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ईरान से प्रतिबंध हटा, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में होगी कमी

दरअसल, ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए दुनियाभर के 6 सबसे प्रभावशाली देश तेहरान के साथ ऐतिहासिक समझौते के लिए तैयार हो गए हैं। इससे भारत के साथ-साथ उन तमाम देशों को फायदा होगा, जो बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करते हैं।

ईरान से प्रतिबंध हटा, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में होगी कमी

मुंबई.पिछले कई दिनों कच्चे तेल का दाम में गिरावट लगातार जारी है। अब आगे भी कच्चे तेल के दामों में मंदी रहने की संभावना है। क्योंकि ईरान अब जल्द ही बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति कर सकेगा। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की तरफ से ईरान पर लगाए प्रतिबंध हटाए जाने का रास्ता साफ हो गया है। ऐसे में भारत ईरान से ज्यादा तेल आयात कर सकेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति बढ़ने से कीमतों में कमी होगी।

देश में 238.63 अरब डालर एफडीआई

दरअसल, ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकने के लिए दुनियाभर के 6 सबसे प्रभावशाली देश तेहरान के साथ ऐतिहासिक समझौते के लिए तैयार हो गए हैं। इससे भारत के साथ-साथ उन तमाम देशों को फायदा होगा, जो बड़े पैमाने पर कच्चा तेल आयात करते हैं। स्विट्जरलैंड के लुसाने में गुरवार देर रात तक चली मैराथन बातचीत के बाद राजनयिक समझौते की रूपरेखा पर राजी हो गए। इसके फौरन बाद अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा, यह अच्छा सौदा है, हमारे मूल उद्देश्यों को पूरा करता है। इस समझौते तक पहुंचने के लिए अमेरिका ने ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, रूस, चीन और यूरोपीय संघ की मदद ली।

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ईरान को प्रतिबंध से राहत

इस करार की बदौलत अंतरराष्ट्रीय समुदाय अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषषद की तरफ से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने पर सहमत हो गया है। ओबामा ने कहा, यह राहत ईरान की तरफ से समझौते के प्रावधान लागू किए के एवज में मिलेगी। यदि ईरान इनका उल्लंघन करता है तो प्रतिबंध दोबारा लगाए जा सकते हैं।

पूरा असर अगले साल

ईरान पर लगाए गए वित्तीय और उर्जा संबधी प्रतिबंध पूरी तरह से खत्म होने में थोड़ा वक्त लगेगा। समझौते के प्रावधान पूरी तरह लागू होने के कुछ महीने बाद सभी प्रतिबंध हटाए जाएंगे। इसका मतलब है कि बाजार में ईरानी तेल की कीमत आवक बढ़ेगी,लेकिन इस साल इसके पूरा रफ्तार पकड़ने की संभावना कम है।

भारत को फायदा सालाना आधार पर

चीन के बाद भारत ईरान का दूसरा सबसे ब़़डा ग्राहक रहा है। लेकिन, अमेरिकी दबाव के कारण वहां से तेल का आयात धीरे-धीरे कम होता गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले एक दशक में यह पहला मौका है जब मार्च के दौरान भारत ने ईरान से तेल का आयात बिलकुल नहीं किया।

प्रतिबंधों का असर अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से ईरान फिलहाल महज 10-11 लाख बैरल रोजाना निर्यात कर सकता है। यही कारण है कि एशिया के ज्यादातर ग्राहकों को ईरान से निर्यात उसी स्तर पर बनाए रखना पड़ रहा है, जिस स्तर पर साल 2013 के अंत में था।

नीचे की स्लाइड्स में जानिए, बढ़ेगी कच्चे तेल की आपूर्ति-

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