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लोकसभा चुनाव 2019 महागठबंधन बनाम एनडीए : जानें क्या इस बार एनडीए के सामने खड़ा रहेगा महागठबंधन

लोकसभा चुनाव 2019 की तारीखों का ऐलान हो चुका है। चुनाव की सुगबुगाहट के बीच महागठबंधन बनाम एनडीए का मुद्दा एक बार फिर से गुंज रहा है। महागठंबधन (यूपीए प्लस) और बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बीच 2019 का चुनाव।

लोकसभा चुनाव 2019 महागठबंधन बनाम एनडीए : जानें क्या इस बार एनडीए के सामने खड़ा रहेगा महागठबंधन
लोकसभा चुनाव 2019 महागठबंधन बनाम एनडीए
लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Election 2019) की तारीखों का ऐलान हो चुका है। चुनाव की सुगबुगाहट के बीच महागठबंधन (Mahagathbandhan) बनाम एनडीए (NDA) का मुद्दा एक बार फिर से गुंज रहा है। महागठंबधन (यूपीए प्लस) और बीजेपी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के बीच 2019 का चुनाव। वैसे महागबंधन का नाम सुनते ही बिहार में नीतीश लालू और कांग्रेस की बीच हुए महागंठधन की याद दिलाता है लेकिन यहां हम बात कर रहे हैं। महागबंधन जिसमें कांग्रेस के साथ राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, तेलगु देशम पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, सपा, आरजेडी, आप, जेडीएस समेत यूपीए गठबंधन की वो सभी पार्टियां शामिल हैं। ऐसे में इस बार का चुनाव फिर से खास होने वाला है जब मुकाबला महागठबंधन बनाम एनडीए के बीच होगा।

महागठबंधन (Mahagathbandhan)

कर्नाटक में जेडीएस और कांग्रेस गठबंधन सरकार के शपथ ग्रहण के दौरान कई राजनीति दल एक साथ मंच पर दिखे। जिसके बाद कयास लगाए गए कि मोदी को हराने के लिए महागठबंधन फिर से आ रहा है। ऐसा पहली बार नहीं है। इससे पहले भी गठबंधन होते आए हैं लेकिन एक शख्ससिय के नाम के आगे महागठबंधन को ढेर होते हुए भी देखा गया।
साल 1971 के चुनाव में इंदिरा गांधी सरकार ने भी महागठबंधन को रहा कर सत्ता बनाई थी। कर्नाटक में कुमार स्वामी के शपथ ग्रहण समारोह में एनसीपी प्रमुख शरद पवार, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, सोनिया गांधी, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव को एक मंच पर देखा गया।
लेकिन यहां बसपा प्रमुख मायावती नहीं पहुंचे। इस बार के चुनाव में मायावती ने कांग्रेस से दूरी बनाई हुई है तो वहीं यूपी में सपा के साथ वो मिलकर चुनाव लड़ रही है। यूपीए-विरोधी छोटे-छोटे क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन तैयार कर रहा है।

एनडीए (NDA)

ऐसे में एक बार फिर सवाल उठता है कि क्या चुनाव 2019 के चुनाव में महागठबंधन हराने में कामयाब हो पाएगा। एकजुट हो रहा विपक्ष क्या लोकसभा चुनाव 2019 में एनडीए को हरा सकता है? ऐसे ही तमाम तरह से सवाल उठ रहे हैं। लेकिन अरुण जेटली कह चुके हैं कि इस बार का चुनाव मोदी बनाम अन्य होगा। साल 2014 के चुनाव में भी एनडीए ने अहम भूमिका निभाई।
तो वहीं साल 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाला एनडीए ने मोर्चा मारा और अपनी सरकार बनाई। ऐसे नहीं है कि एनडीए हर मोर्चे पर फेल हुआ हो लेकिन इस बार का चुनाव 2019 यूपीए एनडीए नहीं बल्कि महागठबंधन बनाम एनडीए होने वाला है। तो वहीं साल 2004 में सोनिया गांधी की अगुआई वाला यूपीए ने मनमोहन सिंह के नेतृत्व में सरकार बनाई।
लेकिन साल 2014 में यूपीए सरकार के पास कोई ऐसा चेहरा नहीं था जिसे वो सामने सके। लोकसभा चुनाव खत्म होने तक कांग्रेस के घटक दल यूपीएम में प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम तय नहीं हुआ क्योंकि वहां कई उम्मीदवार जो पीएम बनने की इच्छा रखते थे। इसमें राहुल गांधी, ममता बनर्जी, मायावती, चंद्रबाबू नायडू, शरद पवार और अखिलेश यादव जैसे कई नेता थे।
वहीं भाजपा समेत एनडीए ने नरेंद्र मोदी को अपना पीएम उम्मीदवार घोषित किया और चुनाव के दिन तक मोदी ब्रांड नेता और स्टार प्रचारक बन गए। साल 2014 के चुनाव में पार्टी ने 282 सीटें हासिल की थीं और एनडीएन ने 54 सीटे हासिल की जिसका आकंड़ा 335 पहुंचा।
अगर वर्तमान की बात करें तो इस वक्त भी एनडीए में मोदी के नाम पर ही चुनाव लड़ा जा सकता है लेकिन कांग्रेस ने जहां राहुंल गांधी को तैयार किया तो वहीं इस बार के चुनाव में उनकी बहन प्रिंयका गांधी भी अहम भूमिका निभाने जा रही है। प्रियंका गांधी को कांग्रेस महासचिब बनाया गया है और पार्टी ने उन्हें पूर्वी उत्तर प्रदेश की कमान सौंपी है। ऐसे में बार का चुनाव काफी मजेदार होने वाला है।
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