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रण-भूमि 2019 : दिल्ली में 299 दल की राजनीति, होगा त्रिकोणीय मुकाबला

राजधानी में लोकसभा की सात सीटें हैं, लेकिन यहां 299 दल राजनीति करते हैं। चुनाव आयोग में पंजीकृत अधिकांश दल लोकसभा और विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते हैं।

रण-भूमि 2019 : दिल्ली में 299 दल की राजनीति, होगा त्रिकोणीय मुकाबला

राजधानी में लोकसभा की सात सीटें हैं, लेकिन यहां 299 दल राजनीति करते हैं। चुनाव आयोग में पंजीकृत अधिकांश दल लोकसभा और विधानसभा चुनाव नहीं लड़ते हैं। मुख्य मुकाबला भाजपा, ‘आप' और कांग्रेस के बीच है। लेकिन, दिल्ली में सात राष्ट्रीय और एक क्षेत्रीय दल के साथ 299 दल पंजीकृत हैं। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनावों के दौरान दिल्ली लोकसभा चुनावों में पांच राष्ट्रीय दलों ने शिरकत की थी। जबकि, दिल्ली में सात राष्ट्रीय पार्टियां पंजीकृत हैं। एकमात्र क्षेत्रीय पार्टी ने भी चुनाव में हिस्सा लिया था। बड़ी संख्या में राजधानी में दलों को पंजीकृत कराया गया है, लेकिन ये दल लोकतंत्र की लड़ाई से खुद को दूर ही रखते हैं। निकाय चुनाव, लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अधिकांश पंजीकृत दल हिस्सा नहीं लेते। 1951 में हुए पहले लोकसभा चुनावों में केवल छह दलों ने राजधानी के चुनावों में हिस्सा लिया था। तब चार लोकसभा सीटों के लिए 23 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

मुख्य बातें

1996 के लोकसभा चुनावों में रिकॉर्ड पचास दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे थे

दिल्ली में कुल पंजीकृत दलों में महज सात राष्ट्रीय दल हैं

एक क्षेत्रीय और शेष 291 स्थानीय दल पंजीकृत हैं आयोग में

1957 में पांच दल मैदान में उतरे

1957 के चुनावों में पांच दल ही चुनाव मैदान में उतरे। तब राजधानी में तीस उम्मीदवार थे। वर्ष 1962 के आम चुनाव में भी मात्र पांच दलों ने ही चुनाव लड़ा। इस चुनाव में प्रत्याशियों की संख्या भी घट गई। 28 उम्मीदवारों ने उस लोकसभा चुनाव में हिस्सा लिया था।

90 के दशक से बढ़ते गए उम्मीदवार

नब्बे के दशक में सबसे ज्यादा उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरे। 1991 के आम चुनाव में 36 पंजीकृत दलों ने चुनाव में हिस्सा लिया। इस चुनाव में 502 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमे से 399 आजाद उम्मीदवार के तौर पर थे। इसके बाद तेजी से उम्मीदवारों की संख्या बढ़ती गई।

1996 के चुनाव में 523 प्रत्याशी मैदान में उतरे

1996 के लोकसभा चुनावों में रिकॉर्ड पचास दलों ने अपने उम्मीदवार उतारे। उस चुनाव में 523 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे। इसके बाद 1998 के लोकसभा चुनावों में 35 चुनाव आयोग में पंजीकृत दलों ने हिस्सा लिया। उम्मीदवारों की संख्या भी घटकर 132

रह गई।

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