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बिहारः 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले क्या पासवान हुए मैदान से बाहर?

2019 के लोक सभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। अमित शाह बिहार में एनडीए की सीटों को लेकर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वह नीतीश कुमार के साथ लोकसभा चुनाव में बराबर की सीटों पर चुनाव लड़ेगे।

बिहारः 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले क्या पासवान हुए मैदान से बाहर?
2019 के लोक सभा चुनाव के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। अमित शाह बिहार में एनडीए की सीटों को लेकर पहले ही घोषणा कर चुके हैं कि वह नीतीश कुमार के साथ लोकसभा चुनाव में बराबर की सीटों पर चुनाव लड़ेगे।
वहीं दूसरी ओर अमित शाह की घोषणा के बाद RLSP के मुखिया और कैबिनेट मंत्री उपेंद्र कुशवाह ने तेजस्वी यादव से अरवल में मुलाकात की। उपेंद्र कुशवाहा सोमवार को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात करके बिहार में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत करेंगे।

रामविलास पासवान ने की 7 सीटों की माँग

अमित शाह और नीतीश कुमार में हुए सीटों के बंटबारे को लेकर सभी राजनैतिक दलों में हलचल देखने को मिल रहीं है। सबसे ज्यादा लोजपा में। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो लोजपा के नेता रामविलास पासवान 7 सीटों पर अड़े हैं। वहीं बीजेपी पासवान को इतनी सीटें देने को तैयार नहीं है। उन्हें ज्यादा से ज्यादा 5 सीटें ही मिल सकती हैं।
खबर ये है कि अपनी खराब सेहत के चलते रामविलास पासवान लोकसभा चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं, ऐसे में पासवान ने अपनी दिलचस्पी राज्यसभा के लिए दिखाई है। राजनीति से जुड़े लोग मानते हैं कि अगर वो राज्यसभा सांसद बनना चाहते हैं तो उन्हें भाजपा के साथ सीटों का समझौता करना पड़ सकता है।
वहीं रामविलास के बेटे चिराग पासवान ने कहा है कि उनकी पार्टी एनडीए गठबंधन को मजबूत करने में लगी है। वहीं इस मामले पर बिहार लोजपा अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस खुलेआम कह चुके हैं कि अगर 7 सीटों से कम मिली तो वह गठबंधन तोड़ देंगे। यह जिद एनडीए में खटास ला सकती है।
अगर उपेंद्र कुशवाहा एनडीए में ही बने रहते हैं तो भाजपा के खाते में 16 सीट, JDU के खाते में 16 सीट, लोजपा के खाते में 5 सीट, RLSP के खाते में दो और RLSP से निलंबित अरुण कुमार को 1 सीट मिल सकती है।

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लेकिन लंबे समय से चली आ रही उपेंद्र कुशवाहा की नाराजगी लगातार चर्चा में है। शुक्रवार को तेजस्वी यादव से मुलाकात के बाद अटकलें लगाई जा रही हैं कि कुशवाहा की पार्टी एनडीए से अलग हो जाएगी।
सूत्रों का कहना है कि अगर ऐसा होता भी है तो उपेंद्र को मिलने वाली 2 सीट लोजपा को न मिलकर भाजपा और जेडीयू में बंट सकती है। उस हिसाब से जो भाजपा और जेडीयू 16-16 सीटों पर लड़ने वाली थी वो 17-17 सीटों पर लड़ेगी।
लेकिन रामविलास पासवान अगर राज्यसभा का सपना देख रहे हैं तो उन्हें सीटों से समझौता करना पड़ेगा।
पासवान बिहार से आठ बार सांसद रह चुके हैं। 2019 में वह हाजीपुर से चुनाव नहीं लड़ेंगे। सूत्रों का कहना है कि अगर बिहार में सीटों के बंटवारे में रामविलास अपनी सहमति भाजपा के साथ रखते हैं तो अप्रैल 2019 में भजपा उन्हें असम से राज्यसभा भेज सकती है।
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