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अब कराना पड़ेगा शादी का पंजीयन, विधि आयोग का सुझाव

आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि बिना किसी वाजिब वजह के विवाह के पंजीकरण में देरी के लिए 5 रुपए प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना वसूला जाए।

अब कराना पड़ेगा शादी का पंजीयन, विधि आयोग का सुझाव

विवाह पंजीकरण को अनिवार्य बनाने का पक्ष लेते हुए विधि आयोग ने कहा कि इससे ‘वैवाहिक धोखाधड़ी' रोकने में मदद मिलेगी।

शादी का कोई रिकॉर्ड न होने की वजह से महिलाओं को पत्नी का दर्जा नहीं मिलने से भी संरक्षण मिल सकेगा।

आयोग ने केंद्र को सलाह दी है कि विवाह के 30 दिन के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य किया जाए।

विधि मंत्रालय को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में आयोग ने कहा कि अनिवार्य पंजीकरण के अभाव में वैध विवाह की शर्तों को पूरा किए बगैर महिलाओं को शादी का धोखा दिया जा रहा है।

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रिपोर्ट में कहा गया, इसे महिलाएं सामाजिक मान्यता और कानूनी सुरक्षा से वंचित रह जाती हैं। ऐसी फर्जी शादियां खास तौर पर अप्रवासी भारतीयों में काफी हो रही हैं। अनिवार्य पंजीकरण से यह सुनिश्चित हो सकेगा कि एक वैध विवाह की शर्त को पूरा किया गया है।

सरकार को जटिल कानूनी मुद्दों पर सलाह देने वाले आयोग ने कहा कि उसकी राय है कि विवाह का अनिवार्य पंजीकरण ‘अनिवार्य सुधार' है।

आयोग का सुझाव

आयोग ने कहा कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 में विवाह पंजीकरण के अनिवार्य प्रावधान को जोड़कर मामूली संशोधन के साथ बात बन सकती है।

उसने साफ किया कि विवाह से जुड़े पर्सनल लॉ में संशोधन करने की कोई जरूरत नहीं है।

5 रुपए हर रोज

आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि बिना किसी वाजिब वजह के विवाह के पंजीकरण में देरी के लिए 5 रुपए प्रति दिन के हिसाब से जुर्माना वसूला जाए।

रिपोर्ट में यह भी जोड़ा है कि जुर्माने की अधिकतम रकम 100 रुपए रखी जाए।

क्या होगा फायदा

आयोग ने रिपोर्ट में कहा है कि शादी के अनिवार्य रजिस्ट्रेशन से जबरन विवाह या नाबालिगों के विवाह की चलन को खत्म करने में मदद मिलेगी और इससे लैंगिक समानता लाने व महिलाओं के सशक्तिकरण में मदद मिलेगी।

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