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लोकसभा चुनाव 2019: क्या प्रियंका को लाने में कांग्रेस ने देर कर दी है?

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) का इंतजार हर दल कर रहा था। सभी समीकरण समान रूप से चल रहे थे, लेकिन 23 जनवरी 2019 को प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) की एंट्री ने सभी समीकरण बदल कर रख दिए। यह एंट्री चौंकाने वाली थी। प्रियंका गांधी को लोकसभा चुनाव 2019 के अंतर्गत पूर्वी उत्तर प्रदेश का महासचिव बनाया गया है। लेकिन प्रियंका को मैदान में उतारने से कई सवाल भी उठ खड़े हुए। प्रियंका के मैदान में आते ही सबसे पहले यह सवाल उठा कि क्या राहुल गांधी के बल पर कांग्रेस चुनाव नहीं लड़ सकती। और दूसरा सवाल था कि क्या प्रियंका गांधी को मैदान में उतारने में कांग्रेस ने देर कर दी है? लोगों ने इस पर अपनी राय रखी।

लोकसभा चुनाव 2019: क्या प्रियंका को लाने में कांग्रेस ने देर कर दी है?

लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) का इंतजार हर दल कर रहा था। सभी समीकरण समान रूप से चल रहे थे, लेकिन 23 जनवरी 2019 को प्रियंका गांधी (Priyanka Gandhi) की एंट्री ने सभी समीकरण बदल कर रख दिए। यह एंट्री चौंकाने वाली थी। प्रियंका गांधी को लोकसभा चुनाव 2019 के अंतर्गत पूर्वी उत्तर प्रदेश का महासचिव बनाया गया है।

लेकिन प्रियंका को मैदान में उतारने से कई सवाल भी उठ खड़े हुए। प्रियंका के मैदान में आते ही सबसे पहले यह सवाल उठा कि क्या राहुल गांधी के बल पर कांग्रेस चुनाव नहीं लड़ सकती। और दूसरा सवाल था कि क्या प्रियंका गांधी को मैदान में उतारने में कांग्रेस ने देर कर दी है? लोगों ने इस पर अपनी राय रखी।

लोगों का मानना है कि प्रियंका की एंट्री बेहद सही मौके पर हुई है। इसके कई कारण हैं। पहला कारण यह है कि आम चुनाव 2019 बेहद खास है। 2014 में भाजपा ने बहुत बड़ी जीत हासिल करके सरकार बनाई थी। कहीं यह फिर से न हो जाए इसके लिए सभी राजनीतिक दल गठबंधन करके भाजपा को हराना चाहते हैं।

उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा ने गठबंधन किया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा सुप्रीमो मायावती ने शुरुआत में ही साफ कर दिया था कि गठबंधन में कांग्रेस नहीं है। जिसके बाद कांग्रेस पूरी तरह अलग-थलग पड़ गई। इस लिहाज से कांग्रेस ने प्रियंका गांधी को लोकसभा चुनाव में उतारने में देर नहीं की है।

वहीं लोगों का एक मानना यह भी है कि कांग्रेस कार्यकर्ता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को बस उनके अध्यक्ष होने के नाते ही थोड़ा गंभीरता से लेते हैं, नहीं तो उनमें यह ताकत नहीं है कि कार्यकर्ताओं को साध कर रख सखें। अगर हाल ही में राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत पर बात करें तो उनकी यह जीत एक तरह से एंटी इनकंबेंसी का भी नतीजा रही है।

न कि राहुल गांधी के करिश्माई चेहरे का। अगर कांग्रेस यह चुनाव हार जाती तब कांग्रेस के ही कार्यकर्ता कहते कि 'कांग्रेस की यही पुकार, प्रियंका गांधी अबकी बार'। लेकिन किस्मत से कांग्रेस यह चुनाव जीत गई है।

प्रियंका गांधी को पूर्वांचल का महासचिव बनाया गया है। जिसमें योगी आदित्यनाथ का गोरखपुर और पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी आता है। इस लिहाज से प्रियंका गांधी का मैदान में उतरना बेहद खास है। कांग्रेस के केवल इतना कहते हैं, 'देर आए दुरुस्त आए'।

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