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भाजपा के ''निरहुआ'' की प्रशासन से अपील- पत्थरबाजों को छोड़ दें- वो मेरे भाई हैं, जानें क्या है पूरा मामला

''निरहुआ'' ने अपने रोड शो के दौरान पत्थर फेंकने वालो को खुद का भाई बताते हुए प्रशासन से अपील की है कि उन्हें छोड़ दिया जाए। निरहुआ ने कहा कि वो मेरे दुश्मन नहीं हैं उन्हें बहका कर पत्थरबाजी करवाई गई है।

भाजपा के
लोकसभा चुनाव 2019 के रण में आजमगढ़ सीट से उतरे दिनेश लाल यादव 'निरहुआ' ने अपने रोड शो के दौरान पत्थर फेंकने वालो को खुद का भाई बताते हुए प्रशासन से अपील की है कि उन्हें छोड़ दिया जाए। निरहुआ ने कहा कि वो मेरे दुश्मन नहीं हैं उन्हें बहका कर पत्थरबाजी करवाई गई है। पुलिस ने तीन नामजद व 53 अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया था।
आजमगढ़ में मीडिया से बात करते हुए निरहुआ ने कहा कि एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के हर बच्चों को कौशल विकास योजनाओं से सशक्त मजबूत बना रहे हैं तो वहीं विपक्षी पार्टियां बच्चों से मेरे रोड शो के दौरान पत्थरबाजी करवा रही हैं।
उनकी पत्थरबाजी से मै डरने वाला नहीं हूं। मैं जनता की सेवा करने आया हूं और इस काम को करके ही जाउंगा। साथ ही उन्होंने कहा कि अगर मैं उन पत्थर फेकने वालों के सामने चला जाउं तो वो गले लगा लेंगे।
गौरतलब है कि 8 अप्रैल को 'निरहुआ' ने आजमगढ़ में एक रोड शो किया था। रोड शो जब तरवां बाजार के उमरी पट्टी गांव के पास पहुंचा तो लोगों ने रोकने की कोशिश की और फिर पत्थरबाजी करने लगे।
साथ ही अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के समर्थन में नारे लगाने लगे। प्रशासन ने किसी तरफ बीच बचाव करते हुए रोड शो के काफिले को गांव के बाहर सुरक्षित निकाला था।
'निरहुआ' इन दिनों आजमगढ़ में चुनाव प्रचार करने में जुटे हैं। वह लोगों से कहते हैं कि मैं कहीं बाहर से नहीं आया हूं। बगल के जिले गाजीपुर से ही हूं। मेरी बहुत रिश्तेदारी यहीं है साथ ही मैंने ज्यादातर भोजपुरी फिल्मों की शूटिंग भी यहीं की है।
उन्होंने मुलायम सिंह पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आजमगढ़ की जनता ने ऐसे भी व्यक्ति को जिताकर संसद में पहुंचाया है जो चुनाव जीतने के बाद अपना प्रमाण पत्र तक लेने नहीं आए थे।
बता दें कि आजमगढ़ से गठबंधन प्रत्याशी के रूप में सपा प्रमुख अखिलेश यादव चुनावी मैदान में हैं। कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा है। वहीं भाजपा ने रमाकांत यादव की जगह इसबार दिनेश लाल यादव को मैदान में उतारा है।
मुस्लिम-यादव बहुल इस सीट पर सेहरा उसी के सिर बंधता आया है जिन्हें इनका समर्थन मिलते रहा है। इसबार ये वर्ग किसका समर्थन करेगा फिलहाल ये भविष्य के गर्भ में छिपा है।
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