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Lohri 2019: लोहड़ी मनाने के ये कारण नहीं जानते होंगे आप

लोहड़ी (Lohri 2019) ऐसा खुशनुमा त्योहार (festival) है जो सबके साथ मिल जुलकर मनाया जाता है। पंजाबी (punjabi) समुदाय के लोग इसे खूब धूमधाम से मनाते हैं खासकर वे लोग जिनके घरों में शादी होती है। बेटी की विदाई होती है या फिर घर में नई बहू आयी हो या फिर किसी बच्चे का जन्म हुआ हो तो उस घर में लोहड़ी (lohri 2019) को विशेषकर बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। आइए जानते हैं क्या है लोहड़ी (lohri 2019) की मुख्य परंपराएं (tradition) और कुछ खास बातें।

Lohri 2019: लोहड़ी मनाने के ये कारण नहीं जानते होंगे आप
लोहड़ी (Lohri Festival 2019) का त्योहार आने वाला है। त्योहार तो सभी साथ मिलकर मनाए जाते हैं। लेकिन लोहड़ी (Lohri 2019) में एक अलग ही बात है। लोहड़ी (Lohri) प्रमुख रूप से पंजाबी लोग मनाते हैं। लेकिन यह त्योहार मौकों पर खास हो जाता है। लोहड़ी (Lohri) के मौके पर अगर किसी के घर में बेटी की शादी हो या घर में नई बहू आई हो। या घर में किसी बच्चे का जन्म हुआ हो तो ऐसे लोगों के लिए लोहड़ी का त्योहार (Lohri Festival) और भी खास हो जाता है। क्या आपको पता है कि लोहड़ी क्यों मनाया जाता है (Why we celebrate Lohri)। आइए जानते हैं लोहड़ी मनाने का कारण (Reason for Celebrating Lohri)।

बेटियों के ससुराल भेजते हैं तोहफे

शादी के बाद बेटी की पहली लोहड़ी (lohri 2019) पर मायके वाले लड़की के ससुराल में तोहफे (gifts) भेजते हैं। अकसर मां अपनी बेटियों के लिए कपड़े, मिठाइयां, गजक , रेवड़ी भिजवाती है। इस प्रथा के पीछे भी एक पौराणिक कथा है।
जिसमें राजा दक्ष ने अपने दामाद को बेइज़्ज़त किया था, तो गुस्से में आकर उनकी बेटी ने आत्मदाह कर लिया और दक्ष प्रजापति को इसकी सजा भुगतनी पड़ी। इसलिए प्रायश्चित करने के लिए तमाम मां अपनी बेटियों के घर तोहफे (gifts) भेजती हैं।

बच्चों का बुरी नज़र से बचाव

लोहड़ी (lohri 2019) के शुभ अवसर पर मां बच्चों को अपनी गोद में लेकर बैठती हैं और उन्हें लोहड़ी (lohri 2019) की आग की आंच से तपाया जाता है। यह माना जाता है कि इससे बच्चें को बुरी नज़र नही लगती और बच्चा स्वस्थ्य रहता है।

सूरज उत्तर में

मान्यता है कि लो‍हड़ी (lohri) का त्योहार पर सूरज (sun) दक्षिण (south) से उत्तर (north) में आता है। यह त्योहार पंजाबी (punjabi) समुदाय के लोगों का प्रमुख त्योहार है इसके अलावा इसे हरियाणा (hariyana), दिल्ली (delhi) , हिमाचल (himachal) और कश्मीर (kashmir) में भी खूब धूमधाम से मनाया जाता है।

भगवान श्री कृष्ण से संबंध

द्वापर युग से ही भगवान कृष्ण (lord krishan) और लोहड़ी को लेकर एक पौराणिक कथा प्रचलित हैं। एक बार सभी गोकुलवासी मकर संक्रांति (makar sankranti) की तैयारी में जुटे थे। दूसरी ओर कंस (kans) भी भगवान कृष्ण (lord krishan) को मारने लिए कई चालें चलता था।
इस बार उसने कृष्ण (lord krishan) को मौत देने के लिए लोहिता नाम की राक्षसी को भेजा था। भला भगवान को कौन मार सकता है। भगवान को मारने आई लोहिता राक्षसी (devil) को ही अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। तभी से मकर संक्रांति (makar sankranti) से एक दिन पहले लोहड़ी (lohri 2019) को बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है।

डाकू दुल्ला भट्टी की कहानी

ये कथा मुगल काल की है उस दौर में सुंदरी (sundari) और मुंदरी (mundari) नाम की दो अनाथ लड़कियां थीं। दोनों लड़कियों का चाचा उन्हें किसी अमीर साहूकार को बेचना चाहता था। लेकिन तभी दुल्ला भट्टी (dulla bhatti) नाम के एक डाकू ने उन लड़कियों को उनके चाचा के चंगुल से छुड़ाया और उनकी शादी करवा दी। एक पिता की तरह दोनों का कन्यादान किया। तभी से पंजाब (punjab) में लोहड़ी (lohri 2019) के त्योहार को मनाया जाने लगा।

फसलों के कटने का पर्व

बैसाखी (vaisakhi) की तरह लोहड़ी (lohri 2019) भी पंजाब (punjab) के गांव, फसल और मौसम से ताल्लुक रखती है। इस समय यहां गन्ने की फसलों को काटा जाता है खेतों में सरसों के पीले फूल लहराते दिखाई देते हैं जो बेहद खूबसूरत और मन को शांति देने वाला दृश्य होता है।
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