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Live Update: केंद्रीय मजदूर यूनियनों की हड़ताल का पूरे देश में दिखा असर, जानें भारत बंद की पल-पल की खबर

विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (Central Trade Union) की दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल मंगलवार को शुरू हुई। इन यूनियनों ने सरकार पर श्रमिकों के प्रतिकूल नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है। हड़ताल में शामिल ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि असम, मेघालय, कर्नाटक, मणिपुर, बिहार, झारखंड, गोवा, राजस्थान, पंजाब , छत्तीसगढ़ और हरियाणा में- खास कर औद्योगिक इलाकों में हड़ताल का काफी असर दिख रहा है।

Live Update: केंद्रीय मजदूर यूनियनों की हड़ताल का पूरे देश में दिखा असर, जानें भारत बंद की पल-पल की खबर
विभिन्न केंद्रीय ट्रेड यूनियनों (Central Trade Union) की दो दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल (Bharat Bandh) मंगलवार को शुरू हुई। इन यूनियनों ने सरकार पर श्रमिकों के प्रतिकूल नीतियां अपनाने का आरोप लगाया है। हड़ताल में शामिल ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि असम, मेघालय, कर्नाटक, मणिपुर, बिहार, झारखंड, गोवा, राजस्थान, पंजाब , छत्तीसगढ़ और हरियाणा में- खास कर औद्योगिक इलाकों में हड़ताल का काफी असर दिख रहा है। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में परिवहन विभाग के कर्मचारी और टैक्सी और तिपहिया आटो चालक भी हड़ताल में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भोपाल में परिवहन विभाग पूरी तरह बंद है। हरियाणा राज्य परिवहन निगम के कर्मचारी भी हड़ताल पर हैं।
एटक नेता के अनुसार रेलकर्मियों ने काले फीते पहन कर अपने अपने कार्यस्थल के बाहर बैठकें कर इस हड़ताल को अपना समर्थन जताया है। इस हड़ताल को 10 केंद्रीय श्रम संघों का समर्थन है। इनमें एटक , इंटक, एचएमएस, सीटू, एआईटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा,एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी शामिल हैं।
इन यूनियनों का दावा है कि हड़ताल में 20 करोड़ मजदूर शामिल होंगे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) से जुड़ी मजदूर यूनियन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) इस हड़ताल में शामिल नहीं है। अमरजीत कौर ने कहा कि दूरसंचार, स्वास्थ्य, शिक्षा, कोयला, इस्पात, बिजली, बैंक, बीमा और परिवहन क्षेत्र के कर्मचारी भी हड़ताल का समर्थन कर रहे हैं।
इन यूनियनों ने हड़ताल के दूसरे दिन बुधवार को राजधानी में मंडी हाउस से संसद की ओर विरोध रैली निकालने की घोषणा की है। उनका कहना है कि देश में अन्य स्थानों में भी जुलूस निकाले जाएंगे। हड़ताली यूनियनों ने आरोप लगाया है कि सरकार ने श्रमिकों के मुद्दों पर उसकी 12 सूत्री मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया है।
उनका यह भी कहना है कि श्रम मामलों पर वित्त मंत्री अरुण जेटली की अध्यक्षता में गठित मंत्रियों के समूह ने दो सितंबर 2015 के बाद यूनियनों को वार्ता के लिए एक बार भी नहीं बुलाया है। ये यूनियनें श्रम संघ कानून 1926 में प्रस्तावित संशोधनों का भी विरोध कर रही हैं। उनका कहना है कि इन संशोधनों के बाद यूनियनें स्वतंत्र तरीके से काम नहीं कर सकेंगी।
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