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लोकसभा चुनाव 2019 : चुनावी जंग में पीएम मोदी नंबर वन

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 की तारीख (Lok Sabha Elections 2019 Date) के ऐलान के साथ ही चुनावी सरगर्मियों में तेजी आ गई है।

लोकसभा चुनाव 2019 : चुनावी जंग में पीएम मोदी नंबर वन

भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा चुनाव 2019 की तारीख (Lok Sabha Elections 2019 Date) के ऐलान के साथ ही चुनावी सरगर्मियों में तेजी आ गई है। राजनीतिक दलों ने प्रत्याशियों के चयन और नामों की घोषणा शुरू कर दी है। चुनावी बिसात बिछने लगी है और एक दूसरे के खिलाफ तीखे आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गए हैं। सियासत के नए समीकरण बन रहे हैं और सभी सियासी दल अपने फायदे को देखकर गठबंधन कर अपनी ताकत बढ़ाने में जुटे हैं।

एनडीए अपने करिश्माई नेता नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा। मोदी विरोधी दलों में राहुल गांधी के नाम पर अभी सर्वसम्मति नहीं बनी है। यूपी में बने महागठबंधन ने पीएम ने नाम पर अपने पत्ते नहीं खोले हैं। यही हाल ममता बनर्जी का है। ऐसे में कहा जा सकता है कि पीएम के नाम पर मोदी के खिलाफ एकजुटता नहीं बन पाई है।

लोकसभा चुनाव में विपक्ष में एका नहीं होने के कारण अधिकांश राज्यों में चौतरफा चुनावी संघर्ष की संभावना बलवती हो गई है। राजनीतिक हालातों को देखते हुए उत्तर प्रदेश, आंध्र, प़ बंगाल, दिल्ली, हरियाणा, उड़ीसा, पंजाब, तेलंगाना और केरल जैसे राज्यों में जहां लोकसभा की 200 से अधिक सीटें है बहुकोणीय मुकाबले के आसार है। वहीं गुजरात, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, कर्णाटक, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, तमिलनाडु, हिमाचल और राजस्थान में में सीधा मुकाबला है।

देश के सब से बड़े और 80 सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा के खिलाफ समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और लोकदल ने महागठबंधन बना कर चुनौती दी है। इस महागठबंधन में कांग्रेस को शामिल नहीं किया है जिससे क्षुब्ध होकर कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ राजनीति में उतारकर ब्रम्हास्त्र चला दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि फ्रंटफुट पर खेलेगी।

दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी से अलग होकर मुलायम सिंह के भाई शिवपाल सिंह कुछ छोटे दलों को जोड़कर चुनावी महासमर को बनाने का प्रयास कर रहे है। पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 80 में से 73 सीटें जीतकर न केवल विरोधियों का सफाया किया अपितु सत्ता के सिंहासन तक पहुंचने में सफलता हासिल की थी। सीटों के हिसाब से देश के दूसरे सबसे बड़े राज्य महाराष्ट्र में लोकसभा की 48 सीटें है।

यहां भाजपा और शिवसेना गठजोड़ का कांग्रेस और एनसीपी से लगभग सीधा मुकाबला है। पिछले चुनाव में एनडीए ने यहां 41 सीटों पर कब्जा कर सबको चौंका दिया था। तीसरे और चैचौथे बड़े राज्य आंध्र प्रदेश और प़ बंगाल में भी विपक्ष महागठबंधन बनाने में सफल नहीं हुआ है। आंध्र में कांग्रेस, टीआरएस और टीडीपी तीनों ने अलग अलग राह पकड़ी है।

42 सीटों वाले इस राज्य में पिछले चुनाव में भाजपा को तीन, टीडीपी को 16, टीआरएस को 11 और कांग्रेस को 3 सीटें मिली थी। यहां भी बहुकोणीय संघर्ष की संभावना है। चौथा बड़ा राज्य प़ बंगाल है जहां भी लोकसभा की 42 सीटें है। पिछले चुनाव में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस ने 34 सीटें प्राप्त कर अपना दबदबा कायम किया था। इस चुनाव में ममता की पार्टी को कांग्रेस, सीपीएम और भाजपा से मुकाबला करना होगा। यहां भी बहुकोणीय संघर्ष होने की संभावना है।

इसके बाद तमिलनाडु में 39 और कर्णाटक में 28 सीटें है। पिछले चुनाव में जय ललिता की अन्ना द्रमुक ने 37 सीटें प्राप्त कर विरोधियों का सूफड़ा साफ कर दिया था। जय ललिता की मृत्यु के बाद अन्ना द्रमुक ने भाजपा से गठजोड़ कर अपने विरोधी डीएमके और कांग्रेस को सीधी चुनौती दी है। कर्णाटक में कांग्रेस और देवेगौड़ा की पार्टी ने मिलकर चुनाव लड़ने का फैसला किया है। गत चुनाव में यहां भाजपा ने 17 सीटें हासिल की थीं।

गुजरात, मध्यप्रदेश, छतीसगढ़, हिमाचल और राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस में सीधा मुकाबला है। पिछले चुनाव में गुजरात की सभी 26, हिमाचल की चार, उत्तराखंड की पांचों और राजस्थान की सभी 25 सीटों सहित दिल्ली की सभी सातों सीटें भाजपा को मिली थी। बिहार में 40 सीटें है। यहां जेल में बंद लालू यादव के राष्ट्रीय जनता दल के नेतृत्व में महागठबंधन बना है जिसका भाजपा, नीतीश और पासवान की पार्टी से सीधा मुकाबला है।

पिछले चुनाव में एनडीए ने 31 सीटें जीत कर विरोधियों को धूल चटा दी थी। पूर्वोत्तर सहित देश के अन्य राज्यों यथा उड़ीसा, पंजाब, केरल, तेलंगाना आदि में कहीं सीधा तो कहीं बहुकोणीय मुकाबला है।

पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 30 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए अपने दम पर बहुमत हासिल कर लिया था। एनडीए को कुल 337 सीटों पर जीत मिली। इनमें भाजपा को अकेले 282 सीटें मिली जबकि कांग्रेस को 45 पर संतोष करना पड़ा। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी भी कुछ खास नहीं कर पाई है। आप को भी सिर्फ चार सीटों पर संतोष करना पड़ा था।

पिछले चुनाव में जबरदस्त मोदी लहर के चलते भाजपा ने बहुमत हासिल कर लिया था। इस बार मुकाबला चुनौतीपूर्ण है विशेषकर हिंदी पट्टी के राज्यों में जहां भाजपा को भारी बहुमत मिला था। यूपी में एक दूसरे की कट्टर विरोधी सपा और बसपा ने आपस में हाथ मिलाकर भाजपा के समक्ष संकट खड़ा कर दिया है। कांग्रेस ने यहां गठबंधन में स्थान नहीं मिलने से प्रियंका गांधी को मैदान में उत्तार दिया।

जिससे बहुकोणीय संघर्ष के हालत उत्पन्न हो गए हैं। जिसका फायदा उठाने के लिए भाजपा उतावली हो रही है। वहीं पुलवामा में हुए आतंकी हमले और एयर स्ट्राइक से उत्पन्न राष्ट्र प्रेम के जज्बे को अपने पक्ष में भुनाने के लिए भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी पार्टियों ने एयर स्ट्राइक पर सवाल उठाकर भाजपा को घेरना शुरू कर दिया है। चुनाव भाजपा और विपक्ष के लिए महासमर से कम नहीं होगा।

भाजपा ने मोदी है तो मुमकिन है का नारा दिया है तो विपक्ष मोदी की नाकामियों को गिनाकर मतदाताओं को अपने पक्ष में करने का प्रयास कर रहा है। दोनों ही पक्ष एक दूसरे पर देश को गिरवी रखने का आरोप लगा कर सियासत को गरमाए हुए है। आतंकवादी हमले के बाद विकास, गरीबी, किसानी, रोजगार, आर्थिक बदहाली, महंगाई, भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य जैसे मुद्दे बाहर हो गए है।

बीजेपी अपनी चुनावी रणनीति बदलकर पूरा फोकस राष्ट्रवाद के मुद्दे पर करने जा रही है। लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार अपने अगले कार्यकाल को वापस पाने की कोशिशों में जुटी है वहीं विपक्षी दल इस चुनाव को अपने लिए बहुत बड़ा मौका मानकर चल रहे हैं। चुनाव परिणाम किसके पक्ष में जाते हैं ये तो भविष्य के गर्भ में हैं। कई एजेंसियों और चैनलों के सर्वे मिले जुले परिणाम सामने आ रहे है। मगर एक बात बिलकुल साफ है प्रधानमंत्री के रूप में लोगों की पहली पसंद आज भी मोदी ही हैं।

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