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लोकसभा चुनाव 2019 : राजस्थान के रण में त्रिकोणीय संघर्ष, जानें किस करवट बैठेगा ऊंट

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत दर्ज कर पूरे राजस्थान में भगवा रंग फहरा दिया था।

लोकसभा चुनाव 2019 : राजस्थान के रण में त्रिकोणीय संघर्ष, जानें किस करवट बैठेगा ऊंट
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2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत दर्ज कर पूरे राजस्थान में भगवा रंग फहरा दिया था। लेकिन इस बार लोकसभा चुनाव में यहां से बहुजन समाज पार्टी चुनावी समीकरण बिगाड़ने की स्थिति में नजर आ रही है। क्योंिक बसपा ने अभी तक ज़िन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं वो चेहरे ऐसे हैं जो कुछ सीटों पर बीजेपी को तो कुछ सीटों पर कांग्रेस को परेशान कर सकते हैं। इस वजह से इस बार यहां त्रिकोणीय संघर्ष होने की पूरी संभावना है। बीएसपी के रणनीतिकारों को लोकसभा चुनाव में पहली बार राज्य से जीत की आस है।

राज्य की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय बसपा ने कुछ साल में उतार-चढ़ाव भी देखा है। लेकिन अभी तक लोकसभा में बीएसपी का राजस्थान से कोई सांसद नहीं चुना गया है। चुनाव की घोषणा के बाद 19 सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा करने वाले बीएसपी के 6 विधायक 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान जीतने में कामयाब हुए थे। माना जा रहा है कि लोकसभा चुनाव में बसपा की मौजूदगी से कांग्रेस और बीजेपी की टेंशन बढ़ सकती है।

जयपुर शहर में पूर्व आईएएस सालोदिया बिगाड़ेंगे कांग्रेस का खेल

जयपुर शहर से पूर्व आईएएस रहे उमराव सालोदिया मैदान में हैं। अनुसूचित जाति वर्ग से आने वाले सालोदिया ने सेवा में रहते हुए ही बाकायदा प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर इस्लाम कुबूल किया था। माना जा रहा है कि सालोदिया एससी और माइनॉरिटी के वोट ले सकते हैं। ऐसा हुआ तो कांग्रेस को ज्यादा नुकसान होगा। जोधपुर से आईपीएस रहे पंकज चौधरी की पत्नी मुकुल पंकज चौधरी को टिकट मिला है। अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाली चौधरी एससी वोटों में सेंध लगा सकती हैं।

इनसे भाजपा-कांग्रेस को नुकसान

  1. जालौर से उम्मीदवार भागीरथ बिश्नोई बीजेपी के परंपरागत वोटों में सेंध लगा सकते हैं।
  2. पाली उम्मीदवार शिवाराम मेघवाल एससी समुदाय से आते हैं और कांग्रेस की वोट बैंक पर नजरें गड़ाए हैं।
  3. चित्तौड़गढ़ से बीएसपी ने जगदीश शर्मा की मौजूदगी कांग्रेस-भाजपा दोनों को नुकसान पहुंचाएगी।
  4. कोटा से हरीश कुमार भी कोर वोट बैंक खींचने में कामयाब होने के बाद कांग्रेस को झटका दे सकते हैं।
  5. टोंक-सवाईमाधोपुर से लक्ष्मीकांत बैरवा की मौजूदगी नमोनारायण मीणा को परेशान कर रही है।
  6. बीकानेर से भैंराराम मेघवाल की मौजूदगी 3 मेघवाल के बीच मुकाबला रोचक बना रही है। वोट तो बंटेगें ही।
  7. चुरू से हरिसिंह चाहर जाट समाज से आते हैं। ऐसे में यहां बसपा बीजेपी को बड़ा नुकसान कर सकती है।

कांग्रेस के टिकट के दावेदार बीएसपी से लड़ रहे हैं चुनाव

करौली-धौलपुर से रामकुमार बैरवा बीएसपी के प्रत्याशी है। कांग्रेस के टिकट पर पूर्व प्रधान और ज़िला प्रमुख रहे बैरवा खुद कांग्रेस के लोकसभा टिकट दावेदार थे, लेकिन टिकट कटने के बाद वे बीएसपी में शामिल हो गए। यहां से बैरवा को टिकट नहीं मिलने से बैरवा समाज में भारी नाराज़गी है और यह नाराजगी कांग्रेस के संजय जाटव के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। बैरवा समाज का दावा है कि उन्हें रामकुमार बैरवा के रूप में एक विकल्प भी मिल गया है। वैसे विधानसभा चुनाव में भी बसपा करौली सीट जीत चुकी है। ऐसे में यहां पार्टी का जनाधार मजबूत दिख रहा है। इनके अलावा सीकर से सीता देवी भी चुनावी मैदान में उतरी हैं।

दो विधायक भी हैं

इन जिलों में है बीएसपी का प्रभाव

यूपी की राजनीति में सक्रिय बीएसपी का अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बहुल इलाकों में ज्यादा प्रभाव माना जाता है। प्रभाव वाले इलाकों की बात करें तो इसमें उत्तर प्रदेश से लगने वाले जिले भरतपुर और धौलपुर के साथ ही करौली, सवाईमाधोपुर, दौसा, जयपुर ग्रामीण, झुंझुनूं, अलवर सीट पर इसका असर है। विधानसभा चुनाव के दौरान झुंझुनूं और करौली ज़िले से बीएसपी के एक-एक विधायक जीते हैं। वहीं, अलवर और भरतपुर जिले से दो-दो विधायक चुनाव जीतने में कामयाब हुए हैं।

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