा तो कोई महागठबंधन की सरकार बनवा रहा है। इसी बीच एक खबर आती है और सबको रुककर सोचने को मजबूर करती है। अगर प्रियंका पीएम नरेंद्र मोदी की सीट वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो क्या वह पीएम को चुनौती दे पाएंगी?

लोकसभा चुनाव 2019 : अगर प्रियंका गांधी वाराणसी सीट से चुनाव लड़े तो ऐसा होगा चुनावी गणित

देश में इस समय चुनाव का माहौल है। हर तरफ बस जीत-हार की गुणा-गणित लगाई जा रही है। कोई भाजपा तो कोई महागठबंधन की सरकार बनवा रहा है। इसी बीच एक खबर आती है और सबको रुककर सोचने को मजबूर करती है। अगर प्रियंका पीएम नरेंद्र मोदी की सीट वाराणसी से चुनाव लड़ती हैं तो क्या वह पीएम को चुनौती दे पाएंगी?

सियासत में इसी साल पूरी तरह सक्रिय हुई प्रियंका गांधी इस समय उत्तर प्रदेश में जमकर प्रचार कर रही हैं। रोड शो और रैली के अलावा वह बूथ स्तर पर जाकर वोटरों से सीधा मिल रही हैं। उनकी इस इस्टाइल से विरोधी खेमें में खलबली है। वाराणसी से चुनाव लड़ने के सवाल पर उन्होंने बड़ी ही सादगी से कहा सिर्फ बनारस से ही क्यों, जहां से पार्टी कहेगी वहां से लड़ जाएंगे। प्रियंका ने बड़े हल्के में जवाब दिया।

अगर प्रियंका पीएम मोदी के खिलाफ उतर जाती हैं तो मुकाबला रोचक हो जाएगा। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी को बनारस की जनता ने एकतरफा चुना था उन्हें 5,81,022 वोट मिले थे। पीएम के खिलाफ उतरे अरविंद केजरीवाल को 2,09,238 वोट मिले, यानी जीत का अंतर 3,77 हजार रहा। कांग्रेस के झंडे तले उतरे अजय राय को महज 75,614 वोट ही मिले।

सपा को पैतालिस हजार तो बसपा को 60 हजार वोट मिले थे। इस साल सपा और बसपा के बीच गठबंधन है। साथ ही दिल्ली के अरविंद केजरीवाल भी इस साल चुनावी समर में बनारस नही दिखेगें। इस लिए अगर प्रियंका गांधी को कांग्रेस आलाकमान पीएम के खिलाफ मैदान में उतारता है तो मुकाबला रोचक होने की पूरी उम्मीद है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अगर वाराणसी से मैदान में उतरती हैं तो बड़ा सवाल यह भी है कि क्या गठबंधन अपना प्रत्याशी मैदान में उतारता है या नही, ज्ञात हो कि कांग्रेस ने सपा और बसपा कि उन 7 सीटों पर प्रत्याशी नहीं उतारे हैं जहां पार्टी के प्रमुख नेता मैदान में है, वहीं गठबंधन नें बस अमेठी और रायबरेली से ही अपने प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है।

वाराणसी में सवा तीन लाख के करीब बनिया मतदाता हैं जो भाजपा का बेस वोट माना जाता है। ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 2.50 लाख है जो पिछले लोकसभा में पूरी तरह पीएम के साथ था। विश्वनाथ कॉरिडोर बनाने में जिनके घर सबसे ज्यादा हैं उनमें ब्राह्मण ही हैं। वह इस समय एससी/एसटी संशोधन बिल को लेकर नाराज भी हैं पर उस नाराजगी पर समान्य वर्ग को मिला 10 प्रतिशत आरक्षण मरहम माफिक काम करेगा।

तीन लाख के करीब मुस्लिम वोटर हैं जो अंत तक पत्ते नहीं खोलते कि किसके पक्ष में जाएंगे। डेढ़ लाख के करीब यादव वोटर हैं जो सपा का बेस वोट माना जाता है। इसके अलावा भूमिहार 1 लाख 25 हज़ार, ठाकुर 1 लाख, पटेल 2 लाख, चौरसिया 80 हज़ार, दलित 80 हज़ार और अन्य पिछड़ी जातियां 70 हज़ार हैं।

जातीय समीकरण ने साथ दिया तो प्रियंका गांधी मोदी को टक्कर दे सकती हैं। जातिगत समीकरणों को आधार बनाकर नतीजे पर तो नहीं पहुंचा जा सकता पर एक अनुमान लगाया जा सकता है कि पलड़ा किसकी ओर झुकेगा। प्रियंका का तेवर आजकल एकदम अलग है। वह अपनी जिम्मेदारियों बखूबी निभा रही हैं। पीएम मोदी और भाजपा की नीतियों की खामिया बताकर वह आमजनता से कांग्रेस को वोट देने की बात कह रही हैं।

नोटबंदी, जीएसटी और किसानों की आत्महत्या को उन्होंने अपना प्रमुख हथियार बनाया है। उनके चुनाव लड़ने के फैसले में अभी सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं। कांग्रेस महासचिव के चुनाव लड़ने का फैसला कांग्रेस आलाकमान के हाथों में है वह ही तय करेगा कि वह चुनाव लड़ेगी या सिर्फ पार्टी के समर्थन में प्रचार ही करेंगी।

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