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एक साल हो सकता है ‘मॉम’ का जीवन, पहले छह महीने ही तय किया गया था

ऑर्बिटर की जीवन अवधि पहले से तय छह महीने से बढ़ाकर एक साल तक की जा सकती है

एक साल हो सकता है ‘मॉम’ का जीवन, पहले छह महीने ही तय किया गया था
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तिरूवनंतपुरम. मार्स ऑर्बिटर मिशन (मॉम) की कामयाबी पर संतोष जताते हुए वालियामला स्थित लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर (एलपीएससी) के निदेशक के. सिवन ने शुक्रवार को कहा कि ऑर्बिटर की जीवन अवधि पहले से तय छह महीने से बढ़ाकर एक साल तक की जा सकती है। स्थानीय प्रेस क्लब की ओर से आयोजित एक अभिनंदन समारोह के दौरान मीडिया से मुखातिब सिवन ने कहा, ‘‘उपग्रह का जीवन छह महीने के लिए निर्धारित था।
अब हम समझते हैं कि इसे एक साल तक बढ़ाया जा सकता है।’ मंगल मिशन में अहम भूमिका नभाने वाले लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम्स सेंटर के कुछ वैज्ञानिकों को सम्मानित करने के लिए प्रेस क्लब में समारोह का आयोजन किया गया था । सिवन ने कहा, ‘‘हम कक्षा को ‘प्रीसिजन मोड’ में रखने को लेकर उत्सुक नहीं हैं । हमारा मकसद उपग्रह को सक्रिय रखना और प्रणोदक के एक-एक ग्राम का इस्तेमाल करना है। मंगल मिशन परियोजना की आलोचना के बाबत सिवन ने कहा कि यह सिर्फ लाल ग्रह की तस्वीर लेने का मामला नहीं है । उन्होंने कहा कि यह युवा पीढ़ी को दी गई एक संभावना है।
यह उनके लिए एक चुनौती की तरह है । जब आपके पास कुछ चुनौती देने के लिए होता है तभी आप आगे जा सकते हैं। इसरो ने एक रॉकेट प्रक्षेपण से शुरूआत की थी जो अब पथ प्रदर्शक बन चुका है। और अंतरिक्ष के अनुप्रयोगों से हर नागरिक किसी न किसी तरह जुड़ा हुआ है। लिहाजा, मंगल मिशन भी अगली पीढ़ी के लिए है।
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