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Lok Sabha Chunav 2019 : यूपी में मायावती-अखिलेश यादव के गठबंधन से महागठबंधन को मिलेगी मजबूती ?

उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Chunav 2019) को लेकर सींट बंटवारे पर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच नया फॉर्मूला बन गया है। भाजपा को हराने के लिए इस रणनीति पर काम कर रही है।

Lok Sabha Chunav 2019 : यूपी में मायावती-अखिलेश यादव के गठबंधन से महागठबंधन को मिलेगी मजबूती ?
Lok Sabha Chunav 2019 :
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) में लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) को लेकर सींट बंटवारे पर समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) के बीच नया फॉर्मूला बन गया है। इस बार उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) और बहुजन समाजवादी पार्टी की सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है। वहीं
भारतीय जनता पार्टी
(Bharatiya Janta Party) और कांग्रेस (Congress) ने सीट बंटवारे को लेकर कोई फॉर्मूला तय नहीं किया है। ऐसे में सपा और बसपा के एक साथ आने से भाजपा को झटका लगेगा तो वहीं कांग्रेस को भी थोड़ा झटका लगा है।

सपा-बसपा के बीच नया फॉर्मूला

मायवाती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच गठबंधन की 37-37 सीटों को लेकर सहमति बन गई है। ऐसे में दोनों ने कुल 74 सीटों पर एक साथ चुनाव लड़ने का फैसला किया है।

6 सीटें सहयोगी पार्टियों के लिए छोड़ी

वहीं दूसरी तरफ 6 सीटें सहयोगी दलों को भी देने की सहमति बनाई है। इसमें कांग्रेस, राष्ट्रीय लोकदल और ओपी राजभर की सुहेलदेव पार्टी के लिए छोड़ी है।

सपा-बसपा और गठबंधन

समाजवादी पार्टी और बहुजनसमाजवादी पार्टी के बीच आपसी गठबंधन हो गया हो लेकिन इन दोनों पार्टियों को अन्य छोटी पार्टियों के साथ भी राज्य की 80 सीटों पर फॉर्मूला तय करना है। इसको लेकर 15 जनवरी को गठबंधन पर अहम बैठक होगी और अंतिम फैसला वहीं लिया जाएगी।

माया-अखिलेश के एक-साथ आने के ये हैं मायने

1. 2014 के लोकसभा चुनाव के परिणाम को देखते हुए माया-अखिलेश ने इस बार एक साथ आने का फैसला किया है। पिछली बार भाजपा ने सेंध लगाते हुए 70 सीटों पर जीत हासिल की थी।
2. उत्तर प्रदेश की ये दोनों पार्टियां 37-37 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने जा रही है। लेकिन 15 जनवरी में अन्य गठबंधन दलों के साथ बैठक में अंतिम फैसला लिया जाएगा कि आखिर कैसे भाजपा को इस बार हाराया जा सके।
3. 15 जनवरी को यूपी में महागठबंधन को लेकर निषाद पार्टी और ओपी राजभर की सुहेलदेव जैसी छोटी पार्टियों को भी शामिल किए जाने की संभावना है। ताकि उनका वोट बैंक का भी सीधा फायदा इस महागठबंधन को हो। इस बार समाज के सभी समुदाय पर महागठबंधन की नजर है।
4. इस बार कांग्रेस के साथ यूपी में चुनाव ना लड़ने की वजह अलग है। पहली हाल की के मध्य प्रदेश चुनाव में अखिलेश के विधायक को मंत्री नहीं बनाए जाने से पार्टी नाराज है तो वहीं दूसरी तरफ तीनों राज्यों आंदोलन के दौरान एसी समुदाय के लोगों पर जो मुकदमा दर्ज किए हैं उनको वापस नहीं लिया जाए।
5. उत्तर प्रदेश मे पिछले साल गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव में सपा और बसपा एक साथ उतरी थी। जिसमें भाजपा को नुकसान हुआ था। ऐसे में इसी रणनीति के तहत वो आगे बढ़ना चाहते हैं। वहीं आंकड़ा अब यूपी लोकसभा चुनाव में इन दोनों पार्टियों ने लगाया है।
6. इन दोनों पार्टियों में अपने सहयोगी दलों के क्षेत्रों में सेंध नहीं लगा रही है। मेठी राहुल गांधी का लोकसभा क्षेत्र है जबकि रायबरेली से सोनिया गांधी सांसद हैं। यहां पार्टी कोई उम्मीदवार नहीं उतार रही है।
7. इस बार एसपी-बीएसपी के साथ आरएलडी भी साथ आ सकती है। इससे पश्चिम उत्तर प्रदेश में भी ये महागठबंधन सेंध लगाने की तैयारी में है। इस बार पार्टी को साथ लेकर चलने की योजना सपा और बसपा बना रही है।
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