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लोकसभा चुनाव 2019 : मीडिया पर चुनाव आयोग की 24 घंटे नजर, 4 अलग-अलग शिफ्टों में कर्मचारी दिनरात ड्यूटी पर लगे

चुनाव आयोग के निर्देश पर इस चुनाव में मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके लिए बनाए गए मीडिया सेल में प्रिंट, इलेक्ट्रानिक व सोशल मीडिया सके माध्यम से आ रही चुनावी खबरें व विज्ञापन पर लगातार नजर रखी जा रही है।

लोकसभा चुनाव 2019 : मीडिया पर चुनाव आयोग की 24 घंटे नजर, 4 अलग-अलग शिफ्टों में कर्मचारी दिनरात ड्यूटी पर लगे

चुनाव आयोग के निर्देश पर इस चुनाव में मीडिया पर निगरानी बढ़ा दी गई है। इसके लिए बनाए गए मीडिया सेल में प्रिंट, इलेक्ट्रानिक व सोशल मीडिया सके माध्यम से आ रही चुनावी खबरें व विज्ञापन पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसके लिए 4 अलग-अलग शिफ्टों में करीब आधा सैकड़ा कर्मचारियों की 24 घंटे ड्यूटी लगाई गई है। उनके द्वारा अपनी रिपोर्ट नियमित रूप से चुनाव आयोग को भेजी जा रही है।

चुनाव आयोग के निर्देश पर सभी राजनीतिक दलों व प्रत्याशियों को अपने चुनाव खर्च की जानकारी देना अनिवार्य है। चुनाव प्रचार के दौरान टेलीविजन चैनलों, रेडियो, सिनेमा, ई पेपर में प्रचार प्रसार के लिए जिलास्तरीय मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति से अनुमति लेना जरूरी है। इसके लिए इन माध्यमों द्वारा आ रही खबरों व विज्ञापनों की सतत निगरानी की जा रही है।

इसके लिए जिलास्तर पर बनाए गए सेल में प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रानिक मीडिया व सोशल मीडिया की निगरानी के लिए अलग-अलग टीमें बनाई गई हैं। इसमें जनसंपर्क विभाग, चिप्स, पत्रकारिता महाविद्यालय के प्राध्यापकों व विद्यार्थियों के साथ इंटरनेट के जानकारों की ड्यूटी लगाई गई है। इन टीमों द्वारा मीडिया में आ रही खबरों व विज्ञापनों की रिपोर्ट भी तैयार की जा रही है।

इसका परीक्षण भी किया जा रहा है। प्रिंट व इलेक्ट्रानिक मीडिया के विज्ञापनों का खर्च निर्धारित दर के आधार पर जोड़ा जाएगा। वहीं पैड न्यूज होने की स्थिति में उसका खर्च भी संबंधित प्रत्याशी के चुनावी खर्च में जोड़ा जाएगा। मीडिया सेल में इसकी भी निगरानी की जा रही है कि चुनाव प्रचार के लिए उपयोग हो रहे होर्डिंस, पोस्टर व पर्चे में प्रकाशक व प्रिंटर के नाम पता के साथ पोस्टर पंपलेट व फ्लैक्स की संख्या का उल्लेख है अथवा नहीं। ऐसा नहीं होने पर प्रत्याशी से जवाब तलब किया जाएगा।

फेसबुक व वाट्सएप की दर तय नहीं

मीडिया प्रमाणन एवं अनुवीक्षण समिति द्वारा फेसबुक व वाट्सएप पर चल रही चुनावी खबरों व विज्ञापनों पर तो नजर रखी जा रही है, उसका बाकायदा रिकार्ड भी तैयार किया जा रहा है, लेकिन सोशल मीडिया के इन माध्यमों के प्रचार प्रसार को लेकर कोई दर तय नहीं है। इन माध्यमों से प्रचार पर किए गए खर्च की जानकारी प्रत्याशियों से ही ली जाएगी और उसे उनके खर्च में जोड़ा जाएगा।

चार पालियों में कर रहे ड्यूटी

मीडिया सेल में प्रिंट, इलेक्ट्रानिक व सोशल मिडिया पर निगरानी के लिए अलग-अलग सेल बनाए गए हैं, जहां कर्मचारियों की 6-6 घंटे की ड्यूटी लगाई जा रही है। चार अलग-अलग पालियों में करीब आधा सैकड़ा लोग यहां ड्यूटी कर रहे हैं। मतदान दिवस तक यह निगरानी जारी रहेगी।

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