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लोकसभा चुनाव 2019 : राफेल मुद्दा और मोदी सरकार, जानें कैसे शुरू हुआ राफेल पर विवाद

राफेल विवाद पर सियासी घमासान जारी है। कांग्रेस हर दिन राफेल डील को लेकर मोदी सरकार से सवाल पूछती है और केंद्र इसका जवाब भी देता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट से फैसला मिलने के बाद भी आरोप प्रतिरोप का दौरा जारी है।

लोकसभा चुनाव 2019 : राफेल मुद्दा और मोदी सरकार, जानें कैसे शुरू हुआ राफेल पर विवाद
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राफेल मुद्दा और मोदी सरकार
राफेल (Rafale) विवाद पर सियासी घमासान जारी है। कांग्रेस (Congress) हर दिन राफेल डील (Rafale Deal) को लेकर मोदी सरकार (Modi Govt) से सवाल पूछती है और केंद्र इसका जवाब भी देता है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से फैसला मिलने के बाद भी आरोप प्रतिरोप का दौरा जारी है। इस मामले पर कांग्रेस जहां जेपीसी जांच की मांग कर रही है तो वहीं केंद्र कह चुकी है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर सरकार की रिपोर्ट से संतुष्ट है। आए जानते हैं कि आखिर राफेल मुद्दा कैसे शुरू हुआ और क्या है यो मोदी सरकार का पीछा नहीं छोड़ रही है।

राफेल मुद्दा

राफेल एक फ्रांसी फाइटर विमान है। जिसे भारत सरकार भारतीय वायुसेना में शामिल करना चाहती है। ऐसे नहीं है कि कांग्रेस के वक्त इन विमानों को लाने के लिए डील नहीं हुई। भारत सरकार फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट विमान की खरीद रही है। जबकि कांग्रेस की यूपीए सरकार ने 136 विमान की डील का प्रस्ताव था।
कांग्रेस ने इस विमान की खबरी में अनिल अंबानी की कंपनी को कॉन्ट्रेंक देना और विमानों की कीमत इतनी ज्यादा कैसे हुई इसको लेकर भाजपा पर हमला कर कर रही है। राफेल विमान फ्रांस की डेसाल्ट कंपनी द्वारा बनाया गया 2 इंजन वाला लड़ाकू विमान है। बता दें कि राफेल एक मिनट में 60 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ सकता है। वहीं ये विमान अधिकतम भार उठा सरता है। अगर फ्यूल की बात करें तो 17,000 किलोग्राम क्षमता है। ह दो इंजन वाला फाइटर विमान है। इस विमान को फ्रांस ने तैयार किया है।
भारत और फ्रांस के बीच डसॉल्ट और अनिल अंबानी की कंपनी को विमान बनाने का कॉन्ट्रेक्ट मिला है। बता दें कि राफेल लड़ाकू विमानों को ओमनिरोल विमानों की श्रेणी में रखा गया है जो कि युद्ध की स्थिति में सबसे अहम भूमिका निभा सकते हैं। हवाई हमला, जमीनी, भारी हमला और परमाणु जैसे हमलों के निपटने के लिए ये विमान भारतीय सेना का सबसे पसंदीदा फाइटर विमान है। जानकारी के लिए बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2015 में फ्रांस के साथ 36 राफेल फाइटर विमानों की डील की थी। जिसके बाद से ही कांग्रेस भाजपा पर डील को लेकर आरोप लगा रही है।

मोदी सरकार

साल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा सत्ता में आई और यूपीए के बाद मोदी सरकार ने जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद यूपीए की राफेल डील में बदलाव किया गया और साल मार्च 2015 में फ्रांस दौरे के दौरान भारत और फ्रांस के बीच राफेल खरीदने के लेकर दोनों सरकारों के बीच करार हुआ। तत्कालीन रक्षामंत्री मनोहर पर्रिकर के कार्यकाल में राफेल खरीदने की प्रक्रिया हुई।
23 सितंबर 2016 को राफेल की खरीद के लिए फ्रांस के साथ इंटर गवर्नमेंटल एग्रीमेंट डील हुई। जिसमें 36 विमान खरीदने की डील हुई। जिसके बाद 136 से 36 विमान खरीदने के फैसले के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर राफेल डील में दलाली के आरोप लगाने शुरू कर दिया। कि आखिर मोदी सरकार ने 136 फाइटर विमानों को खरीदने की जगह 36 विमान क्यों खरीद रही है और एचएएल एविएशन को छोड़ अनिल अंबानी की कंपनी को विमान बनाने का कॉन्ट्रेंक क्यों दिया गया। आरोप के बीच यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा।
जहां सरकार ने सील बंद लिफाफे में राफेल डील से जुड़ी सभी जानकारियां कोर्ट को दीं। सरकार ने कोर्ट में कहा कि राफेल विमान खरीद में रक्षा खरीद प्रक्रिया-2013 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया गया। जिसके बाद कोर्ट में मोदी सरकार के हक में कोर्ट ने फैसला सुनाया। इसके बाद पीएम नरेंद मोदी ने भी समाचार एजेंसी एएनआई को दिए अपने इंटरव्यू में राफेल मुद्दे कहा कि राफेल पर सुप्रीम कोर्ट से फैसला आ चुका है।
राफेल डील के मामले को सुप्रीम कोर्ट भी साफ कर चुका है। दूध का दूध और पानी का पानी हो चुका है। आगे कहा कि कांग्रेस जो आरोप लगा रही है वो साबित करें। लेकिन अभी हाल ही में राफेल मामले पर हुई सुनवाई में रक्षा मंत्रालय से डील की फाइल चोरी हो गई। इस बाद की जानकारी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी। जिसके बाद कांग्रेस एक बार फिर मोदी सरकार के खिलाफ आक्रमक हो गई है।

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