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लोकसभा चुनाव 2019 : राफेल जैसे मुद्दे पर अपनी कमियां छुपाती मोदी सरकार

लोकसभा चुनाव की तारीखों का शंकनाद हो चुका है। ऐसे में पक्ष विपक्ष के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो गई है। ऐसे में मोदी सरकार के लिए राफेल विमान सौदे को लेकर कांग्रेस की तरफ से मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल जारी है।

लोकसभा चुनाव 2019 : राफेल जैसे मुद्दे पर अपनी कमियां छुपाती मोदी सरकार
लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) की तारीखों का शंकनाद हो चुका है। ऐसे में पक्ष विपक्ष के बीच जुबानी जंग भी शुरू हो गई है। ऐसे में मोदी सरकार (Modi Govt) के लिए राफेल विमान सौदे (Rafale Fighter Deal) को लेकर कांग्रेस (Congress) की तरफ से मोदी सरकार के खिलाफ हल्ला बोल जारी है।
राफेल विमान सौदे में कथित गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। ऐसे में इसी सरकार की कमी के तौर पर देखा जा रहा है। हाल ही में सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राफेल डील से जुड़ी फाइल मंत्रालय से गायब हो गई है। बीते दिनों अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा कि सीएजी रिपोर्ट के शुरुआती तीन पन्ने कोर्ट में जमा नहीं किए हैं तो वहीं कागजात लीक करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए बोला है। फिलहाल मामला कोर्ट में सुरक्षित है।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट में राफेल डील पर मोदी सरकार के हक में फैसला आ चुका है। फ्रांस से अरबों रुपये में 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए हुए सौदे की जांच को लेकर कोर्ट में कई बार याचिका दायर की जा चुकी है।
लेकिन कोर्ट ने कई याचिकाओं को खारिज कर दिया। बता दें कि प्रधानमंत्री की फ्रांस की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच राफेल को लेकर नई डील हुई। ऐसे में सरकार ने पुरानी डील में तकनीकी खराबियों के चलते रद्द करना का कारण बताया।
23 सितंबर 2016 को राफेल डील पर भारत और फ्रांस के बीच करार हुआ। जिसे इंटरगवर्नमेंटल एग्रीमेंट कहा गया। सरकार ने कहा कि इस डीम में 2013 के सभी नियमों का पाल किया गया। दसॉल्ट एविएशन की सालाना रिपोर्ट के आधार पर कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार ने फ्रांस के साथ 36 राफेल विमानों का सौदा 7.5 बिलियन यूरो में किया गया था। लेकिन समय समय पर विपक्ष की तरफ से हर बार सवाल पुछे गए कि आखिर एचएएल को छोड़ अनिल अंबानी की कंपनी को कॉन्ट्रेक्स क्यों दिया गया और राफेल की पूरी किमत क्या है।
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