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lok Sabha Elections 2019 : क्या लोकसभा चुनाव से पहले जातियों को साथ रहे सियासी दल

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों के साथ सभी राजनीतिक दल अपने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी सियासी दल जातीय आधार पर उम्मीदवारों का चनय कर रहे हैं। हमेशा से ही राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति करते हुए हैं और इस बार भी हर दल जातीय आधार पर वोट बैंक की राजनीति करना चाहता है।

lok Sabha Elections 2019 : क्या लोकसभा चुनाव से पहले जातियों को साथ रहे सियासी दल
लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) की तारीखों के साथ सभी राजनीतिक दल (Political Party) अपने अपने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी कर रहे हैं। हर बार की तरह इस बार भी सियासी दल जातीय आधार पर उम्मीदवारों का चनय कर रहे हैं। हमेशा से ही राजनीतिक दल वोट बैंक (Vote Bank) की राजनीति करते हुए हैं और इस बार भी हर दल जातीय आधार पर वोट बैंक की राजनीति करना चाहता है।

राजनीतिक दल का वोटबैंक गठबंधन

भाजपा (BJP) से लेकर कांग्रेस (Congress), सपा (SP), बसपा(BSP), टीएमसी(TMC), सीपीआई(CPI), सीपीएम (CPM) जैसे कई दिग्गज पार्टियां 2019 के चुनाव से पहले हर जातीय के लोगों को ध्यान में रख कर वोट बैंक करती है। सभी पार्टियां राजनीतिक दल गठबंधन के साथ पिछड़े वर्ग, दलित और मुसलमान, ओबीसी वर्ग को ध्यान में रखकर ही गठजोड़ की राजनीति करते हैं। हमेशा से ही यूपी में दलित, जाट, मुसलमान और यादव वोट बैंक चुनावों में अहम भूमिता निभाते आए हैं।

भाजपा का सवर्णों वोट बैंक

लेकिन इस बार केंद्र की मोदी सरकार ने चुनाव से पहले अगड़ी जाति यानी सवर्णों को आर्थिक और शिक्षा के आधार पर 10 फीसदी का आरक्षण दिया। जिससे वोटबैंक की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे नहीं है कि भाजपा ने भी जाति के वोटबैंक की राजनीति की इससे पहले भी कई दलों ने वोटबैंक ध्यान में रखकर उसको सौगातें दी हैं। इससे पहले साल 1996 में बीजेपी औ बहुजन समाज पार्टी एक साथ आई थी। जिसे वोटबैंक गठबंधन के तौर पर देखा गया।

भाजपा की यूपी पर नजर, सपा-बसपा एक साथ

अगर यूपी के वोटबैंक की बात करें तो यूपी ओबीसी का एक बड़ा वर्ग है। जो सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। वहीं यादव को छोड़कर अन्य पिछड़ी जातियां कहीं अलग खड़ी नजर आती हैं। यूपी में 80 लोकसभा सीटें हो जिसमें साढ़े आठ लाख के आसपास यादव ओबीसी वर्ग है। इसमें से जिसके पाले में ज्यादा सीटें आती है वो यूपी जैसे सबसे ज्यादा सीट वाले राज्य से सरकार बनाने में कामयाब होता है।
साल 2014 के चुनाव में भाजपा ने सबसे ज्यादा सीटें उत्तर प्रदेश से जीती थी। इस दौरान चुनाव में मिली जीत में पिछड़ों को बड़ा योगदान रहा था। बीजेपी गठबंधन को यहां 80 में से 73 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। एक तरफ से मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने का पूरा दारोमदार योगी के कंधों पर है। ऐसे में एक बार फिर भाजपा यूपी समेत सभी राज्यों में एनडीए गठबंधन के दौरान जातीय वोटबैंक का ध्यान रखेगी।
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