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लोकसभा चुनावः पिछले तीन दशकों में वोट को सीट में बदलने में विफल रहे ये प्रमुख दल

पिछले तीन दशकों में कई बार ऐसे भी मौके आए जब अधिक वोट प्रतिशत प्राप्त करने वाले दल को विपक्ष में बैठना पड़ा और कम वोट हिस्सेदारी वाले दल सरकार बनाने में सफल रहे।

लोकसभा चुनावः पिछले तीन दशकों में वोट को सीट में बदलने में विफल रहे ये प्रमुख दल

पिछले तीन दशकों में कई बार ऐसे भी मौके आए जब अधिक वोट प्रतिशत प्राप्त करने वाले दल को विपक्ष में बैठना पड़ा और कम वोट हिस्सेदारी वाले दल सरकार बनाने में सफल रहे।

साल 1989 के लोकसभा चुनाव में 39.5 प्रतिशत वोट प्रतिशत प्राप्त करने वाली कांग्रेस सरकार नहीं बना पायी थी जबकि 2014 में 31 प्रतिशत के वोट प्रतिशत के साथ भाजपा ने बहुमत की सरकार बनाई।

1989, 1996, 1998 और 1999 के लोकसभा चुनाव इसके सबसे बड़े उदाहरण रहे जब खासा वोट प्रतिशत हासिल करने वाली पार्टी सत्ता से बाहर रही। 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को 39.53 प्रतिशत वोट मिले और वह 197 सीट जीतने के बावजूद सरकार नहीं बना पायी थी । तब 17.8% वोट हासिल करने वाले जनता दल के नेतृत्व में सरकार बनी थी।

1996 में भी करीब 8% वोट हासिल करने वाले जनता दल की अगुवाई में संयुक्त मोर्चे की सरकार बनी, जबकि 20% वोट हिस्सेदारी वाली भाजपा बहुमत नहीं जुटा पाई और अटल बिहारी वाजपेयी को 13 दिन में इस्तीफा देना पड़ा था।

1998 के चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 25.59 रहा और उसने 182 सीटों के साथ गठबंधन सरकार बनाई। इस बार भी कांग्रेस को भाजपा से अधिक, 26.14 प्रतिशत वोट मिले लेकिन वह सरकार नहीं बना पायी थी।

1999 के लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत 23.75 था। उसे 182 सीटें मिलीं और उसने गठबंधन सरकार बनाई। इस चुनाव में कांग्रेस को भाजपा से करीब साढे़ चार प्रतिशत अधिक वोट हिस्सेदारी यानि 28.30 प्रतिशत वोट मिले और 114 सीटें प्राप्त कर वह सरकार नहीं बना पायी।

हालांकि 1989 के चुनाव से पहले, 1977 में जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी थी जिसमें जनसंघ सहित दलों का संयोग था।

लोकसभा चुनाव परिणामों पर गौर करें तो 1951 में कांग्रेस ने 44.99 प्रतिशत वोट के आधार पर 489 सीटों में से 364 सीटें जीती थीं। 1957 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 47.78 प्रतिशत वोट के साथ 494 में से 371 सीट जीतने में सफल रही।

1962 में कांग्रेस ने 44.72 प्रतिशत वोट हिस्सेदारी के आधार पर 494 सीटों में से 361 सीटें जीती। 1967 में वह 40.78 प्रतिशत वोट प्राप्त कर 283 सीट जीतने में सफल रही।

1971 में कांग्रेस 43.68 प्रतिशत वोट हिस्सेदारी के आधार पर 518 में से 352 सीट जीत कर सत्ता में आई थी। वहीं 1977 में जनता पार्टी की सरकार 41.32 प्रतिशत वोट के आधार पर बनी थी। 1980 में कांग्रेस 42.69 प्रतिशत वोट प्राप्त करके 529 में से 353 सीट जीत कर सत्ता में आई।

1984 में कांग्रेस 49.10 प्रतिशत वोट के आधार पर 404 सीटें जीत पर सत्ता में आई। 2014 में भाजपा ने 31 प्रतिशत वोट हिस्सेदारी के आधार पर 282 सीटें जीतीं और उसकी अगुवाई में सरकार बनी।

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