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कड़ी सुरक्षा के बीच खुले सबरीमाला मंदिर के कपाट, 22 अक्टूबर को फिर हो जाएंगे बंद

सबरीमला मंदिर में रजस्वला लड़कियों और महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने के बाद मंदिर जाने के मुख्य रास्ते निलक्कल में बुधवार की सुबह से ही माहौल तनावपूर्ण हो गया।

कड़ी सुरक्षा के बीच खुले सबरीमाला मंदिर के कपाट, 22 अक्टूबर को फिर हो जाएंगे बंद
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सबरीमला मंदिर में रजस्वला लड़कियों और महिलाओं के प्रवेश का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस द्वारा बल प्रयोग किए जाने के बाद मंदिर जाने के मुख्य रास्ते निलक्कल में बुधवार की सुबह से ही माहौल तनावपूर्ण हो गया। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अयप्पा स्वामी मंदिर के दरवाजे पहली बार बुधवार की शाम खुलने वाले हैं। पांच दिन की मासिक पूजा के बाद यह 22 अक्टूबर को फिर बंद हो जाएंगे।

लाइव अपडेट

बुधवार शाम को करीब 5 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच सबरीमाला मंदिर के कपाट खुले, यहां रात 10: 30 बजे तक दर्शन किये जा सकेंगे।

नेटवर्क ऑफ वुमन इन मीडिया इंडिया की महिला पत्रकारों की संस्था ने पंबा और आसपास के क्षेत्रों में महिला पत्रकारों के लिए सुरक्षित वातावरण बनाने की मांग की है।

एनडब्ल्यूएमआई ने कहा कि सरकार को तुरंत पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करनी चाहिए और मीडिया को आश्वस्त करना चाहिए कि संवाददाताओं के जीवन खतरे में नहीं हैं।

नीलक्कल बेस शिविर में हिंसा की घटनाओं पर भाजपा नेता एमएस कुमार ने राज्य में कानून और व्यवस्था बिगड़ने के लिए केरल की एलडीएफ सरकार को जिमीदार बताया है।

भाजपा नेता ने कहा कि यह एक बहुत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है, इसके लिए हम ज़िम्मेदार नहीं हैं। कोई भी बीजेपी कार्यकर्ता इसमें शामिल नहीं है, हम इसकी निंदा करते हैं।

पुलिस की लापरवाही के कारण निलक्कल में हुए हिंसक प्रदर्शन से कई लोग घायल हो गए हैं। इस घटना में कई पत्रकारों को भी चोट लगी है।

सबरीमाला मंदिर मामले में अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्ताए किया गया हैं। इनमे से 9 लोगों को कल गिरफ्तार किया गया था और अन्य 21 लोगों को आज हिरासत में लिया गया हैं। हालांकि उनमें से दो को लोगों को जमानत मिल गई है।

इससे पहले त्रावणकोर देवस्वाम बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष गोपालकृष्णन को भी गिरफ्तार किया गया था।

भगवान अयप्पा स्वामी मंदिर जाने के मुख्य रास्ते निलक्कल पर महिला पुलिसकर्मियों सहित करीब 500 पुलिसकर्मी तैनात हैं। इस बीच पम्बा में श्रद्धालुओं के एक अन्य समूह ने गांधीवादी तरीके से अपना विरोध जताया।

सबरीमला पहाड़ी से करीब 20 किलोमीटर दूर निलक्कल में बड़ी संख्या में तैनात पुलिसकर्मियों ने महिलाओं के प्रवेश के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे समूह ‘सबरीमला आचार संरक्षण समिति' के तंबू आदि भी हटा दिए हैं।

अयप्पा स्वामी मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कुछ श्रद्धालू धरना दे रहे हैं और अयप्पा मंत्र का जाप कर रहे हैं।

बुधवार तड़के जब प्रदर्शनकारियों ने मंदिर तक जाने के मुख्य रास्ते पर बसों को रोकने का प्रयास किया तो पुलिस को उनके खिलाफ बल प्रयोग करना पड़ा।

निलक्कल में मौजूद सबरीमला आचार संरक्षण समिति के कुछ कार्यकर्ताओं ने मीडियाकर्मियों को भी कथित रूप से उनका काम करने से रोका था। हालांकि, अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती के बाद सभी मीडियाकर्मी निलक्कल लौट आए हैं।

पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही वहां बेहद कम संख्या में मौजूद प्रदर्शनकारी भाग निकले। मासिक पूजा के लिए मंदिर खुलने से कुछ घंटे पुलिस ने कहा कि वह किसी को भी लोगों के आने-जाने में अवरोध पैदा नहीं करने देगी।

निलक्कल का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथों में लेते हुए पुलिस ने अयप्पा मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं के रास्ते में अवरोध पैदा करने वालों को चेतावनी दी। प्रदर्शनकारियों में कुछ ने पम्बा जाने वाले वाहनों को जांचा और उनमें सवार 10 से 50 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर जाने से रोक दिया, इस पर पुलिस ने कड़ी कार्रवाई की।

सबरीमला आचार संरक्षण समिति के कार्यकर्ताओं ने सोमवार की रात तमिलनाडु से पम्बा जा रहे 45 और 40 वर्ष आयु के दंपति को केएसआरटीसी के बस से कथित रूप से उतरने को बाध्य कर दिया था। हालांकि, दंपति का कहना है कि वह सिर्फ पम्बा तक जाएंगे और सबरीमला पहाड़ी पर नहीं चढ़ेंगे। बाद में पुलिस उन्हें सुरक्षित ले गई।

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